CJP आंदोलन के दौरान शांति बनाए रखने पर UN में भारत की सराहना: सरकार के संयम की तारीफ, चीन और पाकिस्तान को मिली नसीहत

CJP आंदोलन के दौरान शांति बनाए रखने पर UN में भारत की सराहना: सरकार के संयम की तारीफ, चीन और पाकिस्तान को मिली नसीहत

वैश्विक मंच पर भारत की लोकतांत्रिक परिपक्वता और कानून के शासन का एक बार फिर लोहा माना गया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवाधिकार मंच पर नागरिक अधिकारों और बड़े जन-आंदोलनों की सुरक्षा को लेकर आयोजित सत्र के दौरान 'सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) व संबंधित नागरिक आंदोलनों के दौरान भारत सरकार द्वारा स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से संभालने के रवैये की सराहना की गई है। वैश्विक प्रतिनिधियों ने इस बात को रेखांकित किया कि इतने बड़े और घनी आबादी वाले लोकतांत्रिक देश में बड़े पैमाने पर असहमति, विरोध प्रदर्शनों और न्यायिक सक्रियता के बावजूद सुरक्षा बलों और प्रशासन ने संयम बरतते हुए कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखा। इसके साथ ही, मानवाधिकारों पर भारत को घेरने की नाकाम कोशिश करने वाले चीन और पाकिस्तान को मंच पर ही दो टूक नसीहत का सामना करना पड़ा।

CJP और नागरिक आंदोलनों पर UN में क्या कहा गया?

संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों और मानवाधिकार विशेषज्ञों ने नागरिक समाज संगठनों और कानूनी निगरानी समूहों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सरकार की प्रतिक्रिया की समीक्षा की:

  • संयम और लोकतांत्रिक मर्यादा: चर्चा के दौरान यह दर्ज किया गया कि भारत में तीखे जन-आंदोलनों और नागरिक मंचों की सक्रियता के बीच प्रशासनिक तंत्र ने घातक बल प्रयोग से परहेज किया और कानून के तय दायरे में रहकर शांति सुनिश्चित की।

  • अदालतों की भूमिका और कानूनी सुरक्षा: यूएन मंच पर भारत की स्वतंत्र न्यायपालिका की मजबूती को सराहा गया, जहां नागरिक अधिकारों, जमानत याचिकाओं और सार्वजनिक मंचों की निगरानी के लिए अदालतों के दरवाजे 24 घंटे खुले रहते हैं।

  • पारदर्शिता और संवाद: प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद स्थापित करने और स्थानीय प्रशासन द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में शांति बहाली के उपायों को एक परिपक्व लोकतंत्र का उदाहरण बताया गया।

चीन और पाकिस्तान को मंच पर मिली खरी-खरी

चर्चा के दौरान जब चीन और पाकिस्तान ने भारत में मानवाधिकारों और नागरिक आंदोलनों के मुद्दे को उठाने का प्रयास किया, तो अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और मंच द्वारा उन्हें उनके ही घरेलू रिकॉर्ड का आईना दिखाते हुए कड़ी नसीहत दी गई:

  • पाकिस्तान को अल्पसंख्यकों और असहमति पर घेरा: अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के 'जबरन गायब' (Enforced Disappearances) होने और ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग पर घेरा गया। उन्हें सलाह दी गई कि वे दूसरे देशों पर उंगली उठाने से पहले अपने यहां पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

  • चीन को मानवाधिकारों का सम्मान करने का संदेश: चीन को शिनजियांग, तिब्बत और हांगकांग में असहमति की आवाजों के दमन और नागरिक समाज की आजादी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने को लेकर नसीहत दी गई। मंच ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश में प्रदर्शनों को दबाने के लिए तानाशाही तरीकों के बजाय कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का स्पष्ट रुख

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रतिनिधियों ने देश का पक्ष मजबूती से रखते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है, जहां संविधान का अनुच्छेद 19 हर नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराने और अपनी बात रखने का अधिकार देता है। भारतीय पक्ष ने दोहराया कि भारत में किसी भी आंदोलन या नागरिक मंच को अपनी बात कहने की पूरी स्वतंत्रता है, बशर्ते वह देश की सुरक्षा, संप्रभुता और आम नागरिकों के जीवन को खतरे में न डाले।

वैश्विक मंच पर मिली यह सराहना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की उस छवि को और मजबूत करती है, जहां देश जटिल आंतरिक चुनौतियों और नागरिक असहमतियों के बावजूद अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मर्यादाओं को सर्वोच्च बनाए रखता है।