तुकाराम मुंढे के FDA पर भड़का बॉम्बे हाईकोर्ट: कमियां दूर होने पर भी छीने रखा लाइसेंस, अदालत ने लगाई फटकार
महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा नियमों के सख्त अनुपालन के लिए लगातार ताबड़तोड़ छापेमारी कर रहे तेजतर्रार आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के नेतृत्व वाले खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) को बॉम्बे हाईकोर्ट से कड़ी फटकार लगी है। हाईकोर्ट ने विभाग द्वारा बिना सोचे-समझे और खामियां दूर करने के बाद भी व्यवसायों के लाइसेंस निलंबित रखने की जिद पर गहरी नाराजगी जताई।
जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम ए. अंखड़ की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए साफ कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन अधिकारियों का यह अड़ियल रवैया व्यावहारिक न होकर नुकसानदेह साबित हो रहा है। अदालत ने कड़े शब्दों में पूछा कि क्या अधिकारी खुद को कानून से ऊपर या भगवान समझ बैठे हैं, जो नियमों का 80 से 90 फीसदी से ज्यादा अनुपालन करने के बाद भी प्रतिष्ठानों को काम करने से रोक रहे हैं।
पुणे की 'सिद्धार्थ एग्रो' और स्वीट शॉप के मामले में कोर्ट का कड़ा रुख
बॉम्बे हाईकोर्ट में पुणे की पशु आहार और डेयरी उत्पाद निर्माता कंपनी 'सिद्धार्थ एग्रो' ने एफडीए द्वारा लाइसेंस रद्द किए जाने के खिलाफ याचिका दाखिल की थी।
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क्या था मामला: कंपनी पर जुलाई महीने में एफडीए ने छापा मारकर कमियों के आधार पर लाइसेंस निलंबित कर दिया था। कंपनी ने सभी बताई गई खामियों को ठीक कर नए सिरे से जांच का आवेदन किया। इसके बावजूद विभाग ने निलंबन हटाने में देरी की और प्रतिष्ठान को बंद रखा।
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अदालत की टिप्पणी: पीठ ने कहा, "जब संस्थान ने सभी कमियों को दूर कर लिया है, तो उसे राज्य के अधिकारियों की देरी और सुस्ती की सजा नहीं मिलनी चाहिए। जिस आदेश का कोई औचित्य ही नहीं बचा, उसे रद्द कराने के लिए किसी संस्थान को बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर करना पूरी तरह अनुचित है। इससे कंपनियों, कर्मचारियों और पूरी सप्लाई चेन को भारी नुकसान होता है।"
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स्वीट्स शॉप पर 5 लाख का मुआवजा: इससे पहले भी पुणे की एक मिठाई दुकान के मामले में कोर्ट ने एफडीए पर 5 लाख रुपये का हर्जाना ठोका था, क्योंकि दुकान द्वारा 36 में से 35 सुरक्षा मानकों (98% अनुपालन) को पूरा करने के बावजूद विभाग ने उसका लाइसेंस बहाल नहीं किया था।
मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) रेस्तरां मामले में भी एफडीए को पीछे हटने पर किया मजबूर
हाल ही में मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) परिसर में स्थित 5 रेस्तरां के लाइसेंस निलंबन को लेकर भी बॉम्बे हाईकोर्ट ने एफडीए के तरीके पर सवाल खड़े किए थे।
ताजा जांच रिपोर्ट में जब यह सामने आया कि रेस्तरां 88 फीसदी तक नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे थे, तब अदालत की सख्त फटकार के बाद एफडीए को अपने निलंबन आदेश को वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा और सभी भोजनालयों को दोबारा खोलने का रास्ता साफ हुआ। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को 'हठधर्मी' बनने के बजाय 'व्यावहारिक' नजरिया अपनाना चाहिए।
तुकाराम मुंढे के सख्त रुख और अदालती दखल के बीच खिंची लकीर
आईएएस तुकाराम मुंढे अपनी सख्त कार्यप्रणाली और कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं। एफडीए कमिश्नर का पद संभालने के बाद से उन्होंने राज्यभर में सैकड़ों विनिर्माण इकाइयों और बिक्री केंद्रों पर छापेमारी कर अवैध दवाओं और असुरक्षित खाद्य उत्पादों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि विभाग का एकमात्र उद्देश्य जनता तक मिलावट-मुक्त और सुरक्षित भोजन पहुंचाना है।
हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट की लगातार आ रही तल्ख टिप्पणियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नियामक एजेंसियों को अपनी कार्रवाई में कानून की प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों का पालन करना ही होगा। यदि कोई कारोबारी कमियों को दूर कर लेता है, तो प्रशासनिक अहंकार के चलते उसके वैध कारोबार को ठप नहीं रखा जा सकता।