थलपति विजय के खिलाफ बोलना DMK को पड़ा भारी: सांसद ए राजा और पूर्व मंत्री शेखर बाबू पर धड़ाधड़ दर्ज हुई FIR; जानें 'MISA' से भड़के सियासी घमासान

थलपति विजय के खिलाफ बोलना DMK को पड़ा भारी: सांसद ए राजा और पूर्व मंत्री शेखर बाबू पर धड़ाधड़ दर्ज हुई FIR; जानें 'MISA' से भड़के सियासी घमासान

तमिलनाडु की सियासत में 'सिनेमा बनाम राजनीति' का टकराव अब गंभीर कानूनी दांव-पेंच और पुलिस थानों तक पहुंच गया है। तमिल सुपरस्टार और तमिलागा वेत्री कझगम (TVK) के प्रमुख थलपति विजय (सी. जोसेफ विजय) के खिलाफ विवादास्पद और अमर्यादित बयानबाजी करना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के शीर्ष नेताओं को भारी पड़ गया है।

ग्रेटर चेन्नई और कल्लाकुरिची पुलिस ने डीएमके के वरिष्ठ नेता व लोकसभा सांसद ए. राजा (A. Raja), पूर्व मंत्री एवं हार्बर विधायक पी.के. शेखर बाबू (P.K. Sekar Babu) और विधायक वसंतम कार्तिकेयन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं में आपराधिक मुकदमे दर्ज किए हैं। TVK कार्यकर्ताओं द्वारा दी गई तहरीरों और वीडियो सबूतों के आधार पर पुलिस ने यह ताबड़तोड़ कार्रवाई की है।

किन नेताओं पर क्या आरोप लगे और कहां दर्ज हुए केस?

12 सितंबर को डीएमके द्वारा राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे, जहां नेताओं के बोल बिगड़ने के बाद यह कानूनी शिकंजा कसा:

  • सांसद ए. राजा पर 7 धाराओं में FIR: चेन्नई के सैदापेट में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान नीलगिरी से सांसद और डीएमके के उप-महासचिव ए. राजा ने मंच से विजय पर तीखा हमला बोला और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। साथ ही, उन्होंने टीवीके के मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार पर व्यक्तिगत व अमर्यादित टिप्पणी कर दी। TVK पदाधिकारियों की शिकायत पर सैदापेट पुलिस स्टेशन में ए. राजा के खिलाफ शांति भंग करने, भड़काऊ भाषण और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने से जुड़ी 7 धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

  • पूर्व मंत्री पी.के. शेखर बाबू पर शिकंजा: चेन्नई कलेक्ट्रेट के पास प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री और विधायक पी.के. शेखर बाबू ने विजय को "कायर" और विवादित शब्दों से संबोधित किया। उनके खिलाफ नॉर्थ बीच पुलिस स्टेशन (B1) में सार्वजनिक रूप से अभद्र भाषा के इस्तेमाल, वैमनस्य फैलाने और शांति भंग करने के आरोप में BNS की 6 धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

  • विधायक वसंतम कार्तिकेयन पर मुकदमा: कल्लाकुरिची में ऋषिवांडियम से डीएमके विधायक वसंतम कार्तिकेयन पर भी विजय के खिलाफ मानहानिकारक और भड़काऊ टिप्पणी करने के आरोप में मामला दर्ज हुआ है।

विवाद की जड़: विधानसभा में 'MISA' और एम.के. स्टालिन पर टिप्पणी

इस पूरे सियासी बवंडर की शुरुआत तमिलनाडु विधानसभा सत्र के दौरान हुई थी:

  • विजय का विधानसभा भाषण: विजय ने सदन में डीएमके पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का जिक्र किया था। इसी दौरान उन्होंने आपातकाल (1975-77) के समय डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन की 'मीसा' (MISA - Maintenance of Internal Security Act) के तहत हुई कथित गिरफ्तारी पर सवाल उठाए और जबड़े पर हाथ रखकर एक शारीरिक हाव-भाव (जेस्चर) किया।

  • डीएमके की कड़ी आपत्ति: डीएमके ने इसे स्टालिन के ऐतिहासिक त्याग का उपहास बताते हुए कहा कि जेल में पुलिस की पिटाई से स्टालिन की जबड़े की हड्डी टूट गई थी।

  • टीवीके मंत्री का पलटवार: इसके बाद टीवीके के विधि मंत्री निर्मल कुमार ने मदुरै में बयान देकर मामले को और भड़का दिया कि स्टालिन के पास कोई आधिकारिक 'डिटेंशन कॉपी' नहीं है, इसलिए वे बिना सबूत के खुद को राजनीतिक शहीद साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।

ए. राजा के बयान पर अपनों ने भी घेरा, बाद में मांगी माफी

ए. राजा की विवादित टिप्पणी इतनी व्यक्तिगत हो गई थी कि न केवल विपक्षी दलों और वामपंथी दलों (CPI-M) ने इसकी भर्त्सना की, बल्कि खुद डीएमके के भीतर से भी उनके खिलाफ आवाज उठी।

  • डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने सोशल मीडिया पर 'तिरुक्कुरल' का दोहा साझा करते हुए जुबान पर नियंत्रण रखने की नसीहत दी, जिसे सीधे तौर पर ए. राजा के बयान की निंदा माना गया।

  • सीपीआई(एम) के राज्य सचिव पी. षणमुगम ने भी महिलाओं और परिवार पर की गई अमर्यादित टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज जताया।

  • चौतरफा घिरने के बाद ए. राजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सफाई देते हुए लिखा कि भावुक आवेग में आकर उन्होंने शब्द कहे थे और वे अपनी अमर्यादित टिप्पणियों को वापस लेते हुए खेद व्यक्त करते हैं।

'विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश': डीएमके का आरोप

डीएमके के शीर्ष नेताओं पर एक के बाद एक दर्ज हुई प्राथमिकियों के बाद पार्टी बचाव की मुद्रा के साथ-साथ हमलावर भी हो गई है। डीएमके के वरिष्ठ नेता टी.के.एस. एलंगोवन ने कहा कि एक विपक्षी दल के रूप में उन्हें सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीवीके प्रशासन अपनी प्रशासनिक विफलता और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर जवाब देने के बजाय विपक्ष की आवाज दबाने के लिए पुलिस का दुरुपयोग कर रहा है।

वहीं दूसरी ओर, TVK कैडर का कहना है कि वे राजनीतिक आलोचना का स्वागत करते हैं, लेकिन राज्य के नेता के खिलाफ अभद्र और असंसदीय भाषा को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।