तमिलनाडु में थलपति विजय की कुर्सी पर गहराया संकट! उपचुनाव से पहले लेफ्ट दलों ने छोड़ा साथ, CPM बोली- 5 साल समर्थन मिलेगा या नहीं, यह सरकार के रवैये पर निर्भर
तमिलनाडु की सियासत में 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) के प्रमुख और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलपति विजय) की अगुवाई वाली सरकार पर सियासी संकट के काले बादल मंडराने लगे हैं। अभिनेता से राजनेता बने विजय को सत्ता में आए अभी कुछ ही समय बीता है कि उनकी अपनी ही सहयोगी पार्टियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य में 6 अक्टूबर को दो विधानसभा सीटों पर होने वाले अहम उपचुनावों से ठीक पहले वामपंथी दलों—भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM)—ने चुनावी गठबंधन से खुद को अलग करते हुए अकेले चुनाव मैदान में उतरने का बड़ा ऐलान कर दिया है। उपचुनाव में वामपंथियों के इस अलगाव के बाद अब विधानसभा के भीतर भी TVK सरकार का संख्याबल और फ्लोर मैनेजमेंट सवालों के घेरे में आ गया है।
6 अक्टूबर के उपचुनाव में अकेले ताल ठोकेंगे वामपंथी: धारापुरम और मदुरंतकम में उतारे उम्मीदवार
सामने आ रही विस्तृत रिपोर्टों के अनुसार, आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में वामपंथी दलों ने अपनी स्वतंत्र रणनीति पर चलने का फैसला किया है। इसके तहत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) धारापुरम विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी उतारेगी, जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) मदुरंतकम सीट पर सीधे अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी। दोनों ही कम्युनिस्ट दलों ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दिया है कि वे TVK के नेतृत्व वाले किसी भी चुनावी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। चुनावी मैदान में सहयोगियों का यह खुला विद्रोह विजय सरकार की राजनीतिक पकड़ पर बड़ा सवालिया निशान लगा रहा है।
5 साल सरकार चलेगी या नहीं? सीपीएम नेता पी. षणमुगम की दो टूक चेतावनी
उपचुनाव में अकेले लड़ने के फैसले के साथ-साथ सीपीएम के कद्दावर नेता पी. षणमुगम के एक विस्फोटक बयान ने मुख्यमंत्री विजय और उनकी पार्टी TVK की नींद उड़ा दी है। षणमुगम ने मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में बेहद तल्ख लहजे में कहा कि विजय की सरकार को पूरे 5 साल तक वामपंथियों का समर्थन मिलेगा या नहीं, यह पूरी तरह से विजय सरकार की कार्यप्रणाली, जनविरोधी या जनहितैषी नीतियों, उनके प्रशासनिक फैसलों और आम जनता के प्रति उनके रवैये पर निर्भर करेगा। उनके इस कड़े बयान से साफ संकेत मिल रहा है कि विधानसभा में वामपंथी दल किसी भी समय समर्थन समीक्षा का कार्ड खेल सकते हैं।
9 सितंबर की अहम बैठक से बनाई दूरी: चुनावी गठबंधन से साफ इनकार
इससे पहले मुख्यमंत्री विजय ने उपचुनावों और फ्लोर मैनेजमेंट को मजबूत करने के मकसद से 9 सितंबर को सभी घटक दलों की एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी। हालांकि, दोनों वामपंथी दलों ने इस बैठक का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया। सीपीएम नेता षणमुगम ने इस पर स्पष्ट किया कि TVK उस बैठक की आड़ में एक नया चुनावी गठबंधन थोपना चाहती थी, जिसके लिए वे कतई तैयार नहीं थे और इसीलिए बैठक में शामिल नहीं हुए। दूसरी ओर, सीपीआई ने अपना रुख दोहराते हुए कहा कि वे बाहर से मुद्दों के आधार पर सरकार को तकनीकी समर्थन भले दे रहे हों, लेकिन चुनावी स्तर पर वे TVK के साथ किसी साझा मंच पर नहीं खड़े होंगे।
विजय से क्यों खफा हैं लेफ्ट पार्टियां? ये 4 कारण बने तकरार की वजह
वामपंथी दलों और मुख्यमंत्री विजय के बीच उभरे इस गहरे मतभेद के पीछे कई बुनियादी और नीतिगत कारण बताए जा रहे हैं:
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भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने की महत्वाकांक्षा: TVK के रणनीतिकारों द्वारा मुख्यमंत्री विजय को राष्ट्रीय स्तर पर भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किए जाने के प्रचार से वामपंथी दल बेहद असहज और नाराज हैं।
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छात्र राजनीति और प्रदर्शनों पर सरकारी पाबंदी: विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक गतिविधियों और छात्र आंदोलनों पर विजय सरकार द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों से वामपंथी संगठन बुरी तरह भड़क गए थे। TVK सरकार ने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाने वाला एक विवादित सर्कुलर जारी किया था, जिसे भारी जनआक्रोश के बाद बैकफुट पर आकर वापस लेना पड़ा।
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कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं का प्रशासनिक डेटा जुटाना: गुजिलीअम्पराई इलाके में एक स्थानीय तहसीलदार द्वारा कम्युनिस्ट पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ताओं और सदस्यों का गोपनीय डेटा जुटाने की प्रशासनिक रिपोर्ट सामने आने के बाद वामपंथियों ने सरकार पर जासूसी और बदले की राजनीति का खुला आरोप लगाया।
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फिल्मी अंदाज और विधानसभा को अखाड़ा बनाना: वामपंथी नेतृत्व का यह भी गंभीर आरोप है कि मुख्यमंत्री विजय सदन को गंभीर विधायी कामकाज के बजाय फिल्मी डायलॉगबाजी और ड्रामेटिक अंदाज में चला रहे हैं, जिससे विधानसभा एक सियासी अखाड़ा बनकर रह गई है और जनता के बुनियादी व ज्वलंत मुद्दे पीछे छूट रहे हैं।
क्या गिर जाएगी थलपति विजय की सरकार? उपचुनाव के नतीजों पर टिकी नजरें
फिलहाल राहत की बात यह है कि वामपंथी दलों ने सरकार से अपना बाहरी समर्थन तकनीकी रूप से वापस नहीं लिया है, लेकिन चुनावी और राजनीतिक राहें पूरी तरह अलग कर ली हैं। अब राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें 6 अक्टूबर को धारापुरम और मदुरंतकम सीटों पर होने वाले उपचुनावों के नतीजों पर टिकी हैं। यदि इन उपचुनावों में TVK को झटका लगता है और वामपंथी या विपक्षी खेमा मजबूत होता है, तो विधानसभा के अंदर विजय सरकार के लिए बहुमत का संतुलन बनाए रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा। ये चुनाव परिणाम तय करेंगे कि तमिलनाडु की जनता के बीच थलपति विजय का फिल्मी करिश्मा अब भी बरकरार है या फिर उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वाकई खतरे की घंटी बज चुकी है।