गणेश पूजा में 10 दिन शराब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग से भड़का HC; जज बोले- '10 दिन नहीं मिलेगी तो लोग बीमार पड़ जाएंगे'
गणेश चतुर्थी और 10 दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान शराब की दुकानों को पूरी तरह बंद रखने और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय (High Court) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता की मांग को पूरी तरह अव्यावहारिक और बेतुका बताते हुए याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मौखिक रूप से बेहद तीखी और तंजिया टिप्पणी करते हुए कहा, "यदि 10 दिनों तक शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई, तो जो लोग नियमित रूप से इसका सेवन करते हैं, वे गंभीर रूप से बीमार पड़ जाएंगे और अस्पतालों में भर्ती होने लगेंगे। क्या आपने याचिका दायर करने से पहले इसके परिणामों और सामाजिक प्रभाव पर विचार किया था?"
क्या थी याचिकाकर्ता की दलील? 'पवित्रता और कानून-व्यवस्था का दिया हवाला'
याचिकाकर्ता ने अदालत में जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर मांग की थी कि गणेशोत्सव एक अत्यंत पावन और भव्य धार्मिक पर्व है, जिसे लाखों श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा के साथ मनाते हैं। ऐसे में:
-
10 दिनों का पूर्ण ड्राई डे घोषित हो: गणेश चतुर्थी की स्थापना से लेकर अनंत चतुर्दशी (मूर्ति विसर्जन) तक के पूरे 10 दिनों की अवधि में राज्य भर में शराब की सभी दुकानों, बार और ठेकों को बंद रखा जाए।
-
कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की दलील: याचिका में कहा गया कि विसर्जन जुलूसों और सार्वजनिक पंडालों के आसपास शराब पीकर हुड़दंग मचाने, छेड़खानी और आपसी झगड़ों की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिसे रोकने के लिए शराबबंदी अनिवार्य है।
-
पवित्रता बनाए रखने की मांग: दलील दी गई कि धार्मिक आयोजनों के दौरान शराब की खुली बिक्री से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।
अदालत की दो टूक: 'नीतिगत मामलों में दखल नहीं दे सकती अदालत'
उच्च न्यायालय की पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि शराब की बिक्री को नियंत्रित करना या ड्राई डे (Dry Day) घोषित करना पूरी तरह से राज्य सरकार और कार्यपालिका का नीतिगत फैसला (Policy Matter) है। अदालत ऐसे मामलों में अपनी मर्जी से आदेश थोप नहीं सकती:
-
अचानक पाबंदी से स्वास्थ्य संकट: पीठ ने व्यावहारिक हकीकत की ओर इशारा करते हुए कहा कि शराब पर निर्भर रहने वाले व्यक्तियों के लिए अचानक इतने लंबे समय का विथड्रॉल (Alcohol Withdrawal Syndrome) जानलेवा हो सकता है। 10 दिनों की पूर्ण पाबंदी से मेडिकल इमरजेंसी और अवैध व जहरीली शराब (Illicit Liquor) की कालाबाजारी का खतरा बढ़ जाएगा।
-
शांति बनाए रखना पुलिस का काम: जजों ने कहा कि शराब पीकर कानून तोड़ने वालों से निपटना पुलिस और स्थानीय प्रशासन का काम है। असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करने के लिए भारतीय कानून में पहले से पर्याप्त प्रावधान मौजूद हैं।
-
पब्लिसिटी स्टंट पर नाराजगी: अदालत ने ऐसी याचिकाओं को बिना ठोस जमीनी शोध के केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जरिया बताते हुए नाराजगी जाहिर की।
राज्य सरकारों के पहले से तय हैं नियम
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि राज्य के आबकारी नियमों में पहले से ही महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्वों (जैसे 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर) और प्रमुख धार्मिक दिनों (जैसे गणेश चतुर्थी के पहले दिन या विसर्जन के दिन) पर आवश्यकतानुसार ड्राई डे घोषित करने का प्रावधान मौजूद है।
स्थानीय प्रशासन भीड़भाड़ और संवेदनशीलता को देखते हुए जुलूस के मार्गों पर स्थित दुकानों को बंद करने का समय-समय पर प्रशासनिक फैसला लेता है। ऐसे में पूरे 10 दिनों तक संपूर्ण शराबबंदी लागू करने का कोई कानूनी या व्यावहारिक आधार नहीं बनता। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए याचिका को बिना किसी राहत के खारिज कर दिया।