रेलवे स्टेशन के VIP रूम में जज को मिला खटमल वाला सोफा: भड़के मजिस्ट्रेट ने DRM को भेजा अवमानना नोटिस

रेलवे स्टेशन के VIP रूम में जज को मिला खटमल वाला सोफा: भड़के मजिस्ट्रेट ने DRM को भेजा अवमानना नोटिस

भारतीय रेलवे के स्टेशनों पर साफ-सफाई और यात्री सुविधाओं के दावों के बीच एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। रेलवे स्टेशन के वीआईपी वेटिंग लाउंज में रखे सोफे पर खटमल पाए जाने और चार महीने तक न्यायिक आदेश की अनदेखी करने पर अदालत ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद रेलवे कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) एस.एम. अहेर ने दक्षिण मध्य रेलवे के नांदेड़ डिवीजन के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

अदालत ने डीआरएम से दो टूक पूछा है कि न्यायिक अधिकारी के स्पष्ट निर्देशों का खुलेआम अनादर करने के लिए उनके खिलाफ 'अदालत की अवमानना अधिनियम' (Contempt of Courts Act) के तहत कानूनी कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए? साथ ही डीआरएम को 30 सितंबर को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने का सख्त निर्देश दिया गया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट की महिला जज ने देखी थी खटमलों की भरमार

यह पूरा मामला छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) रेलवे स्टेशन के वीआईपी वेटिंग रूम से जुड़ा है। घटनाक्रम की शुरुआत मई में हुई थी, जब बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच की न्यायाधीश जस्टिस मंजूषा देशपांडे और उनके पति ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन पहुंचे थे। वीआईपी रूम में बैठने के दौरान उन्होंने देखा कि वहां लगे पुराने सोफों में भारी संख्या में खटमल (Bedbugs) और कीड़े-मकोड़े मौजूद थे।

हाईकोर्ट जज द्वारा असुविधा और नाराजगी जताए जाने के बाद, 20 मई को रेलवे न्यायिक मजिस्ट्रेट एस.एम. अहेर ने नांदेड़ के डीआरएम को औपचारिक पत्र लिखकर वीआईपी रूम में तत्काल पेस्ट कंट्रोल कराने, पुराने और संक्रमित सोफों को तुरंत बदलकर नए सोफे लगाने तथा वीआईपी लाउंज का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए थे।

4 महीने तक सोता रहा रेलवे प्रशासन, जजों को कारों में बैठना पड़ा

मजिस्ट्रेट के स्पष्ट आदेश के बावजूद रेलवे प्रशासन चार महीने तक कुंभकर्णी नींद में सोया रहा। न तो वीआईपी लाउंज से खटमल वाले सोफे हटाए गए और न ही न्यायिक आदेश पर कोई संतोषजनक जवाब अदालत को भेजा गया।

हाल ही में जब स्थिति का दोबारा संज्ञान लिया गया, तो हालात जस के तस पाए गए। मजिस्ट्रेट ने अपने 19 सितंबर के नोटिस में बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए लिखा:

  • "वीआईपी रूम के सोफों में आज भी खटमल भरे हुए हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीशों—जो कि अति-विशिष्ट (VVIP) व्यक्ति हैं—के लिए ऐसे सोफों पर बैठना बेहद घिनौनी और अपमानजनक स्थिति है।"

  • नोटिस में रेखांकित किया गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के 15 से अधिक न्यायाधीश अक्सर अदालती कामकाज के सिलसिले में मुंबई और अन्य शहरों के लिए ट्रेन से सफर करते हैं। रेलवे की इस लापरवाही के कारण जजों को स्टेशन के वीआईपी लाउंज में बैठने के बजाय अपनी कारों में बैठकर ट्रेन का इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

'यह न्यायिक आदेश का खुला अनादर': 30 सितंबर को पेशी के आदेश

मजिस्ट्रेट ने रेलवे प्रशासन के सुस्त और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ माना। नोटिस में कहा गया कि 20 मई के निर्देश पर चार महीने तक कोई एक्शन न लेना और न ही कोई जवाब दाखिल करना एक न्यायिक अधिकारी के आदेश की जानबूझकर की गई अवहेलना है, जो सीधे तौर पर अदालत की अवमानना के दायरे में आती है।

न्यायालय ने नांदेड़ डीआरएम को निर्देश दिया है:

  1. वे 30 सितंबर को अदालत में व्यक्तिगत रूप से हाजिर हों और स्पष्ट करें कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।

  2. इस नोटिस की एक प्रति दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) के महाप्रबंधक (GM) को भी भेजी गई है।

  3. औरंगाबाद के आरपीएफ (RPF) इंस्पेक्टर को यह नोटिस व्यक्तिगत रूप से तामील कराकर रिपोर्ट सौंपने का जिम्मा दिया गया है।

रेलवे का पक्ष: प्रक्रिया में है नए सोफे की खरीद

अदालती नोटिस के बाद रेलवे हलकों में हड़कंप मच गया है। इस मामले पर दक्षिण मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) ने सफाई देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट के निर्देश के बाद पेस्ट कंट्रोल की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। रेलवे प्रवक्ता के अनुसार, वीआईपी लाउंज के लिए नए सोफे खरीदने की टेंडर प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही पुराने सोफों को नए सोफों से बदल दिया जाएगा। हालांकि, महीनों की देरी पर रेलवे के पास कोई ठोस जवाब नहीं है।