'चोर-चोर' के नारों से थर्राया कोलकाता! नेताजी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देने पहुंचीं पूर्व CM ममता बनर्जी के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल अपने चरम पर है। राजधानी कोलकाता के ऐतिहासिक श्यामबाजार पांचमाथा चौराहे पर उस समय अचानक अफरा-तफरी मच गई, जब राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचीं। जैसे ही उनका काफिला चौराहे पर रुका और वह महान स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस की तस्वीर हाथ में लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की ओर बढ़ीं, आसपास जमा हुई भीड़ के एक हिस्से ने अचानक उनके खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। 'चोर-चोर' और 'चोर भगाओ' के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा, जिससे वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और तृणमूल कार्यकर्ताओं के हाथ-पांव फूल गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन इतना अचानक और उग्र था कि कुछ देर के लिए पूरा कार्यक्रम बाधित हो गया। ममता बनर्जी उस समय भाजपा के एक सांसद द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी के विरोध में आयोजित तृणमूल कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने पहुंची थीं। हालांकि, जैसे ही उन्होंने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए। पुलिस और सुरक्षा बलों को स्थिति को संभालने और पूर्व मुख्यमंत्री को सुरक्षा घेरे में लेने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। कोलकाता जैसे गढ़ में तृणमूल सुप्रीमो के सामने इस तरह की नारेबाजी होना राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।
हालीशहर के बाद अब राजधानी में घेराबंदी: 48 घंटे के भीतर दूसरी बार घिरीं टीएमसी सुप्रीमो
कोलकाता के श्यामबाजार में हुई यह घटना महज दो दिन पहले उत्तर 24 परगना जिले के हालीशहर (कांचरापाड़ा) में घटी हिंसक घटना की एक नई कड़ी मानी जा रही है। रविवार को जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हलीशहर पुलिस स्टेशन के लॉकअप में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत तृणमूल कार्यकर्ता बिरजू केयोट के परिजनों से मिलने जा रही थीं, तब बीजपुर इलाके में उनके काफिले को सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था। उस दौरान न केवल 'चोर-चोर' के नारे लगाए गए थे, बल्कि ममता बनर्जी की कार पर कीचड़, फटे जूते-चप्पल और ईंट-पत्थर भी फेंके गए थे।
हालीशहर की उस घटना में ममता बनर्जी ने खुद दावा किया था कि अगर उनकी कार की खिड़की का शीशा खुला होता, तो उनका सिर फट सकता था और उनकी जान भी जा सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह उनके खिलाफ एक सोची-समझी साजिश थी। हालीशहर के खौफनाक अनुभव के ठीक 48 घंटे बाद अब राजधानी कोलकाता के बीचों-बीच ममता बनर्जी के सामने दोबारा 'चोर-चोर' के नारे लगना यह दर्शाता है कि विरोध का यह सिलसिला सिर्फ ग्रामीण या बाहरी इलाकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका दायरा अब राजधानी के प्रमुख केंद्रों तक फैल चुका है।
आखिर क्यों सुलग रही है बंगाल की राजनीति? जानिए नेताजी से जुड़ा पूरा विवाद
कोलकाता के श्यामबाजार में आयोजित इस विवादित कार्यक्रम की पृष्ठभूमि भाजपा सांसद नागेंद्र राय (जिन्हें अनंत महाराज के नाम से भी जाना जाता है) की एक विवादित टिप्पणी से जुड़ी हुई है। अनंत महाराज ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज की ऐतिहासिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए कुछ तीखी टिप्पणियां की थीं। तृणमूल कांग्रेस ने इस बयान को बंगाली अस्मिता और देश के महान नायक के अपमान से जोड़ते हुए तुरंत एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया। तृणमूल का कहना है कि नेताजी का अपमान पूरे बंगाल का अपमान है और इसी के विरोध में ममता बनर्जी खुद सड़क पर उतरी थीं।
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस जिस मुद्दे को लेकर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही थी, वह श्यामबाजार में लगे नारों के कारण पूरी तरह से भटक गया। भाजपा ने पहले ही अपने सांसद अनंत महाराज के बयान से दूरी बनाते हुए इसे उनका व्यक्तिगत विचार करार दे दिया था। लेकिन जब ममता बनर्जी श्यामबाजार पहुंचीं, तो वहां मौजूद लोगों ने नेताजी के मुद्दे से हटकर राज्य में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राजनीतिक लाभ के लिए महापुरुषों के नाम का इस्तेमाल करने के बजाय जनहित के मुद्दों पर जवाब दिया जाना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस का आरोप: 'भाजपा ने प्रायोजित किया विरोध, नेताजी का अपमान बर्दाश्त नहीं'
श्यामबाजार में ममता बनर्जी के खिलाफ हुई नारेबाजी के बाद तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों का गुस्सा फूट पड़ा है। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और डोला सेन ने इस घटना की तीखी शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से भाजपा समर्थित गुंडों द्वारा प्रायोजित था। तृणमूल नेताओं का आरोप है कि भाजपा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सम्मान में आयोजित शांतिपूर्ण कार्यक्रम को जानबूझकर बाधित करना चाहती थी। पार्टी का दावा है कि राजनीतिक द्वेष के चलते बाहरी तत्वों को लाकर कार्यक्रम स्थल पर अराजकता फैलाने की कोशिश की गई।
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस बंगाल और पूरे देश की धरोहर हैं और उनके प्रति किसी भी प्रकार की असम्मानजनक टिप्पणी या राजनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। टीएमसी का यह भी कहना है कि हालीशहर से लेकर कोलकाता तक ममता बनर्जी के काफिले और कार्यक्रमों को निशाना बनाना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है, ताकि पूर्व मुख्यमंत्री की लोकप्रिय छवि को धूमिल किया जा सके। पार्टी ने इस मामले में पुलिस प्रशासन से त्वरित कार्रवाई करने और उपद्रवियों की पहचान कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजने की मांग की है।
भाजपा का पलटवार: 'यह भाजपा का नहीं, बल्कि जनता का स्वतःस्फूर्त आक्रोश है'
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तृणमूल कांग्रेस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि श्यामबाजार या हालीशहर की घटनाओं में भाजपा का कोई हाथ नहीं है। भाजपा नेताओं का दावा है कि यह किसी राजनीतिक दल की साजिश नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की आम जनता का स्वतःस्फूर्त गुस्सा है, जो पिछले 15 सालों के कुशासन और भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी है।
भाजपा नेतृत्व का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री को यह समझना होगा कि जनता अब उनके बहकावे में आने वाली नहीं है। जब भी नेता जनता के बीच पहुंच रहे हैं, तो लोग भ्रष्टाचार, चिटफंड घोटालों और बेरोजगारी को लेकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। भाजपा के अनुसार, अपनी विफलताओं और जनता की नाराजगी को छिपाने के लिए तृणमूल कांग्रेस हर घटना का ठीकरा भाजपा के सिर फोड़ने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और जनता अब बदलाव की मांग कर रही है।
ग्राउंड रिपोर्ट: क्या बदल रहा है पश्चिम बंगाल की राजनीति का रुख?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ जिस तरह से सार्वजनिक रूप से नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं, वह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत हैं। एक दौर था जब ममता बनर्जी के किसी भी इलाके में पहुंचने पर हजारों की भीड़ उनके समर्थन में उमड़ती थी, लेकिन हालिया घटनाओं से यह स्पष्ट है कि राज्य में राजनीतिक विरोध का स्तर बेहद आक्रामक और सीधा हो चुका है।
हालीशहर में गाड़ी पर कीचड़-पत्थर फेंके जाने से लेकर कोलकाता के दिल कहे जाने वाले श्यामबाजार में 'चोर-चोर' के नारे लगने तक, ये घटनाएं यह साबित करती हैं कि आगामी राजनीतिक लड़ाइयों से पहले बंगाल का माहौल और अधिक गर्म होने वाला है। एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस इसे बंगाली अस्मिता और साजिश का मुद्दा बनाकर जनता के बीच सहानुभूति हासिल करने की कोशिश कर रही है, वहीं विरोधी दल इसे जन-आक्रोश बताकर टीएमसी की घेराबंदी मजबूत कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह सियासी जंग क्या नया मोड़ लेती है और क्या तृणमूल कांग्रेस जनता के इस आक्रामक विरोध का मुकाबला करने में सफल हो पाती है या नहीं।