BRICS पर भिड़े कांग्रेसी! पी. चिदंबरम ने पूछे ठोस फायदों पर तीखे सवाल, शशि थरूर ने गिना दी कूटनीतिक ताकत और उपलब्धियों की लंबी लिस्ट
देश की राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12-13 सितंबर 2026 को आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit) से ठीक पहले मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भीतर वैदेशिक नीति को लेकर बड़ा अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत 11 सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के दिल्ली आगमन के बीच कांग्रेस के दो दिग्गज नेता आमने-सामने आ गए हैं।
एक तरफ जहां पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने ब्रिक्स सम्मेलनों से भारत को मिलने वाले ठोस फायदों (Tangible Benefits) पर सवाल खड़े करते हुए इस पर संशय जताया है, वहीं पूर्व राजनयिक और वरिष्ठ कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता की राय से अलग रुख अपनाते हुए ब्रिक्स को भारत की असाधारण कूटनीतिक क्षमता और ग्लोबल साउथ की सबसे मजबूत आवाज करार दिया है।
पी. चिदंबरम ने क्या उठाए सवाल? 'पिछले सम्मेलनों से क्या ठोस मिला?'
समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत करते हुए पी. चिदंबरम ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों की प्रासंगिकता पर सवाल दागे। चिदंबरम ने कहा कि भारत कई बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय मंचों का हिस्सा है, लेकिन इन भारी-भरकम आयोजनों से देश की झोली में क्या आ रहा है, यह साफ नहीं है:
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ठोस नतीजों का अभाव: चिदंबरम ने कहा, "मुझे नहीं पता कि कितने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री आ रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि पिछले दो या तीन ब्रिक्स सम्मेलनों से कोई ठोस फायदा या ठोस परिणाम देश को मिले हैं।"
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कई संगठनों में मौजूदगी पर सवाल: उन्होंने रेखांकित किया कि भारत ब्रिक्स (BRICS) के अलावा शंघाई सहयोग संगठन (SCO), जी20 (G20) और क्वाड (QUAD) जैसे कई अलग-अलग धड़ों में शामिल है, लेकिन इन मंचों से भारत को रणनीतिक और आर्थिक स्तर पर क्या ठोस लाभ मिल रहा है, यह दिखाई नहीं देता।
शशि थरूर ने थमाई फायदों की लिस्ट: 'यह भारत की डिप्लोमैटिक ताकत का सबूत'
चिदंबरम के बयान के कुछ ही घंटों बाद तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) को दिए इंटरव्यू में ब्रिक्स की अहमियत और भारत के लिए इसके कूटनीतिक फायदों का पूरा ब्योरा रख दिया:
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ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा मंच: थरूर ने कहा कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन ब्रिक्स के ये 11 प्रमुख देश विश्व की आधी से ज्यादा आबादी और वैश्विक जीडीपी (Global GDP) के करीब 41 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह कोई मामूली आंकड़ा नहीं है, जिसे पूरी दुनिया को गंभीरता से लेना पड़ता है।
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डिप्लोमैटिक कन्वीनिंग पावर (कूटनीतिक एकजुटता की ताकत): थरूर ने कहा कि एक दर्जन से ज्यादा राष्ट्राध्यक्षों का नई दिल्ली आना भारत की कूटनीतिक पहुंच और अलग-अलग विचारधारा वाले देशों को एक छत के नीचे लाने की ताकत को दर्शाता है। यह देश की वैश्विक साख और प्रतिष्ठा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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ग्लोबल साउथ का एजेंडा: भारत इस ऐतिहासिक सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है, जो विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की चिंताओं को पश्चिमी मंचों तक पहुंचाने का सबसे प्रभावशाली माध्यम है।
व्यापार घाटा और साझा घोषणापत्र: थरूर ने चुनौतियों पर भी चेताया
हालांकि, शशि थरूर ने केवल फायदे ही नहीं गिनाए, बल्कि उन्होंने एक पूर्व राजनयिक के रूप में ब्रिक्स के भीतर मौजूद अंतर्विरोधों और व्यापारिक चिंताओं को भी स्पष्ट किया:
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बढ़ता व्यापार असंतुलन: थरूर ने आगाह किया कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार तो बढ़ रहा है, लेकिन भारत के लिए व्यापार संतुलन चिंताजनक है। ब्रिक्स देशों को भारत का निर्यात घट रहा है, जबकि वहां से आयात में भारी उछाल आया है।
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साझा घोषणापत्र (Joint Declaration) पर पेंच: उन्होंने याद दिलाया कि मई में नई दिल्ली में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान और यूएई के बीच मतभेदों के चलते साझा बयान जारी नहीं हो सका था और भारत को केवल 'चेयर्स स्टेटमेंट' जारी करना पड़ा था। यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट पर सभी 11 देशों को एक सहमति पर लाना भारतीय राजनयिकों के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
बीजेपी ने साधा निशाना: 'कांग्रेस के अपने सांसद ने खोली पोल'
कांग्रेस के दोनों वरिष्ठ नेताओं के बयानों में आए इस खुले विरोधाभास पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तुरंत तीखा हमला बोला।
भाजपा नेताओं ने चिदंबरम के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि जब भी भारत की वैश्विक साख और सम्मान बढ़ता है, कांग्रेस 'नाराज फूफा' की तरह व्यवहार करने लगती है। भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि शशि थरूर के बयान ने यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व देश की कूटनीतिक प्रगति को पचा नहीं पा रहा है और अपनी ही पार्टी के भीतर दिशाहीन हो चुका है।