Gen-Z के जज्बे को भुनाने उतरे नेताजी के प्रपौत्र! अभिजीत दीपके के पीछे हटते ही चंद्र कुमार बोस का बड़ा ऐलान
देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर हाल ही में देखने को मिला अभूतपूर्व छात्र आंदोलन भारतीय राजनीति के इतिहास में एक नया अध्याय लिख चुका है। नीट (NEET) परीक्षा में धांधली, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त गड़बड़ियों के खिलाफ देश भर के लाखों युवा सड़कों पर उतरे। इस पूरे आंदोलन का चेहरा बने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक और राजनीतिक रणनीतिकार अभिजीत दीपके। सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह व्यंग्यात्मक अभियान देखते ही देखते एक राष्ट्रीय जन-आंदोलन में तब्दील हो गया और सरकार को बैकफुट पर धकेलने में कामयाब रहा। हालांकि, जब इस आंदोलन को एक संगठित राजनीतिक दल में बदलने की मांग उठने लगी, तो अभिजीत दीपके ने स्पष्ट कर दिया कि वह फिलहाल सीजेपी को पारंपरिक राजनीतिक पार्टी के रूप में पंजीकृत नहीं कराएंगे।
अभिजीत दीपके के इस फैसले ने देश के उस युवा वर्ग के सामने एक सवाल खड़ा कर दिया, जो पुरानी और पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था से तंग आकर एक नए नेतृत्व की तलाश कर रहा था। जैसे ही दीपके ने चुनावी राजनीति में सीधी एंट्री से अपने कदम पीछे खींचे, स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने इस मौके को लपकने में जरा भी देर नहीं की। उन्होंने ऐलान किया है कि वे देश के युवाओं की ऊर्जा और असंतोष को एक दिशा देने के लिए 'आजाद हिंद पार्टी' के नाम से एक नए राजनीतिक मंच का गठन करने जा रहे हैं।
'आजाद हिंद पार्टी': नेताजी के आदर्शों पर आधारित युवाओं का नया राष्ट्रीय मंच
चंद्र कुमार बोस का कहना है कि आजादी के आठ दशकों बाद एक बार फिर देश का युवा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हुआ है। उन्होंने जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में हुए जेन-जी (Gen-Z) प्रदर्शनों का हवाला देते हुए कहा कि आज के युवाओं को एक मजबूत, ईमानदार और दिशा देने वाले राष्ट्रीय नेतृत्व की सख्त दरकार है। वर्तमान दौर में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और उद्योगों में भ्रष्टाचार एक जीवनशैली बन चुका है और मुख्यधारा के सभी राजनीतिक दल किसी न किसी रूप में इस व्यवस्था का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे में केवल एक गैर-पारंपरिक और साहसी मंच ही युवाओं की आवाज बन सकता है।
चंद्र बोस के अनुसार, नई गठित होने वाली 'आजाद हिंद पार्टी' पूरी तरह से नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी आजाद हिंद फौज के सिद्धांतों पर काम करेगी। यह पार्टी समावेशी, पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील विचारों वाली होगी, जहाँ किसी भी धर्म, जाति या क्षेत्र के युवा को बराबरी का अधिकार मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब देश का युवा प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र की कमियों से त्रस्त है, तो उसे नेताजी के 'आजाद हिंद' के बैनर तले एकजुट करने से बेहतर और कोई विकल्प नहीं हो सकता।
भाजपा और टीएमसी से मोहभंग: जानिए चंद्र कुमार बोस की राजनीतिक पृष्ठभूमि
चंद्र कुमार बोस का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वह साल 2016 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए थे। उनका दावा है कि भाजपा नेतृत्व ने उनसे वादा किया था कि पार्टी के भीतर 'आजाद हिंद मोर्चा' का गठन किया जाएगा जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाएगा। हालांकि, करीब सात साल तक इंतजार करने के बावजूद जब इस मोर्चे का गठन नहीं हुआ, तो उन्होंने सितंबर 2023 में भाजपा से इस्तीफा दे दिया और पार्टी में शामिल होने को अपनी बड़ी भूल करार दिया।
इसके बाद अप्रैल 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले वे तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल हो गए थे। लेकिन वहां भी क्षेत्रीय राजनीति के ढर्रे और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से असंतुष्ट होकर उन्होंने दूरी बना ली। दोनों ही प्रमुख राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के साथ अपने अनुभवों के बाद चंद्र कुमार बोस का मानना है कि पारंपारिक दल कभी भी युवाओं के वास्तविक मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दे सकते। इसी कड़वे अनुभव ने उन्हें एक स्वतंत्र, युवा-केंद्रित राजनीतिक दल बनाने के लिए प्रेरित किया है।
क्यों पारंपरिक राजनीति से तंग आ चुका है देश का Gen-Z युवा?
आज का जेन-जी यानी 1990 के दशक के उत्तरार्ध से 2010 के दशक की शुरुआत के बीच जन्मा युवा वर्ग, राजनीति को देखने का एक बिल्कुल अलग नजरिया रखता है। यह पीढ़ी केवल लुभावने चुनावी वादों या जाति-धर्म के पारंपरिक नारों से प्रभावित होने वाली नहीं है। हाल के दिनों में नीट परीक्षा विवाद, यूजीसी के नियमों में बदलाव, सरकारी नौकरियों में देरी और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने इस युवा आबादी को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। जब मुख्यधारा के राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में व्यस्त थे, तब युवाओं ने खुद सोशल मीडिया और सड़कों पर अपनी लड़ाई लड़ी।
संघ प्रमुख मोहन भागवत से लेकर प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं द्वारा हाल के दिनों में जेन-जी को लेकर दिए गए बयानों से स्पष्ट है कि देश का राजनीतिक नेतृत्व इस पीढ़ी की ताकत और अनिश्चित मिजाज को भांप चुका है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कुल मतदाताओं का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा इसी जेन-जी पीढ़ी से आता है, जो किसी भी चुनाव के नतीजों को पलटने का दम रखता है। ऐसे में अगर चंद्र कुमार बोस की 'आजाद हिंद पार्टी' इस युवा असंतोष को एक स्पष्ट राजनीतिक एजेंडे में बदलने में सफल रहती है, तो यह देश की भावी राजनीति के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
2027 के चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति पर क्या पड़ेगा इसका असर?
अभिजीत दीपके की सीजेपी ने यह साबित कर दिया कि एआई टूल्स, मीम्स और डिजिटल संचार के जरिए लाखों युवाओं को बिना किसी बड़े फंड या राजनीतिक गॉडफादर के भी गोलबंद किया जा सकता है। अब चंद्र कुमार बोस इसी बने-बनाये माहौल को एक संगठित राजनीतिक स्वरूप देने की कोशिश में हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति में युवा वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए सभी दलों के बीच होड़ मचेगी।
जहाँ भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) जिला स्तर पर युवा सलाहकार समितियां बनाकर इस पीढ़ी से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं क्षेत्रीय दल भी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए छटपटा रहे हैं। ऐसे में 'आजाद हिंद पार्टी' का उभरना यह साफ संदेश देता है कि देश का युवा अब केवल वोटों का जरिया बनने के बजाय खुद अपनी नियत का फैसला करने के लिए तैयार हो रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि चंद्र कुमार बोस का यह प्रयोग धरातल पर कितना सफल होता है और क्या वे अभिजीत दीपके द्वारा जगाई गई युवा क्रांति की मशाल को चुनावी राजनीति तक ले जा पाते हैं या नहीं।