'अब चुप नहीं बैठेगी भाजपा': SIR और वोटर लिस्ट विवाद पर कांग्रेस के खिलाफ राष्ट्रव्यापी काउंटर अभियान का खाका तैयार
निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस व विपक्षी दलों द्वारा सड़कों पर किए जा रहे प्रदर्शनों पर अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने निर्णायक पलटवार की तैयारी कर ली है। अब तक केवल बयानों और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रहने के बाद सत्ताधारी दल ने संगठन स्तर पर यह तय किया है कि कांग्रेस द्वारा संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने और 'वोट चोरी' का नैरेटिव गढ़ने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने देशव्यापी स्तर पर सांसदों, विधायकों, प्रदेश इकाइयों और डिजिटल विंग को मैदान में उतारने का पूरा एक्शन प्लान तैयार किया है।
1. देशव्यापी प्रेस कॉन्फ्रेंस और 'तथ्य बनाम भ्रम' अभियान
भाजपा की रणनीति के तहत अगले हफ्ते से देश के सभी राज्यों की राजधानियों और प्रमुख जिला मुख्यालयों में एक साथ समन्वयित प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएंगी:
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आंकड़ों से जवाब: भाजपा नेता आंकड़ों के जरिए जनता को बताएंगे कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि यह समय-समय पर मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से पलायन कर चुके लोगों और फर्जी/डुप्लिकेट नामों को हटाने के लिए अपनाई जाने वाली एक स्थापित संवैधानिक व विधिक प्रक्रिया है।
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तमिलनाडु और गैर-भाजपा राज्यों का उदाहरण: पार्टी उन राज्यों के आंकड़े सामने रखेगी जहां गैर-भाजपा सरकारें हैं और जहां नियमित पुनरीक्षण के तहत लाखों नाम हटाए गए। उदाहरण के तौर पर, तमिलनाडु में 97 लाख और अन्य राज्यों में भी लाखों प्रविष्टियों का शुद्धिकरण हुआ, लेकिन वहां कांग्रेस ने कोई आपत्ति नहीं जताई।
2. कांग्रेस के 70 साल के इतिहास और 'वोट बैंक' पर सीधा हमला
भाजपा इस अभियान में कांग्रेस पर यह आरोप लगाएगी कि वह केवल अपने अवैध वोट बैंक और घुसपैठियों के फर्जी पहचान पत्रों को बचाने के लिए संस्थाओं पर कीचड़ उछाल रही है:
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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का पर्दाफाश: भाजपा जनता के बीच यह संदेश ले जाएगी कि देश में आजादी के बाद से अब तक हुए कुल बड़े पुनरीक्षणों में से अधिकांश कांग्रेस के शासनकाल (नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और नरसिम्हा राव के दौर) में ही हुए थे। तब इसे 'पारदर्शिता' बताया जाता था, लेकिन आज जब तकनीकी रूप से डुप्लिकेट वोटर आईडी पकड़ी जा रही हैं, तो कांग्रेस इसे लोकतंत्र की हत्या बता रही है।
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फर्जी राशन कार्ड और मनरेगा लाभार्थी कार्ड का तर्क: भाजपा प्रवक्ता यह सवाल उठाएंगे कि जिस तरह देश में करोड़ों फर्जी राशन कार्ड और मनरेगा के फर्जी लाभार्थियों को डिजिटल आधार लिंकिंग से हटाया गया, उसी तरह निष्पक्ष चुनाव के लिए पारदर्शी वोटर लिस्ट तैयार करने में कांग्रेस को क्या आपत्ति है?
3. बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की मोर्चेबंदी: फॉर्म-6 और फॉर्म-7 की हकीकत
पार्टी अपने बूथ-लेवल एजेंट्स (BLA) और पन्ना प्रमुखों को सीधे ग्राउंड पर एक्टिव करेगी:
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दावा और आपत्ति की प्रक्रिया: कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है कि वे जनता को बताएं कि यदि किसी पात्र नागरिक का नाम त्रुटिवश कटा है, तो चुनाव आयोग ने 'फॉर्म 6' (नया नाम जोड़ना) और 'फॉर्म 8' (संशोधन) का सरल कानूनी विकल्प दे रखा है।
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कांग्रेस के झूठ को घर-घर एक्सपोज करना: भाजपा कार्यकर्ता घर-घर जाकर यह स्पष्ट करेंगे कि आयोग ने किसी का वैध मताधिकार नहीं छीना, बल्कि मृत और दोहरे नामों को हटाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है।
4. सोशल मीडिया और डिजिटल विंग का महाअभियान
विपक्ष द्वारा सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे 'वोट चोरी' और 'रिजीम चेंज' के अभियानों को काउंटर करने के लिए भाजपा का आईटी सेल लघु वीडियो, इन्फोग्राफिक्स और एक्सप्लेनर जारी करेगा:
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स्वतंत्र चुनाव प्रणाली की साख पर विदेशी बयानों और विपक्षी साजिशों के बीच सांठगांठ को उजागर किया जाएगा।
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यह दिखाया जाएगा कि कैसे चुनाव में हार के डर से कांग्रेस पहले ईवीएम (EVM) पर सवाल उठाती थी और अब अपनी खिसकती जमीन को देखते हुए वोटर लिस्ट और मुख्य चुनाव आयुक्त पर बेबुनियाद आरोप लगा रही है।
भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि इस चौतरफा आक्रामक अभियान से कांग्रेस का 'विक्टिम कार्ड' पूरी तरह निष्प्रभावी हो जाएगा और जनता के सामने यह स्पष्ट हो जाएगा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण एक मजबूत लोकतंत्र के लिए क्यों अनिवार्य है।