सीएम देवेंद्र फडणवीस का ऐलान- मराठी सीखने के लिए मिलेगा 1 साल का वक्त, नहीं होगी कोई दंडात्मक कार्रवाई
महाराष्ट्र की सड़कों पर पिछले कई दिनों से चल रहे भाषा विवाद, आरटीओ (RTO) की चेकिंग और ऑटो-टैक्सी यूनियनों की हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने एक बेहद संवेदनशील और व्यावहारिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और कैब चालकों को बड़ी राहत देते हुए कामकाज लायक बुनियादी मराठी सीखने के लिए पूरे एक साल की मोहलत (Grace Period) देने की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस एक साल की अवधि के दौरान किसी भी चालक के खिलाफ मराठी न जानने या न बोल पाने के आधार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस फैसले से मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे और नागपुर सहित पूरे महाराष्ट्र में व्यावसायिक वाहन चलाने वाले लाखों प्रवासियों और गैर-मराठी चालकों ने राहत की सांस ली है।
हड़ताल और विरोध के बीच सीएम की मध्यस्थता: चालक संगठनों से मुलाकात के बाद बड़ा फैसला
राज्य के परिवहन विभाग द्वारा मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर जारी किए गए सख्त निर्देशों और आरटीओ द्वारा चलाए जा रहे जांच अभियानों के बाद मुंबई के कांदिवली, मलाड, अंधेरी, दहिसर और सांताक्रूज जैसे इलाकों में चालकों ने चक्का जाम और हड़ताल शुरू कर दी थी। हालात की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मंत्री हाजी अरफात शेख के नेतृत्व में विभिन्न ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक यूनियनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सीधे मुलाकात की।
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने जमीनी हकीकत रखी। चालकों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वे महाराष्ट्र की संस्कृति और मराठी भाषा का पूरा सम्मान करते हैं और कोई भी चालक मराठी सीखने का विरोधी नहीं है। हालांकि, उनका तर्क था कि इस पेशे में 50 से 60 वर्ष की आयु वाले बुजुर्ग चालक भी बड़ी संख्या में हैं, जो लंबे समय से पढ़ाई-लिखाई से दूर रहे हैं। अचानक तीन महीने की समयसीमा में नई भाषा सीखना और परीक्षा पास करना उनके लिए मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। मुख्यमंत्री ने इन सभी व्यावहारिक पहलुओं को सुनने के बाद तत्काल प्रभाव से नियमों में ढील देते हुए 1 वर्ष की समयसीमा तय करने का आदेश दिया।
1 साल तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं: लाइसेंस और बैज रद्दीकरण पर लगा विराम
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के विभाग द्वारा तैयार किए गए पहले के प्रस्ताव में कड़े दंड के प्रावधान किए गए थे। उसके तहत यदि कोई चालक निर्धारित समय में मराठी में बुनियादी संवाद करने में असमर्थ पाया जाता, तो पहले चरण में उसका ड्राइविंग लाइसेंस एक महीने के लिए निलंबित किया जाना था और दोबारा विफलता पर उसका आधिकारिक ड्राइवर बैज हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता था।
मुख्यमंत्री फडणवीस के नए ऐलान के बाद इस पूरी दंडात्मक प्रक्रिया पर अगले एक वर्ष के लिए पूर्ण विराम लग गया है। अब किसी भी आरटीओ या ट्रैफिक पुलिस अधिकारी को भाषा के आधार पर चालकों पर जुर्माना लगाने, गाड़ी जब्त करने या लाइसेंस सस्पेंड करने का अधिकार नहीं होगा। सरकार ने साफ किया है कि इस अवधि का उपयोग चालकों को डराने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित कर भाषा सिखाने के लिए किया जाएगा।
'मराठी का विद्वान बनना जरूरी नहीं, सिर्फ बोलचाल आनी चाहिए': फडणवीस का दो टूक संदेश
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए भाषा नीति के उद्देश्य को बहुत स्पष्ट शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा हिंदी-भाषी या गैर-मराठी चालकों को मराठी साहित्य का विद्वान या व्याकरण का विशेषज्ञ बनाना बिल्कुल नहीं है। सरकार की अपेक्षा केवल इतनी है कि वे यात्रियों से बातचीत करने, किराया बताने, दिशा-निर्देश समझने और रोजमर्रा के व्यावसायिक कामकाज को सुचारू रूप से चलाने लायक बुनियादी मराठी बोल और समझ सकें।
सीएम ने यह भी दोहराया कि महाराष्ट्र में तीन-तीन पीढ़ियों से रह रहे लोग राज्य के सामाजिक ताने-बाने का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। महायुति सरकार किसी भी नागरिक के साथ भाषा या प्रांत के आधार पर अन्याय नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी की रोजी-रोटी पर हमला करना नहीं है, बल्कि स्थानीय यात्रियों और चालकों के बीच संवाद की खाई को पाटना है।
सरकार खुद चलाएगी फ्री भाषा कक्षाएं और बांटेगी अध्ययन सामग्री: 6 लाख ड्राइवरों को जोड़ने का लक्ष्य
चालकों को भाषा सिखाने के लिए सरकार केवल नियम बनाकर नहीं बैठी है, बल्कि राज्य भर में एक व्यापक प्रशिक्षण ढांचा तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि परिवहन विभाग और स्थानीय नगर निगमों के सहयोग से ऑटो स्टैंड्स, आरटीओ परिसरों और कम्युनिटी सेंटरों में ड्राइवरों के लिए विशेष निःशुल्क भाषा कक्षाएं आयोजित की जाएंगी।
इसके साथ ही, चालकों को सरल और सचित्र अध्ययन सामग्री (लर्निंग किट) और ऑडियो-विजुअल मॉड्यूल भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे अपनी शिफ्ट के खाली समय में आसानी से सामान्य वाक्य सीख सकें। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में करीब 9.16 लाख ऑटो-रिक्शा और 61,657 टैक्सियां पंजीकृत हैं। इनमें से लगभग 6 लाख चालकों को इस प्रशिक्षण अभियान से जोड़ने की योजना है, जिनमें से 1.65 लाख से अधिक चालक पहले ही शुरुआती बैचों में अपना पंजीकरण करा चुके हैं।
क्यों भड़का था विवाद? आरटीओ चेकिंग, 3 महीने का अल्टीमेटम और बुजुर्ग ड्राइवरों की गुहार
इस विवाद की जड़ें उस समय गहरी हुईं जब परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से पूरे राज्य में व्यावसायिक वाहन चालकों की मराठी दक्षता जांचने का ऑन-ग्राउंड अभियान शुरू किया। आरटीओ अधिकारियों ने पहले ही दो दिनों में लगभग 2,700 से अधिक गैर-मराठी चालकों को नोटिस थमा दिए थे। सड़कों पर चल रहे इस औचक परीक्षण के दौरान ड्राइवरों में यह अफवाह फैल गई कि मराठी न बोलने पर 5,000 से लेकर 20,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
इसके अलावा, उत्तर भारत (विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार) से आकर मुंबई में अपनी आजीविका चला रहे चालकों ने शिकायत की थी कि आरटीओ द्वारा पूछे जाने वाले सवाल बुनियादी बोलचाल से परे थे। कई ड्राइवरों का कहना था कि 12 से 14 घंटे गाड़ी चलाकर परिवार का पेट पालने के बाद उनके पास तुरंत कोई जटिल परीक्षा पास करने का समय नहीं है। इन शिकायतों और बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी के बीच मुख्यमंत्री का यह हस्तक्षेप तनाव को खत्म करने वाला साबित हुआ है।
मुंबई-एमएमआर के 9 लाख से अधिक चालकों पर सीधा असर: रोजी-रोटी और भाषा सम्मान का संतुलन
मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) भारत का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र है, जहां देश भर से लोग अपनी आजीविका की तलाश में आते हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा दी गई एक वर्ष की यह राहत स्थानीय संस्कृति के सम्मान और प्रवासियों की रोजी-रोटी की सुरक्षा के बीच एक संतुलित नीतिगत कदम मानी जा रही है।
अब ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने अपनी प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को वापस लेने का फैसला किया है, जिससे मुंबई के लाखों दैनिक रेल व बस यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। अगले 12 महीनों में सरकार, चालक यूनियनें और सामाजिक संस्थाएं मिलकर एक ऐसा अनुकूल माहौल तैयार करने की दिशा में काम करेंगी जिससे बिना किसी भय या दबाव के हर चालक सहज रूप से मराठी का व्यावहारिक ज्ञान हासिल कर सके।