नवरात्रि में संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में केंद्र सरकार: महिला आरक्षण और परिसीमन कानून पर हो सकता है बड़ा फैसला
देश के सियासी गलियारों में एक बार फिर संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। केंद्र सरकार आगामी शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान संसद की एक विशेष बैठक बुलाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस विशेष सत्र का मुख्य एजेंडा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के 33 प्रतिशत राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े महिला आरक्षण कानून और परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना हो सकता है।
संसद का मॉनसून सत्र समाप्त हुए एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन तकनीकी रूप से दोनों सदनों का अभी तक औपचारिक सत्रावसान (Prorogation) नहीं किया गया है। संसदीय नियमों के अनुसार, सत्रावसान न होने के कारण सरकार बहुत कम समय के नोटिस पर भी संसद की बैठक दोबारा आहूत कर सकती है। इसी प्रक्रियागत स्थिति के चलते सियासी और विधायी हलकों में विशेष सत्र की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
11 से 15 अक्टूबर के बीच सत्र के आसार: 'नारी शक्ति' से जोड़ने की रणनीति
मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का नौ दिवसीय पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक चलेगा। त्योहारों के इस कैलेंडर को ध्यान में रखते हुए सरकार 11 से 15 अक्टूबर के बीच तीन से चार दिनों के लिए संसद का विशेष सत्र आयोजित करने की संभावना तलाश रही है।
सत्तारूढ़ दल के रणनीतिकारों का मानना है कि शक्ति की उपासना के पर्व 'नवरात्रि' के दौरान महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण और आरक्षण के क्रियान्वयन से जुड़े कानून को आगे बढ़ाना एक गहरा और सकारात्मक सामाजिक संदेश देगा। राज्यसभा के एक वरिष्ठ सांसद ने रेखांकित किया कि नवरात्रि के दौरान महिला आरक्षण का मुद्दा उठाने से महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का मजबूत संदेश पूरे देश में जाएगा। वहीं, भाजपा के एक वरिष्ठ सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से औपचारिक रूप से अपील की है कि नवरात्रि के पावन अवसर पर ही संसद का विशेष सत्र बुलाकर नारी शक्ति को बड़ा सम्मान दिया जाए।
विपक्ष से साधा जा रहा संपर्क, विधायी रास्ते पर मंथन जारी
मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विशेष सत्र के विकल्प को खुला रखते हुए सरकार ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ भी अनौपचारिक संपर्क साधा है।
हालांकि, अभी तक सत्र बुलाने के सटीक समय और महिला आरक्षण को धरातल पर उतारने के लिए अपनाए जाने वाले कानूनी व विधायी रास्ते पर अंतिम मुहर लगना बाकी है। महिला आरक्षण कानून के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, इसे लागू करने से पहले देश में नई जनगणना और उसके आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना अनिवार्य शर्त है। ऐसे में संसद के पटल पर परिसीमन की समयसीमा, सीटों के निर्धारण और इससे जुड़े कानूनी संशोधनों पर नए सिरे से चर्चा की दरकार होगी।
2027 के विधानसभा चुनावों पर नजर: आधी आबादी को साधने की बिसात
राजनीतिक विश्लेषकों और एनडीए के कई सांसदों का मानना है कि इस कदम के गहरे चुनावी मायने भी हैं। साल 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब और पांच अन्य राज्यों में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होने हैं।
उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े सियासी सूबे में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पहले ही सरकार से आगामी चुनावों में 33% महिला आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग कर राजनीतिक दबाव बढ़ा चुके हैं। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा नवरात्रि के दौरान इस दिशा में ठोस विधायी कदम बढ़ाना महिला मतदाताओं (आधी आबादी) के बीच सरकार की छवि को निर्णायक बढ़त दिला सकता है।
फिलहाल संसदीय कार्य मंत्रालय और शीर्ष नेतृत्व की ओर से विशेष सत्र की आधिकारिक तारीखों और एजेंडे को लेकर औपचारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।