राज्यसभा में फिर बढ़ेगा NDA का कुनबा: यूपी की 10, उत्तराखंड की 1 और बंगाल की सीट पर सियासी बिसात
संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ताकत में एक बार फिर इजाफा होने जा रहा है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा उत्तर प्रदेश की 10 सीटों, उत्तराखंड की 1 सीट और पश्चिम बंगाल की 1 रिक्त सीट (कुल 12 सीटों) पर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में नंबर गेम और संभावित उम्मीदवारों को लेकर जोड़-तोड़ तेज हो गई है।
उपलब्ध कार्यक्रम के मुताबिक, इन सीटों के लिए 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी, 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे और 16 अक्टूबर को मतदान के साथ ही मतगणना संपन्न होगी। वर्तमान विधानसभाओं में विभिन्न दलों के संख्याबल और गणित को देखें, तो इस चुनाव के बाद राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत एनडीए का कुनबा और मजबूत होना तय माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश की 10 सीटों का सियासी गणित: बीजेपी 8 और सपा 2 की ओर
उत्तर प्रदेश से खाली हो रही 10 सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इन 10 सीटों में वर्तमान में भाजपा के पास 8 सीटें, समाजवादी पार्टी (सपा) के पास 1 सीट (प्रो. रामगोपाल यादव) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पास 1 सीट (रामजी गौतम) है।
-
जीत के लिए जरूरी वोट: यूपी विधानसभा की कुल 403 सीटों में से रिक्तियों को हटाकर मौजूदा सदस्य संख्या के आधार पर एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए औसतन 37 विधायकों के प्रथम वरीयता वोट की आवश्यकता होगी।
-
एनडीए की ताकत (8 सीटें पक्की): भाजपा और उसके सहयोगी दलों (अपना दल-एस, रालोद, निषाद पार्टी, सुभासपा) को मिलाकर एनडीए का आंकड़ा 289 के करीब पहुंचता है। इसके अलावा रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) की जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो विधायकों और निर्दलीयों के समर्थन से यह संख्याबल 294 तक बैठता है। 37 वोटों के हिसाब से भाजपा नीत एनडीए अपने दम पर आसानी से 8 सीटें बरकरार रखने की स्थिति में है।
-
सपा का गणित (1 से बढ़कर 2 सीटें): समाजवादी पार्टी के पास विधानसभा में 100 से अधिक विधायक हैं। 37 के कोटे के अनुसार सपा इस बार आसानी से 2 सीटें जीतने में कामयाब रहेगी। यानी सपा को इस चुनाव में सीधे 1 सीट का फायदा होता दिख रहा है।
-
बसपा का सूपड़ा साफ: बसपा के पास विधानसभा में संख्याबल न होने के कारण रामजी गौतम का कार्यकाल समाप्त होते ही उच्च सदन में मायावती की पार्टी का प्रतिनिधित्व पूरी तरह शून्य हो जाएगा।
उत्तराखंड की 1 सीट: भाजपा की झोली में जाना तय
उत्तराखंड की एकमात्र राज्यसभा सीट भाजपा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल पूरा होने के कारण खाली हो रही है। 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास दो-तिहाई से अधिक का प्रचंड बहुमत है। ऐसे में कांग्रेस या विपक्ष के पास संख्याबल न होने के चलते यह सीट निर्विरोध या सीधे मुकाबले में भाजपा के ही खाते में जाना तय है।
पश्चिम बंगाल की 1 सीट पर उपचुनाव: क्या बदलेगा समीकरण?
पश्चिम बंगाल की एक रिक्त राज्यसभा सीट पर भी 16 अक्टूबर को ही उपचुनाव कराया जा रहा है। यह सीट तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टिकट पर चुनी गईं अभिनेत्री रुक्मिणी मलिक (कोयल मलिक) के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।
बंगाल विधानसभा में मौजूदा राजनीतिक स्थिति और दलीय समीकरणों के चलते इस उपचुनाव पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। हालिया सियासी बदलावों और सदन के अंकगणित के आधार पर भाजपा इस सीट पर भी मजबूती से दावा ठोक रही है। यदि यह सीट भाजपा अपने पाले में खींचने में सफल रहती है, तो यह राज्यसभा में टीएमसी के लिए बड़ा झटका और एनडीए के लिए अप्रत्याशित बढ़त होगी।
2027 चुनाव से पहले भाजपा साधेगी जातीय समीकरण
उत्तर प्रदेश में खाली हो रही 8 भाजपा सीटों पर उम्मीदवारों का चयन बेहद अहम माना जा रहा है। रिटायर हो रहे सांसदों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, पूर्व डीजीपी बृजलाल, नीरज शेखर, अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी और गीता शाक्य शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए भाजपा इस बार जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए कई नए व युवा चेहरों को उच्च सदन का टिकट दे सकती है। वहीं, केंद्रीय मंत्रियों के भविष्य को लेकर भी इस चयन प्रक्रिया पर केंद्रीय नेतृत्व की पैनी नजर है।
नतीजों के बाद उच्च सदन में कैसा दिखेगा एनडीए का आंकड़ा?
इस पूरे चुनावी चक्र के संपन्न होने के बाद राज्यसभा में भाजपा की व्यक्तिगत सदस्य संख्या 117 के पार और एनडीए का कुल आंकड़ा 155 के आसपास पहुंच सकता है। इससे केंद्र सरकार को संसद के उच्च सदन में महत्वपूर्ण विधायी विधेयकों को पारित कराने में पहले से कहीं अधिक सहजता और मजबूती प्राप्त होगी।