ज्ञानेश कुमार का सुसाइड नोट में आया था नाम, फिर हुआ था ट्रांसफर: CPM नेता डॉ. टीएम थॉमस इसाक का बड़ा दावा
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और निर्णयों को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व वित्त मंत्री डॉ. टीएम थॉमस इसाक ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ज्ञानेश कुमार के केरल कैडर में पदस्थापना के दौरान का करीब 20 साल पुराना मामला उठाते हुए सनसनीखेज दावे किए हैं।
थॉमस इसाक का दावा है कि साल 2006 में केरल में एक हाईवे प्रोजेक्ट के सिलसिले में काम कर रहे मलेशियाई कंपनी के एक शीर्ष प्रोजेक्ट अधिकारी ने आत्महत्या कर ली थी, और मरने से पहले छोड़े गए सुसाइड नोट में कथित तौर पर तत्कालीन पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) सेक्रेटरी ज्ञानेश कुमार का नाम भी दर्ज था। इसाक के अनुसार, इस घटना के बाद शुरू हुई जांच और उपजे विवाद के बीच उनका तबादला केरल से केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय में कर दिया गया था।
2006 का सड़क प्रोजेक्ट और मलेशियाई इंजीनियर की आत्महत्या
डॉ. थॉमस इसाक के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम नवंबर 2006 का है। केरल में विश्व बैंक समर्थित केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) के तहत सड़कों के निर्माण का ठेका मलेशियाई फर्म 'PATI' और 'भागीरथ कंस्ट्रक्शन्स' के जॉइंट वेंचर (PATI-BEL) को दिया गया था। इस परियोजना के केरल ऑपरेशन्स के इंचार्ज मलेशियाई इंजीनियर ली बीन सीन (Lee See Ben) थे।
शुरुआत में करीब 216 करोड़ रुपये की इस परियोजना में जमीन अधिग्रहण में देरी और धीमी प्रगति को लेकर ठेकेदार और लोक निर्माण विभाग (PWD) के बीच लंबा विवाद चला। लगातार लटके पेमेंट्स और सब-कॉन्ट्रैक्टर्स के भारी वित्तीय दबाव के बीच ली बीन सीन केरल से कुआलालंपुर वापस लौट गए और वहां उन्होंने कथित रूप से आत्महत्या कर ली।
सुसाइड नोट में घूसखोरी और उत्पीड़न के आरोपों का दावा
सीपीएम नेता ने दावा किया कि मलेशियाई इंजीनियर ने अपने सुसाइड नोट में PWD अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार, बिलों के भुगतान में देरी और कथित रूप से रिश्वत मांगने के आरोप लगाए थे।
इसाक ने लिखा कि उस समय 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार राज्य के पीडब्ल्यूडी विभाग में सेक्रेटरी पद पर तैनात थे। नोट में जिन अधिकारियों पर उत्पीड़न और घूसखोरी के आरोप लगे थे, उनमें कथित तौर पर ज्ञानेश कुमार का नाम भी शामिल बताया गया था। हालांकि, थॉमस इसाक ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से उस सुसाइड नोट की मूल प्रति नहीं देखी है, लेकिन उस समय प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में यह मामला बेहद चर्चा में रहा था और सरकार को भारी असहजता का सामना करना पड़ा था।
सतर्कता जांच और केंद्र में ट्रांसफर का आरोप
पूर्व मंत्री ने दावा किया कि इस मामले के तूल पकड़ने के बाद राज्य के सतर्कता विभाग (Vigilance) ने मामले की जांच शुरू की थी। लेकिन अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) की अड़चनों और अधिकारियों की अनिच्छा के चलते यह जांच किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।
इसाक का आरोप है कि विवाद बढ़ता देख 2006 के अंत तक ज्ञानेश कुमार को PWD से हटा दिया गया और वे जल्द ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रक्षा मंत्रालय चले गए। उस दौरान एके एंटनी देश के रक्षा मंत्री थे। इसाक ने आरोप लगाया कि केंद्र में जाने के बाद ही ज्ञानेश कुमार ने केंद्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की और बाद में गृह मंत्रालय में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के पद तक पहुंचे।
ज्ञानेश कुमार और सरकार की ओर से प्रतिक्रिया
सीपीएम नेता के इन पुराने आरोपों के दोबारा सतह पर आने के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। हालांकि, इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग या ज्ञानेश कुमार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, प्रशासनिक हलकों से जुड़े जानकारों का कहना है कि दो दशक पुराने इस मामले में तब भी कोई कानूनी या आपराधिक पुष्टि साबित नहीं हो सकी थी और इसे राजनीतिक कारणों से हवा दी जा रही है।