अडानी ग्रुप को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका: कोर्ट ने खारिज की दलील, कहा- एयरपोर्ट की ड्यूटी-फ्री दुकानों पर भी मानना होगा भारत का कानून
देशभर में आठ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का संचालन करने वाले अडानी ग्रुप को बॉम्बे हाई कोर्ट से एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। हवाई अड्डे के अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान और ड्यूटी-फ्री क्षेत्र में बेचे जाने वाले उत्पादों को घरेलू कानूनों से बाहर बताने की अडानी ग्रुप की दलील को अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट और सख्त शब्दों में व्यवस्था दी है कि एयरपोर्ट पर स्थित ड्यूटी-फ्री दुकानें (Duty-Free Shops) देश के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं हैं। भले ही कोई लेन-देन कस्टम बैरियर के उस पार हो रहा हो, लेकिन उस पर भारत की घरेलू कानूनी और विनियामक व्यवस्था (Domestic Regulatory Framework) पूरी तरह लागू होगी।
क्या है पूरा मामला? निकोटीन पाउच की बिक्री पर शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा विवाद मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) के ड्यूटी-फ्री आउटलेट्स पर निकोटीन पाउच (Nicotine Pouches) के स्टॉक और बिक्री से जुड़ा है।
ड्रग कंट्रोलर और सरकारी एजेंसियों ने जांच के दौरान पाया था कि अडानी ग्रुप द्वारा संचालित मुंबई एयरपोर्ट की ड्यूटी-फ्री दुकानों में निकोटीन पाउच का बड़ा स्टॉक रखा जा रहा था और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को बेचा जा रहा था। भारतीय स्वास्थ्य और औषधि कानूनों के तहत बिना उचित मंजूरी के निकोटीन युक्त ऐसे उत्पादों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित और गैर-कानूनी मानी जाती है। जांच एजेंसियों ने इसे औषधि एवं प्रसाधन सामग्री कानून (ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट) का खुला उल्लंघन और जन-स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा करार दिया था।
कोर्ट में अडानी ग्रुप की क्या थी दलील?
अप्रैल में सरकारी कार्रवाई के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए अडानी ग्रुप की ओर से तर्क दिया गया था कि:
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क्षेत्राधिकार से बाहर होने का दावा: अंतरराष्ट्रीय डिपार्चर एरिया और कस्टम बैरियर के पार स्थित ड्यूटी-फ्री जोन भारत के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र (Territorial Jurisdiction) के अंतर्गत नहीं आता, इसलिए वहां भारत के सामान्य घरेलू नियम लागू नहीं होने चाहिए।
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इनोवेशन का हवाला: ग्रुप ने यह भी तर्क रखा कि निकोटीन पाउच को पारंपरिक 'ड्रग' या दवा की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, बल्कि यह आधुनिक तकनीक का एक इनोवेशन (नवाचार) है, जिस पर भारतीय औषधि कानूनों के तहत रोक नहीं लगाई जा सकती।
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उन्होंने किसी भी गलत काम या कानून तोड़ने से साफ इनकार किया।
हाई कोर्ट की दो टूक: 'कस्टम बैरियर के पार भी लागू होगा देश का कानून'
बॉम्बे हाई कोर्ट ने अडानी ग्रुप के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कानूनी स्थिति साफ कर दी:
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देश का कानून सर्वोच्च: कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "ऐसे उत्पाद देश के कानून के दायरे में आते हैं और उन पर भारत के नियम-कायदे पूरी तरह प्रभावी रहेंगे। यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि कस्टम बैरियर के बाहर होने के कारण कोई क्षेत्र भारतीय कानूनों से मुक्त हो जाता है।"
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रेगुलेटरी सिस्टम बाध्यकारी: अदालत ने रेखांकित किया कि भारत की संप्रभु सीमा के भीतर स्थित हर प्रतिष्ठान पर घरेलू विनियामक तंत्र (Regulatory System) लागू होता है। ड्यूटी-फ्री केवल टैक्स रियायतों (Customs & Excise Exemption) से जुड़ा एक वित्तीय प्रावधान है, इसका मतलब यह कतई नहीं कि वहां देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े कानून निष्प्रभावी हो जाएं।
11 अरब डॉलर के विस्तार प्लान पर फैसलों का असर
वर्तमान में अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) भारत में मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम, मंगलुरु और नवी मुंबई एयरपोर्ट्स के विकास व प्रबंधन से जुड़ी है। ग्रुप हवाई अड्डों पर ड्यूटी-फ्री रिटेल, फूड कोर्ट और कॉमर्शियल स्पेस के जरिए 11 अरब डॉलर के बड़े विस्तार की योजना पर काम कर रहा है।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब यह तय हो गया है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों वाले ट्रांजिट एरिया या ड्यूटी-फ्री दुकानों में कोई भी ऐसा उत्पाद नहीं बेचा जा सकेगा जिसे भारत सरकार ने स्वास्थ्य, सुरक्षा या ड्रग कानूनों के तहत प्रतिबंधित किया हुआ है। इस व्यवस्था से एयरपोर्ट ऑपरेटरों की मनमानी पर लगाम लगेगी और कड़े विनियामक नियमों का पालन अनिवार्य होगा।