मनोज जरांगे पाटिल ने 20 दिन बाद तोड़ा अनशन, लेकिन मराठा आरक्षण पर सरकार को दिया 90 दिन का कड़ा अल्टीमेटम; मुंबई कूच फिलहाल स्थगित

मनोज जरांगे पाटिल ने 20 दिन बाद तोड़ा अनशन, लेकिन मराठा आरक्षण पर सरकार को दिया 90 दिन का कड़ा अल्टीमेटम; मुंबई कूच फिलहाल स्थगित

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर एक बार फिर आर-पार की लड़ाई लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल (Manoj Jarange Patil) ने लगातार 20 दिनों से जारी अपनी भूख हड़ताल को गुरुवार सुबह समाप्त कर दिया। जालना के अंतरवाली सराटी से मुंबई के आजाद मैदान की ओर विशाल जनसमूह के साथ कूच कर रहे जरांगे पाटिल ने बीड़ जिले के पाटोदा में राज्य सरकार के मंत्रियों और विधायकों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मैराथन वार्ता के बाद यह फैसला लिया। हालांकि, अनशन समाप्त करने के साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को 3 महीने (90 दिन) का सख्त अल्टीमेटम थमा दिया है। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि यदि इन 90 दिनों में उनकी मांगों पर ठोस लिखित अमल नहीं हुआ, तो वे पूरे मराठा समाज, महिलाओं और बच्चों के साथ सीधे मुंबई में प्रवेश करेंगे।

पाटोदा में भोर में हुई मैराथन बैठक, मंत्रियों ने पिलाया जूस

मनोज जरांगे पाटिल की तबीयत पिछले कुछ दिनों से लगातार गिर रही थी और बीड़ के पाटोदा स्थित विट्ठल मंदिर परिसर में उन्हें सलाइन चढ़ाई जा रही थी। हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल पाटोदा पहुंचा:

  • प्रतिनिधिमंडल में शामिल दिग्गज: मराठा आरक्षण कैबिनेट उप-समिति के अध्यक्ष व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, मंत्री दादा भुसे, भाजपा एमएलसी प्रसाद लाड, विधायक सुरेश धस और बीड़ के जिलाधिकारी इस बैठक में मौजूद रहे।

  • अनशन खत्म कराने की अपील: मंत्रियों ने जरांगे पाटिल को सरकार द्वारा कुनबी प्रमाण पत्र और आरक्षण के लिए उठाए गए कानूनी कदमों की जानकारी दी और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उनसे अनशन वापस लेने का आग्रह किया।

  • तीन प्रतिनिधियों की निगरानी: मंत्री विखे पाटिल ने प्रस्ताव दिया कि सरकारी कामकाज और प्रक्रियाओं की निगरानी के लिए जरांगे अपने तीन प्रतिनिधि नियुक्त करें। इसके बाद गुरुवार सुबह करीब 6 बजे जरांगे ने जूस पीकर अपना 20 दिन पुराना अनशन समाप्त किया।

क्या हैं मनोज जरांगे पाटिल की मुख्य शर्तें और अल्टीमेटम?

अनशन समाप्त करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए मनोज जरांगे ने साफ किया कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है, केवल अनशन स्थगित किया गया है:

  • 90 दिन का अंतिम मौका: जरांगे ने कहा, "हमें लड़ते हुए तीन साल बीत चुके हैं। अब हम सरकार को 3 महीने और दे रहे हैं। मान लेते हैं कि यह सरकार का आखिरी मौका है। अगर इन तीन महीनों में हमें धोखा दिया गया, तो हम अपने बच्चों और महिलाओं के साथ सीधे मुंबई की सड़कों पर उतरेंगे।"

  • गजेटियर को कानूनी मान्यता की मांग: उनकी सबसे प्रमुख मांग है कि हैदराबाद गजेटियर, सतारा गजेटियर और औंध गजेटियर के ऐतिहासिक प्रशासनिक दस्तावेजों को कानूनी रूप से मान्यता दी जाए, ताकि मराठा समुदाय कुनबी वंशावली साबित कर ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण लाभ प्राप्त कर सके।

  • लिखित गारंटी: उन्होंने मांग रखी कि मुख्यमंत्री खुद हस्ताक्षर करके लिखित आश्वासन दें कि किसी भी कुनबी रिकॉर्ड को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

मुंबई कूच फिलहाल रोका, कार्यकर्ताओं से घर लौटने की अपील

जरांगे पाटिल का यह मोर्चा 19 सितंबर को मुंबई के ऐतिहासिक आजाद मैदान पहुंचने वाला था, जहां पहले से ही हजारों समर्थक डेरा डाले हुए थे। गणेशोत्सव और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मुंबई पहुंच चुके करीब 1 लाख से अधिक समर्थकों से शांतिपूर्वक अपने-अपने घर लौटने की अपील की।

उन्होंने समर्थकों से कहा कि कभी-कभी एक बड़ा कदम उठाने के लिए दो कदम पीछे खींचने पड़ते हैं। सरकार जो पहले बात करने से कतरा रही थी, उसे मराठा समाज की ताकत के आगे झुकना पड़ा और मंत्रियों को वार्ता के लिए गांव आना पड़ा। फिलहाल सरकार को 3 महीने का समय देकर जरांगे ने गेंद महायुति सरकार के पाले में डाल दी है, जिससे आगामी विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों के लिहाज से महाराष्ट्र की राजनीति में दबाव का नया अध्याय शुरू हो गया है।