देवेंद्र फडणवीस की मोदी कैबिनेट में एंट्री पर भाजपा मंत्री पंकजा मुंडे का बड़ा बयान: बोलीं- 'बिना RSS और PM मोदी की मंजूरी के नहीं हो सकता ऐसा फैसला

देवेंद्र फडणवीस की मोदी कैबिनेट में एंट्री पर भाजपा मंत्री पंकजा मुंडे का बड़ा बयान: बोलीं- 'बिना RSS और PM मोदी की मंजूरी के नहीं हो सकता ऐसा फैसला

महाराष्ट्र की सियासत से लेकर दिल्ली के सत्ता के गलियारों तक पिछले कई हफ्तों से यह सुगबुगाहट लगातार तैर रही है कि भारतीय जनता पार्टी के सबसे कद्दावर मराठा क्षत्रप देवेंद्र फडणवीस को बहुत जल्द केंद्र की राजनीति में लाया जा सकता है। कभी उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में गृह या रक्षा जैसे किसी भारी-भरकम मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपने की चर्चाएं होती हैं, तो कभी विपक्ष के दावे उन्हें केंद्र में और बड़ा रोल दिए जाने की हवा देते हैं। इन तमाम कयासों और राजनीतिक बयानों के बीच महाराष्ट्र सरकार की वरिष्ठ मंत्री और भाजपा की दिग्गज नेता पंकजा मुंडे ने इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। कोल्हापुर दौरे के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए पंकजा मुंडे ने दो-टूक शब्दों में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हरी झंडी के बिना इतना बड़ा फैसला किसी भी सूरत में संभव नहीं है।

पंकजा मुंडे के इस बयान ने राजनीतिक विश्लेषकों के कान खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां उन्होंने फडणवीस के संगठनात्मक कद और प्रशासनिक क्षमता की खुलकर तारीफ की, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने यह साफ संकेत भी दे दिया कि महाराष्ट्र में आगामी राजनीतिक समीकरणों, स्थानीय निकाय चुनावों और मराठा आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों को देखते हुए राज्य को वर्तमान में फडणवीस के नेतृत्व की सबसे ज्यादा दरकार है। पंकजा मुंडे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी खेमे, विशेष रूप से उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता संजय राउत लगातार यह दावा कर रहे हैं कि नागपुर (आरएसएस मुख्यालय) और दिल्ली का शीर्ष नेतृत्व फडणवीस को केंद्र में एक राष्ट्रीय चेहरे के तौर पर स्थापित करने का खाका तैयार कर चुका है।

'ढाई दशक से साथ काम कर रही हूं': पंकजा ने की फडणवीस की तारीफ, पर महाराष्ट्र में रहने को बताया जरूरी

कोल्हापुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों के तीखे सवालों का जवाब देते हुए पंकजा मुंडे ने किसी भी तरह की हिचकिचाहट के बिना अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "देवेंद्र फडणवीस एक बेहद प्रभावशाली, सक्षम और अकादमिक रूप से अत्यंत मजबूत राजनेता हैं। मैं पिछले करीब ढाई दशकों से उनके साथ संगठन और सरकार में कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हूं। एक सहयोगी के तौर पर मैं सिर्फ यही प्रार्थना कर सकती हूं कि वे अपने वर्तमान पद से भी आगे बढ़ें और नई ऊंचाइयों को छुएं। लेकिन अगर आज की जमीनी हकीकत की बात की जाए, तो महाराष्ट्र को उनकी आज वहीं जरूरत है जहां वे इस समय मौजूद हैं।"

पंकजा मुंडे ने साफ किया कि केंद्र में जाने या राज्य में बने रहने का फैसला कोई एकतरफा नहीं होता। उन्होंने कहा, "इतने बड़े कद के नेता के कार्यक्षेत्र में बदलाव का फैसला केवल अखबारों की सुर्खियों या अटकलों से तय नहीं होता। ऐसा ऐतिहासिक फैसला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आपसी सहमति और आधिकारिक मंजूरी के बिना कतई नहीं हो सकता।" उनके इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा का आंतरिक थिंक-टैंक इस बात को भली-भांति समझता है कि महाराष्ट्र जैसे देश के दूसरे सबसे बड़े आर्थिक और राजनीतिक राज्य की कमान से फडणवीस को अचानक हटाना राज्य में सत्ताधारी गठबंधन के लिए एक बड़ा शून्य पैदा कर सकता है।

संजय राउत का सनसनीखेज दावा: 'उप-प्रधानमंत्री' और मोदी के उत्तराधिकारी की चर्चाओं पर मचा घमासान

इस पूरे विवाद की जड़ में शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत का वह हालिया बयान है, जिसने महाराष्ट्र से लेकर संसद भवन तक सनसनी फैला दी थी। संजय राउत ने दावा किया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ केंद्र की राजनीति में एक युगांतरकारी बदलाव का पक्षधर है। राउत के मुताबिक, भाजपा का मातृ संगठन 'भगवा परिवार' अब दिल्ली के बाहर के किसी ऐसे मजबूत, युवा और वैचारिक रूप से परिपक्व नेता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर तैयार करना चाहता है, जिसकी प्रशासनिक पकड़ बेदाग हो।

राउत ने यहां तक कह दिया था कि फडणवीस को दिल्ली बुलाकर मोदी मंत्रिमंडल में 'उप-प्रधानमंत्री' या नंबर-दो की हैसियत दी जा सकती है और उनकी जगह महाराष्ट्र में चंद्रशेखर बावनकुले या किसी अन्य वरिष्ठ ओबीसी चेहरे को आगे किया जा सकता है। हालांकि, भाजपा नेताओं ने राउत के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे महाविकास अघाड़ी (MVA) की हताशा और गठबंधन में भ्रम फैलाने की सोची-समझी साजिश करार दिया था। पंकजा मुंडे का ताजा बयान सीधे तौर पर राउत के उसी नैरेटिव का जवाब माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने साफ कर दिया कि फैसले बंद कमरों में विरोधी दलों के बयानों से नहीं, बल्कि पार्टी की सर्वोच्च वैचारिक संस्था तय करती है।

खुद फडणवीस ने दिया था करारा जवाब: 'लोग पतंग उड़ाते रहें, मैं मुंबई में ही रहकर सेवा करूंगा'

दिलचस्प बात यह है कि जब खुद देवेंद्र फडणवीस से पिछले दिनों उनके दिल्ली दौरों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री से हुई मुलाकातों के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में जाने के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने बेहद तीखे और व्यंग्यात्मक अंदाज में अफवाहों को खारिज कर दिया था। फडणवीस ने मुस्कुराते हुए कहा था, "जब भी मैं राज्य की विकास परियोजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स या पर्यावरण मंजूरियों के सिलसिले में दिल्ली आता हूं, तो कुछ लोगों को लगने लगता है कि मेरा बोरिया-बिस्तर दिल्ली के लिए बंध रहा है। मैं ऐसे सभी लोगों को साफ बता देना चाहता हूं कि लोग चाहे जितनी पतंग उड़ाएं, हवा में जितने गुब्बारे छोड़ें या खयालों में आसमान पर जितने महल बनाएं, मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।"

फडणवीस ने कहा था कि महाराष्ट्र की जनता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें राज्य की बागडोर और विकास की जो जिम्मेदारी सौंपी है, वे उसे पूरी निष्ठा से निभाते रहेंगे। महाराष्ट्र को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य और राज्य में चल रहे बुलेट ट्रेन, कोस्टल रोड, मेट्रो नेटवर्क और वधावन पोर्ट जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स उनकी पहली प्राथमिकता हैं। ऐसे में उनका पूरा ध्यान केवल मुंबई और राज्य के कल्याण पर केंद्रित है।

मनोज जरांगे के अनशन और मराठा आरक्षण की आग: महाराष्ट्र में क्यों है फडणवीस की अनिवार्य जरूरत?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंकजा मुंडे द्वारा "महाराष्ट्र में फडणवीस की जरूरत" पर जोर देने के पीछे राज्य का मौजूदा सामाजिक और जातीय तनाव भी एक बहुत बड़ा कारण है। मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल एक बार फिर जालना के अंतरवाली सराटी में अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं। जरांगे की मांग है कि जिन मराठा परिवारों के कुनबी रिकॉर्ड मिले हैं, उन्हें बिना शर्त ओबीसी कोटे में शामिल कर जाति प्रमाण पत्र दिए जाएं, साथ ही 'सगे-संबंधी' (रक्त संबंधी) ड्राफ्ट और सतारा-कोल्हापुर गजेटियर के प्रावधानों को तत्काल प्रभाव से कानूनी रूप दिया जाए।

इस मुद्दे पर भी पंकजा मुंडे ने कोल्हापुर में अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्य सरकार संविधान के दायरे में रहकर जरांगे की मांगों के साथ न्याय करने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील की अगुवाई में बनी कैबिनेट उप-समिति लगातार प्रदर्शनकारियों से संवाद स्थापित कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मराठा और ओबीसी समुदायों के बीच बढ़ते ध्रुवीकरण को संतुलित करने, महायुति (भाजपा-शिंदे शिवसेना-अजित पवार एनसीपी) के जटिल गठबंधन को एक सूत्र में बांधे रखने और राज्य की नौकरशाही पर सख्त नियंत्रण रखने के लिए फडणवीस का मुंबई में मौजूद रहना भाजपा के लिए जीवन-मरण का प्रश्न है। यदि इस संवेदनशील मोड़ पर फडणवीस को दिल्ली स्थानांतरित किया जाता है, तो राज्य की राजनीति में सत्ता संतुलन बिगड़ने का खतरा पैदा हो सकता है।

दिल्ली की बिसात और 2029 की लंबी रणनीति: क्या भविष्य में राष्ट्रीय भूमिका निभाएंगे फडणवीस?

भले ही तात्कालिक रूप से फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलों पर विराम लग गया हो, लेकिन संघ और भाजपा के रणनीतिक हलकों में यह बात किसी से छिपी नहीं है कि देवेंद्र फडणवीस लंबे समय तक केवल एक राज्य तक सीमित रहने वाले नेता नहीं हैं। उनकी उम्र, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं से निकला उनका गहरा वैचारिक जुड़ाव, धाराप्रवाह हिंदी-अंग्रेजी-मराठी में संवाद की कला और राष्ट्रीय स्तर के नीतिगत मामलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें भाजपा की भावी राष्ट्रीय लीडरशिप की पहली कतार में खड़ा करती है।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जब भी केंद्र में मंत्रिमंडल का कोई बड़ा फेरबदल होगा या संगठन के शीर्ष स्तर पर नई जिम्मेदारियां बांटी जाएंगी, तो फडणवीस का नाम स्वाभाविक रूप से सबसे ऊपर रहेगा। लेकिन वह समय आज नहीं है। फिलहाल भाजपा का पूरा ध्यान महाराष्ट्र में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने, गठबंधन के भीतर सीटों और सत्ता के तालमेल को दुरुस्त रखने और जनकल्याणकारी योजनाओं के दम पर जनता का भरोसा जीतने पर है। पंकजा मुंडे के इस बयान ने यह शीशे की तरह साफ कर दिया है कि नागपुर से लेकर दिल्ली तक, पार्टी आलाकमान की प्राथमिकता सूची में फडणवीस फिलहाल महाराष्ट्र के सबसे मजबूत 'संकटमोचक' के रूप में ही अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।