'त्योहार लोगों के मरने के लिए नहीं': पटाखों, डीजे और कानफोड़ू शोर पर बॉम्बे हाईकोर्ट बेहद सख्त
धार्मिक और सार्वजनिक उत्सवों के दौरान अनियंत्रित लाउडस्पीकर, कानफोड़ू डीजे साउंड सिस्टम और सार्वजनिक सड़कों पर होने वाली आतिशबाजी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा और अभूतपूर्व रुख अपनाया है। गणेशोत्सव और अन्य आगामी त्योहारों के दौरान बेतहाशा बढ़ते ध्वनि एवं वायु प्रदूषण का स्वतः संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति डॉ. नीला के. गोखले की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, "त्योहार और जश्न लोगों के मरने या उनकी सेहत बिगड़ने के लिए नहीं होते। कोई भी इस बात को स्वीकार नहीं कर सकता कि दूसरों के स्वास्थ्य, बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों की जिंदगी की कीमत पर उत्सव मनाया जाए। जश्न के नाम पर नियमों की धज्जियां उड़ाना और नागरिकों को असहनीय पीड़ा में धकेलना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
106 डेसिबल तक पहुंचा शोर, हथौड़े से सिलेंडर पीटने पर भी जताई चिंता
अदालत के सामने पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्सवों और जुलूसों के दौरान ध्वनि का स्तर 106 डेसिबल तक दर्ज किया गया, जबकि रिहायशी इलाकों में दिन के समय निर्धारित अधिकतम सीमा 55 से 75 डेसिबल के बीच तय है।
सुनवाई के दौरान वकीलों ने कोर्ट को बताया कि आयोजक डीजे पर लगी कानूनी रोक से बचने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं:
-
ठेलों पर दर्जनों छोटे-बड़े स्पीकर लादकर भारी आवाज पैदा की जा रही है।
-
जुलूसों में भारी धातु के सिलेंडरों को हथौड़ों से पीटकर कानफोड़ू शोर मचाया जा रहा है।
-
आंखों को नुकसान पहुंचाने वाली खतरनाक हाई-इंटेंसिटी लेजर लाइट्स और बीम का अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहा है।
हाईकोर्ट ने इन तरीकों पर सख्त एतराज जताते हुए कहा कि आस्था और परंपरा के नाम पर इस तरह की मनमानी और ज्यादती पर तुरंत अंकुश लगाना कानूनी और नैतिक दोनों नजरिए से अनिवार्य है।
5,000 रुपये का मामूली जुर्माना 'कानून तोड़ने का लाइसेंस' नहीं बन सकता
अदालत ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा की जाने वाली खानापूर्ति पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की।
जस्टिस कुलकर्णी ने कहा कि पुलिस द्वारा लगाया जाने वाला 5,000 रुपये का मामूली जुर्माना रोकथाम करने के बजाय ऐसा लगता है मानो कानून तोड़ने की पूर्व-अनुमति (फीस) दी जा रही हो। उन्होंने कहा, "पहले नियमों का खुला उल्लंघन करना और फिर बाद में मामूली जुर्माना भरकर छूट जाना सही व्यवस्था नहीं है। जब तक पुलिस मौके पर जाकर एफआईआर दर्ज करती है, तब तक हजारों नागरिकों के स्वास्थ्य को अपूरणीय क्षति पहुंच चुकी होती है। कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जो घटना को होने से पहले ही रोक सके।"
हाईकोर्ट के कड़े आदेश: सड़कों पर पटाखे बैन, ₹1 लाख तक सिक्योरिटी डिपॉजिट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई कड़े दिशानिर्देश लागू करने के आदेश दिए हैं:
-
सड़कों पर पटाखे पूरी तरह प्रतिबंधित: सार्वजनिक सड़कों और रिहायशी गलियों में जुलूस के दौरान किसी भी प्रकार के पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा, क्योंकि इससे न केवल जहरीला धुआं फैलता है बल्कि आगजनी और हादसों का खतरा भी पैदा होता है।
-
लेजर बीम और मेटल सिलेंडर पर रोक: जुलूसों में आंखों की रोशनी को खतरे में डालने वाली लेजर लाइटों और धातु के सिलेंडरों के उपयोग पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
-
डेसिबल मीटर अनिवार्य: सभी सार्वजनिक पंडालों और जुलूसों में आयोजकों को दृश्यमान 'डेसिबल मेजरमेंट मीटर' लगाना होगा, ताकि मौके पर मौजूद पुलिस और नागरिक वास्तविक समय में ध्वनि का स्तर देख सकें।
-
सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त करने का नियम: मंडलों और आयोजकों से आयोजनों से पहले 50,000 से लेकर 1 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि (Security Deposit) जमा कराई जाएगी। तय डेसिबल सीमा का उल्लंघन होते ही यह राशि सीधे जब्त कर ली जाएगी और साउंड सिस्टम सीज कर दिए जाएंगे।
-
अनुमति पत्र प्रदर्शित करना जरूरी: आयोजकों को लाउडस्पीकर की लिखित अनुमति, जिम्मेदार पदाधिकारियों के नाम और फोन नंबर पंडालों में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने होंगे।
पूरे महाराष्ट्र के लिए एक समान नीति पर जोर
पीठ ने सवाल उठाया कि जब नागपुर और सोलापुर जैसे जिलों में प्रशासन ने सक्रिय रूप से डीजे साउंड सिस्टम और लेजर लाइटों पर सख्त रोक लगा रखी है, तो पूरे महाराष्ट्र में एक समान नीति क्यों नहीं लागू की जा रही।
अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से चलने वाली 'पंढरपुर वारी' इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि भगवान की भक्ति बिना कानफोड़ू लाउडस्पीकरों और पटाखों के भी पूरी श्रद्धा के साथ की जा सकती है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि नियमों की अवहेलना करने वालों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।