मेघालय में BJP को लगा जैकपॉट: सहयोगी UDP में बड़ी टूट, 8 मौजूदा विधायक भाजपा में शामिल; विधानसभा में 2 से सीधे 10 हुआ संख्याबल

मेघालय में BJP को लगा जैकपॉट: सहयोगी UDP में बड़ी टूट, 8 मौजूदा विधायक भाजपा में शामिल; विधानसभा में 2 से सीधे 10 हुआ संख्याबल

पूर्वोत्तर भारत की राजनीति में एक बड़ा भूचाल देखने को मिला है। मेघालय में सत्तारूढ़ मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (MDA) सरकार की प्रमुख घटक और राज्य की सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टियों में शुमार यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) में दो-तिहाई की भारी टूट हो गई है। यूडीपी के कुल 12 विधायकों में से 8 मौजूदा विधायकों ने बगावत करते हुए औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है।

नई दिल्ली स्थित भाजपा के केंद्रीय मुख्यालय में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा की मौजूदगी में इन सभी आठ विधायकों को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। इस सामूहिक दलबदल के साथ ही 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में भाजपा का संख्याबल महज 2 विधायकों से उछलकर सीधे 10 पर पहुंच गया है।

कौन-कौन से 8 विधायक बने भाजपाई?

भाजपा में शामिल होने वाले सभी आठ नेता मेघालय विधानसभा के मौजूदा विधायक हैं। इनमें पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ क्षेत्रीय नेता शामिल हैं:

  1. लहकमन रिंबुई (Lahkmen Rymbui) – पूर्व कैबिनेट मंत्री

  2. पियुस मारवीन (Pius Marwein)

  3. किर्मेन शायला (Kyrmen Shylla)

  4. मायरेलबॉर्न सिएम (Mayralborn Syiem)

  5. मैथ्यू कुरबाह (Mathew Kurbah)

  6. ओलान सिंह सुइन (Olan Sing Suin)

  7. बालाजीड कुफार सिनरेम (Balajied Kupar Synrem)

  8. सिनशार लिंगदोह थाबाह (Synshar Lyngdoh Thabah)

चूंकि यूडीपी के कुल 12 विधायकों में से दो-तिहाई (8 विधायक) एक साथ अलग होकर भाजपा में शामिल हुए हैं, इसलिए संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत इन पर अयोग्यता का खतरा भी लागू नहीं होगा।

मेघालय विधानसभा का बदला सियासी समीकरण: अब नंबर-2 पार्टी बनी भाजपा

मेघालय में मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व में नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) की अगुवाई वाली गठबंधन (MDA) सरकार चल रही है। 60 सदस्यीय सदन में अब तक एनपीपी के बाद यूडीपी 12 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी।

इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद:

  • भाजपा की छलांग: भाजपा के पास पहले केवल 2 विधायक (सनबोर शुलई और ए.एल. हेक) थे। अब 8 नए विधायकों के जुड़ने से भाजपा की कुल संख्या 10 हो गई है, जिससे वह गठबंधन और विधानसभा में सीधे तौर पर दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन गई है।

  • यूडीपी को भारी झटका: 8 विधायकों के छिटकने के बाद यूडीपी का संख्याबल घटकर मात्र 4 विधायकों पर सिमट गया है।

  • मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी की मांग: अब तक 2 विधायकों वाली भाजपा को सरकार में केवल एक मंत्री पद मिला हुआ था। अब 10 विधायक होने के बाद पार्टी राज्य मंत्रिमंडल में अतिरिक्त मंत्री पदों और बड़े मंत्रालयों की मांग कर सकती है।

विधायकों ने क्यों छोड़ा यूडीपी? सामने आईं ये प्रमुख मांगें

भाजपा की सदस्यता लेने के बाद पूर्व मंत्री लहकमन रिंबुई ने स्पष्ट किया कि उनका यह फैसला राज्य के दीर्घकालिक विकास और अहम जन-आकांक्षाओं को पूरा कराने के उद्देश्य से लिया गया है:

  • खासी और गारो भाषा को संवैधानिक मान्यता: मेघालय की स्थानीय खासी और गारो भाषाओं को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग।

  • कोयला खनन के नियमों का सरलीकरण: राज्य में स्थानीय आजीविका से जुड़े रैट-होल और वैज्ञानिक कोयला खनन के नियमों को केंद्र सरकार से मंजूरी दिलाना।

  • डबल इंजन का विकास: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्वागत करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और शांति व्यवस्था में जो ऐतिहासिक काम हुए हैं, उससे प्रभावित होकर क्षेत्रीय नेता राष्ट्रीय मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

2028 विधानसभा चुनाव से पहले जमीन मजबूत करने की रणनीति

मेघालय में अब तक भाजपा को केवल गैर-आदिवासी और शहरी इलाकों की पार्टी के रूप में देखा जाता था। लेकिन खासी और जयंतिया हिल्स के मजबूत आदिवासी विधायकों के एकमुश्त पार्टी में आने से भाजपा ने राज्य के ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में अपनी पैठ गहरी कर ली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब भविष्य में किसी क्षेत्रीय दल की बैसाखी पर रहने के बजाय पूरे पूर्वोत्तर की तरह मेघालय में भी अपने दम पर सरकार बनाने की दीर्घकालिक रणनीति पर आगे बढ़ रही है।