स्वर्ण मंदिर पहुंचे अमेरिकी राजदूत: परिसर के बाहर लगे ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, पुलिस ने स्थिति संभाली
पंजाब के अमृतसर स्थित सिखों के सर्वोच्च धार्मिक स्थल श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में अमेरिकी राजदूत के नतमस्तक होने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक संवेदनशीलता का बड़ा मामला सामने आया। अमेरिकी राजदूत के मंदिर परिसर में प्रवेश और दर्शन के दौरान बाहर एकत्रित कुछ लोगों की भीड़ ने अचानक 'खालिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस अप्रत्याशित नारेबाजी के तुरंत बाद मौके पर तैनात पंजाब पुलिस और सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नारेबाजी कर रहे लोगों को वहां से तितर-बितर किया और राजदूत के सुरक्षा घेरे को पूरी तरह सुरक्षित रखा।
विदेशी राजनयिकों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के स्वर्ण मंदिर आगमन को लेकर पहले से ही सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए जाते हैं। इस दौरे के दौरान भी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की टास्क फोर्स और स्थानीय पुलिस बल मुस्तैद था, लेकिन परिसर के बाहरी हिस्से में हुए इस घटनाक्रम ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।
धार्मिक आस्था और मत्था टेकने पहुंचे थे राजदूत
अमेरिकी राजदूत अमृतसर के अपने निर्धारित दौरे के तहत श्री हरमंदिर साहिब में श्रद्धा सुमन अर्पित करने और मत्था टेकने पहुंचे थे। उन्होंने गुरुघर में शीश नवाया, गुरुबाणी का श्रवण किया और पवित्र सरोवर की परिक्रमा की।
इस दौरान एसजीपीसी के अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने परंपरागत सिख मर्यादा के अनुसार उनका स्वागत किया। राजदूत को सिख धर्म के इतिहास, स्वर्ण मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता और चौबीसों घंटे चलने वाले विश्व प्रसिद्ध लंगर की सेवा परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। राजदूत ने भी इस दौरान शांति, समरसता और लंगर सेवा की सराहना की।
बाहर अचानक गूंजे नारे: पुलिस ने तुरंत संभाली स्थिति
जब राजदूत का काफिला परिसर के पास पहुंचा और दर्शन की औपचारिकताएं चल रही थीं, उसी समय प्लाजा और बाहरी गलियारे के निकट मौजूद कुछ युवकों और प्रदर्शनकारियों के समूह ने उग्र नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने अलगाववादी एजेंडे के तहत 'खालिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगाए।
नारेबाजी होते ही सुरक्षा अमले में हलचल मच गई। अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और रैपिड एक्शन में आई सुरक्षा टुकड़ी ने बिना कोई देरी किए प्रदर्शनकारियों की घेराबंदी की:
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भीड़ को हटाया: पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए नारेबाजी कर रहे लोगों को मुख्य रास्ते और वीआईपी मूवमेंट एरिया से पीछे खदेड़ दिया।
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अप्रिय घटना से बचाव: सुरक्षाबलों की तत्परता के चलते किसी भी तरह की हिंसक झड़प या अप्रिय स्थिति पैदा नहीं हुई और राजदूत के आवागमन में कोई सीधा व्यवधान नहीं आया।
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पहचान और पूछताछ: पुलिस ने मौके से कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह पहले से सुनियोजित था या तात्कालिक विरोध।
एसजीपीसी और सुरक्षा एजेंसियों का रुख
श्री हरमंदिर साहिब एक आध्यात्मिक और पावन स्थल है, जहां दुनिया भर से हर धर्म और समुदाय के लोग बिना किसी भेदभाव के शीश नवाने आते हैं। एसजीपीसी के प्रबंधकों का हमेशा से यह रुख रहा है कि सचखंड परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि या नारों की अनुमति नहीं है। आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी एसजीपीसी की टास्क फोर्स संभालती है, जबकि बाहरी परिसर और शहर की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह राज्य पुलिस के जिम्मे होती है।
घटना के बाद परिसर के आसपास सादी वर्दी में अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है। राजनयिक के दौरे को देखते हुए सुरक्षा प्रोटोकॉल की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में विदेशी गणमान्य व्यक्तियों की आवाजाही के दौरान इस तरह की अप्रिय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।