जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य के दर्जे का प्रस्ताव पास: BJP विधायकों का वेल में हंगामा, फाड़े कागज

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य के दर्जे का प्रस्ताव पास: BJP विधायकों का वेल में हंगामा, फाड़े कागज

जम्मू-कश्मीर की नवगठित विधानसभा में सोमवार को उस वक्त भारी राजनीतिक घमासान मच गया, जब सदन ने जम्मू-कश्मीर को तत्काल पूर्ण राज्य का दर्जा (Full Statehood) बहाल करने की मांग वाला एक आधिकारिक प्रस्ताव पारित कर दिया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होते ही मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया। भाजपा सदस्यों ने वेल में उतरकर नारेबाजी की, कार्यसूची के दस्तावेज फाड़े और मॉक प्रोसीडिंग्स (समांतर कार्यवाही) चलाई। इसके बाद बीजेपी विधायकों के वॉकआउट के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने ध्वनिमत से इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को पारित घोषित कर दिया।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा का माहौल गरमा गया था। सत्ता पक्ष नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और कांग्रेस गठबंधन का कहना था कि यह प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर की जनता की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं और केंद्र सरकार द्वारा संसद के पटल पर किए गए वादों की बहाली का प्रतीक है। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने इस प्रस्ताव में स्वायत्तता और विशेष दर्जे के कथित संदर्भों को भारतीय संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।

वेल में पहुंचे BJP विधायक, फाड़े कागज और चलाई मॉक असेंबली

जैसे ही विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई, विपक्ष के नेता सुनील शर्मा के नेतृत्व में भाजपा विधायक अपनी सीटों से खड़े हो गए और जोरदार नारेबाजी करने लगे।

देखते ही देखते भाजपा सदस्य नारेबाजी करते हुए स्पीकर के वेल तक पहुंच गए:

  • दस्तावेज फाड़कर हवा में उछाले: भाजपा विधायकों ने हाथ में लिए एजेंडा और बिजनेस पेपर्स को फाड़कर सदन के बीचों-बीच उछाल दिया।

  • वेल में धरना और समानांतर कार्यवाही: हंगामे के दौरान भाजपा के वरिष्ठ विधायक शाम लाल शर्मा वेल में बैठ गए और उन्होंने प्रतीकात्मक स्पीकर बनकर एक समानांतर 'मॉक प्रोसीडिंग' संचालित करनी शुरू कर दी, जबकि अन्य विधायक फर्श पर धरने पर बैठ गए।

  • स्पीकर को हटाने का नोटिस: भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष पर नियमों का उल्लंघन कर प्रस्ताव लाने की अनुमति देने का आरोप लगाया और उन्हें पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भी पेश किया।

भाजपा का कड़ा ऐतराज: 'संविधान का अपमान बर्दाश्त नहीं'

विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि भाजपा पूर्ण राज्य के दर्जे के खिलाफ नहीं है, क्योंकि यह गृह मंत्री और प्रधानमंत्री का भी संकल्प रहा है। लेकिन इस प्रस्ताव की आड़ में जिस तरह से स्वायत्तता, धारा 370 और पुराने विशेषाधिकारों के संदर्भों को पिछले दरवाजे से घुसाने की कोशिश की जा रही है, वह सीधे तौर पर भारत के संविधान और संसद के फैसलों का अपमान है।

सुनील शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक बेहद संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है, जहां देश के दुश्मन षड्यंत्र रचते रहते हैं। ऐसे में किसी भी ऐसे प्रस्ताव को पास नहीं होने दिया जाएगा जो अलगाववादी और पुरानी स्वायत्तता वाली मानसिकता को दोबारा बढ़ावा देता हो। कड़ा विरोध दर्ज कराने के बाद सभी भाजपा सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

सत्ता पक्ष का पलटवार: 'संसद में किए वादे से क्यों भाग रही है भाजपा?'

भाजपा के हंगामे और वॉकआउट पर पलटवार करते हुए उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और कैबिनेट मंत्री सकीना इटू ने विपक्षी दल पर केवल सुर्खियों के लिए नौटंकी करने का आरोप लगाया। सुरिंदर चौधरी ने कहा कि देश के गृह मंत्री अमित शाह ने संसद के दोनों सदनों में और केंद्र सरकार ने देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के समक्ष यह वादा किया था कि परिसीमन और चुनाव के बाद उपयुक्त समय पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा लौटाया जाएगा।

सत्ता पक्ष ने सवाल उठाया कि चुनाव संपन्न होने के बाद भी जब पूर्ण राज्य की बहाली की मांग उठाई जा रही है, तो भाजपा इसका विरोध क्यों कर रही है? उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी पार्टी का नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की बहाली का साझा संकल्प है।

ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित, केंद्र को भेजा जाएगा ड्राफ्ट

भाजपा विधायकों के बहिर्गमन के बाद सदन में मौजूद अन्य दलों—नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस, निर्दलीय और अन्य क्षेत्रीय विधायकों के समर्थन से स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा।

सदन ने भारी बहुमत और ध्वनिमत (Voice Vote) से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। अब विधानसभा में पास हुए इस आधिकारिक प्रस्ताव को केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास औपचारिक विचार और आगामी संवैधानिक कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।