अगर CJP लड़ी चुनाव तो कितने फीसदी वोट देंगे? आ गया C-Voter का ताजा सर्वे; जानिए जेन-जी का असली मूड और क्या है उनका सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विशाल छात्र आंदोलन और राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक व शिक्षा सुधारों को लेकर लगातार सुर्खियों में बनी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) को लेकर देश की युवा पीढ़ी और आम मतदाताओं का मूड सामने आ गया है। सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स जुटाने और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके लगातार 'स्कूल ठीक करो' अभियान और जनसंवाद कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। इसी बीच, प्रतिष्ठित चुनाव सर्वेक्षण एजेंसी सी-वोटर (C-Voter) ने इंडिया टुडे के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे के तहत यह जानने की कोशिश की है कि यदि CJP एक औपचारिक राजनीतिक दल बनकर चुनावी मैदान में उतरती है, तो देश की जनता और खासकर जेन-जी (Gen-Z) उसे कितना समर्थन देगी। सर्वे में युवाओं के सबसे बड़े संकटों, रोजगार की स्थिति और सरकार की जवाबदेही पर भी बेहद स्पष्ट और चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
सी-वोटर सर्वे: अगर CJP चुनाव लड़े तो कितने फीसदी लोग देंगे वोट?
सी-वोटर द्वारा किए गए इस राष्ट्रव्यापी सर्वे में जब मतदाताओं से सीधे तौर पर यह सवाल पूछा गया कि "अगर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) चुनाव लड़ती है, तो क्या आप उसे अपना वोट देंगे?" तो जवाबों ने साफ कर दिया कि सोशल मीडिया पर वायरल होना और चुनावी राजनीति में वोट हासिल करना दो अलग-अलग पहलू हैं:
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43% जनता ने कहा 'नहीं': सर्वे में शामिल 43 प्रतिशत लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे CJP को वोट नहीं देंगे।
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33% लोगों ने दिया 'हां' में समर्थन: 33 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने CJP के पक्ष में मतदान करने की इच्छा जताई।
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24% ने नहीं दी स्पष्ट राय: शेष मतदाताओं ने इस सवाल पर कोई निश्चित रुख तय नहीं किया था।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि भले ही युवाओं के बीच CJP की लोकप्रियता में भारी उछाल आया है, लेकिन बहुमत अभी भी इसे सीधे चुनावी विकल्प के रूप में स्वीकार करने को लेकर झिझक रहा है।
प्रेशर ग्रुप या सियासी पार्टी? 39% लोग चाहते हैं सिर्फ दबाव समूह बने CJP
अभिजीत दीपके पहले भी साक्षात्कारों में यह कह चुके हैं कि CJP फिलहाल चुनाव लड़ने के बजाय सरकार की जवाबदेही तय करने वाले एक स्वतंत्र 'प्रेशर ग्रुप' के रूप में काम करेगी। सर्वे में जब जनता से पूछा गया कि क्या CJP को केवल एक दबाव समूह (Pressure Group) ही बने रहना चाहिए या चुनाव लड़ना चाहिए, तो जनता की राय दीपके के रुख के पक्ष में नजर आई:
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39% ने कहा प्रेशर ग्रुप बने रहे: 39 प्रतिशत लोगों का मानना है कि CJP को चुनावी राजनीति में उतरने के बजाय छात्रों और युवाओं के अधिकारों के लिए एक स्वतंत्र प्रेशर ग्रुप के तौर पर ही काम करना चाहिए।
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26% ने दी चुनाव लड़ने की सलाह: केवल 26 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने राय दी कि CJP को एक औपचारिक राजनीतिक दल बनकर चुनाव लड़ना चाहिए।
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35% तटस्थ रहे: बाकी लोगों ने इस विषय पर कोई स्पष्ट राय व्यक्त नहीं की।
जेन-जी (Gen-Z) का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा क्या है? 53% ने रोजगार को बताया नंबर-1
सर्वे में जब 18 से 35 वर्ष के युवाओं और जेन-जी मतदाताओं से उनके जीवन और भविष्य से जुड़े सबसे अहम चुनावी मुद्दों के बारे में पूछा गया, तो आर्थिक अनिश्चितता सबसे ऊपर दिखाई दी:
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रोजगार और नौकरियां (53%): आधे से अधिक यानी 53 प्रतिशत युवाओं ने नौकरियों की भारी कमी और बेरोजगारी को अपना सबसे बड़ा और पहला मुद्दा बताया।
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शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक (22%): 22 प्रतिशत युवाओं ने लचर शिक्षा व्यवस्था, भर्ती घोटालों और कोचिंग माफिया के शोषण को अपनी सबसे बड़ी चिंता माना।
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रहन-सहन का खर्च और महंगाई (12%): 12 प्रतिशत युवाओं ने बढ़ती महंगाई और दैनिक खर्चों को अपने विकास में मुख्य बाधा बताया।
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मानसिक स्वास्थ्य (4%): 4 प्रतिशत युवाओं ने करियर को लेकर बने तनाव और मेंटल हेल्थ को प्राथमिक मुद्दा माना।
देशव्यापी स्तर पर आम जनता से भारत की सबसे बड़ी समस्या पूछे जाने पर 22.7% ने बेरोजगारी, 18.1% ने महंगाई और 7.3% ने किसान संकट को शीर्ष प्राथमिकता बताया।
युवाओं को रोजगार योग्य बनाने की जिम्मेदारी किसकी? 63% ने सरकारों पर फोड़ा ठीकरा
सर्वेक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन की जिम्मेदारी से जुड़ा था। जब पूछा गया कि युवाओं को रोजगार योग्य बनाने और करियर के अवसर देने के लिए मुख्य रूप से कौन जिम्मेदार है, तो लोगों ने सीधे नीति-निर्माताओं को घेरा:
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63% लोग: केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों को इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार मानते हैं।
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14% लोग: स्कूल और कॉलेजों की पुरानी व सैद्धांतिक पढ़ाई को जिम्मेदार ठहराते हैं।
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9% लोग: निजी नियोक्ताओं और कॉर्पोरेट कंपनियों की नीतियों को कारण मानते हैं।
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5% लोग: पारिवारिक परिस्थितियों और आम लोगों की खुद की तैयारी को वजह बताते हैं।
नौजवानों के सामने नौकरी का सबसे बड़ा संकट क्या है?
रोजगार को लेकर युवा असल में किस समस्या से सबसे ज्यादा जूझ रहे हैं, इसका एक विस्तृत ब्रेकडाउन भी सर्वे में सामने आया:
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32% युवा: बाजार में पर्याप्त नौकरियों की भारी कमी का सामना कर रहे हैं।
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18% युवा: बहुत कम और असंतोषजनक वेतन (Low Pay) मिलने से परेशान हैं।
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17% युवा: मानते हैं कि उनकी उच्च डिग्री और योग्यता के अनुसार बाजार में उपयुक्त नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं।
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17% युवा: सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं के अत्यधिक धीमे होने, सालों तक परीक्षाएं लटकने और जॉइनिंग में देरी को मुख्य समस्या मानते हैं।
सोशल मीडिया बज बनाम पोलिंग बूथ: क्या कहते हैं ये आंकड़े?
सी-वोटर के इस ताजा सर्वे से स्पष्ट है कि भले ही कॉकरोच जनता पार्टी ने जेन-जी युवाओं की दुखती रग यानी बेरोजगारी और परीक्षा सुधारों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है, लेकिन चुनावी राजनीति में विश्वसनीयता हासिल करने के लिए केवल सोशल मीडिया का समर्थन पर्याप्त नहीं है। जनता का 39% समर्थन इस बात के पक्ष में है कि CJP एक स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में सरकार की जवाबदेही तय करती रहे। 53% युवाओं के लिए रोजगार का मुद्दा सबसे सर्वोपरि होने का सीधा संदेश सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए है कि आने वाले चुनावों में जातिगत या भावनात्मक समीकरणों के बजाय युवाओं के करियर और रोजगार के ठोस समाधान ही जीत-हार तय करेंगे।