राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व ADC ऋषभ सिंह संब्याल ने किया जीवन के सबसे बड़े त्याग का खुलासा; जानिए देश सेवा के लिए क्या छोड़ना पड़ा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व ADC ऋषभ सिंह संब्याल ने किया जीवन के सबसे बड़े त्याग का खुलासा; जानिए देश सेवा के लिए क्या छोड़ना पड़ा

भारत के राष्ट्रपति के 'एडीसी' यानी एडे-डी-कैंप (Aide-de-Camp - ADC) का पद देश के सबसे प्रतिष्ठित और गरिमामय सैन्य दायित्वों में गिना जाता है। राष्ट्रपति के साए की तरह साथ चलने वाले इन चुनिंदा सैन्य अधिकारियों का जीवन बाहर से जितना भव्य और अनुशासित नजर आता है, उसके पीछे का व्यक्तिगत समर्पण और त्याग उतना ही कठोर होता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी मेजर ऋषभ सिंह संब्याल (Rishabh Singh Sambyal) ने हाल ही में अपने कार्यकाल के अनुभवों को साझा करते हुए उस सबसे बड़े व्यक्तिगत त्याग का खुलासा किया है, जो उन्हें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की सेवा के दौरान देना पड़ा। संब्याल ने बताया कि एक एडीसी का जीवन 24x7 केवल और केवल देश के प्रथम नागरिक के प्रोटोकॉल, सुरक्षा और सेवा के लिए समर्पित होता है, जहां 'व्यक्तिगत जीवन' जैसी कोई चीज नहीं बचती।

'परिवार के सबसे अहम पलों से दूरी': संब्याल ने साझा किया दिल छू लेने वाला सच

ऋषभ सिंह संब्याल ने अपने साक्षात्कार में खुलासा किया कि उनके पूरे कार्यकाल के दौरान सबसे बड़ी चुनौती और त्याग परिवार, निजी खुशियों और अपनों के दुख-सुख से पूरी तरह कट जाना था:

  • शून्य अवकाश और लगातार यात्राएं: राष्ट्रपति के एडीसी को चौबीसों घंटे तैयार रहना पड़ता है। देश के विभिन्न राज्यों के आधिकारिक दौरों से लेकर अंतरराष्ट्रीय विदेशी यात्राओं और राष्ट्रपति भवन के औपचारिक समारोहों तक, एक मिनट की भी चूक की गुंजाइश नहीं होती।

  • पारिवारिक उत्सवों और संकट में अनुपस्थिति: संब्याल ने बताया कि इस अत्यंत संवेदनशील जिम्मेदारी के चलते वे न तो अपने परिवार के कई बड़े उत्सवों में शामिल हो सके और न ही निजी संकट के समय तुरंत घर पहुंच सके।

  • निजी सपनों को पीछे छोड़ना: उन्होंने स्पष्ट किया कि जब आप उस स्तर पर देश सेवा के लिए चुने जाते हैं, तो अपनी निजी प्राथमिकताओं, छुट्टियों और सामाजिक जीवन को पूरी तरह भुला देना ही सबसे बड़ा और अनिर्वाय त्याग बन जाता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सादगी और मातृत्व ने हल्का किया बोझ

मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने अपने संस्मरणों में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सहज और संवेदनशील व्यवहार की जमकर सराहना की। उन्होंने बताया कि भले ही यह ड्यूटी शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद थका देने वाली होती थी, लेकिन महामहिम राष्ट्रपति के मातृत्वपूर्ण और शालीन स्वभाव ने इसे हमेशा आसान बना दिया:

  • कर्मचारियों का ख्याल: संब्याल के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू अपने स्टाफ और सुरक्षा दल के खान-पान, सेहत और आराम का व्यक्तिगत रूप से ध्यान रखती हैं।

  • संवेदनशील नेतृत्व: उन्होंने कहा कि जब देश का सर्वोच्च नेता जमीन से जुड़ा और संवेदनशील हो, तो उनके लिए किया गया हर व्यक्तिगत त्याग अपने आप छोटा और गौरवपूर्ण लगने लगता है।

कौन होते हैं राष्ट्रपति के ADC और कैसे होता है चयन?

राष्ट्रपति के एडीसी का चयन भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, नौसेना और वायुसेना) के सबसे बेहतरीन और अनुशासित युवा अधिकारियों में से बेहद कड़ी चयन प्रक्रिया के जरिए किया जाता है:

  • सख्त मानदंड: इसके लिए अधिकारी का उत्कृष्ट सर्विस रिकॉर्ड, त्रुटिहीन सैन्य आचरण, उत्कृष्ट शारीरिक फिटनेस, कूटनीतिक शिष्टाचार (Diplomatic Etiquette) और प्रोटोकॉल की गहरी समझ देखी जाती है।

  • प्रमुख कार्य: एडीसी का मुख्य कार्य राष्ट्रपति के दैनिक कार्यक्रमों, राजकीय भोज, गार्ड ऑफ ऑनर, पदक वितरण समारोहों और विदेशी दौरों के दौरान सुरक्षा, समन्वय और सैन्य प्रोटोकॉल का निर्बाध संचालन सुनिश्चित करना होता है।

मेजर ऋषभ सिंह संब्याल का यह खुलासा दिखाता है कि देश के सबसे शीर्ष संस्थानों में औपचारिक मुस्कान और सधे हुए कदमों के पीछे हमारे सैन्य अधिकारी कर्तव्य की वेदी पर अपनी निजी खुशियों की कितनी बड़ी आहुति देते हैं।