जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा संदिग्ध रैपिडो ड्राइवर गिरफ्तार, PM मोदी पर की थी विवादित टिप्पणी; ATS ने दबोचा

जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा संदिग्ध रैपिडो ड्राइवर गिरफ्तार, PM मोदी पर की थी विवादित टिप्पणी; ATS ने दबोचा

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी आतंकी साजिश और राष्ट्रविरोधी नेटवर्क को ध्वस्त करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने एक खुफिया और गोपनीय अभियान के तहत माहिम इलाके से पाकिस्तान समर्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'जैश-ए-मोहम्मद' (JeM) से जुड़े एक संदिग्ध युवक को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी दिन के समय में आम लोगों को बाइक टैक्सी सर्विस देने वाले रैपिडो ड्राइवर और इत्र (परफ्यूम) विक्रेता के रूप में काम करता था, जबकि रात के अंधेरे में वह सीमा पार बैठे पाकिस्तानी आकाओं के इशारे पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए नफरत, कट्टरपंथ और दहशत फैलाने का गुप्त जाल बुन रहा था। जांच में सामने आया है कि आरोपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई दौरे से ठीक पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भड़काऊ बातें लिख रहा था और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहा था। एटीएस की इस त्वरित कार्रवाई ने मुंबई को किसी बड़ी अनहोनी और सांप्रदायिक तनाव से बचा लिया है।

माहिम मेट्रो स्टेशन के पास से दबोचा गया मोहम्मद हसन: इत्र बेचने और बाइक टैक्सी की आड़ में रची जा रही थी साजिश

महाराष्ट्र एटीएस को पिछले कुछ दिनों से गुप्त सूत्रों और साइबर सर्विलांस विंग के माध्यम से यह सूचना मिल रही थी कि माहिम इलाके में कोई व्यक्ति संदिग्ध पाकिस्तानी खुफिया नेटवर्क से लगातार संपर्क में है। पुख्ता तकनीकी निगरानी के बाद एटीएस की विशेष टीम ने जाल बिछाया और माहिम मेट्रो स्टेशन के पास से मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर नाम के युवक को हिरासत में ले लिया। विस्तृत पूछताछ के बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया। शुरुआती तफ्तीश में यह सनसनीखेज सच उजागर हुआ कि 20 से 25 साल की उम्र का यह युवक आम जनता और पड़ोसियों की नजरों में बेहद सीधा-साधा दिखता था। वह दिन में सड़क किनारे इत्र और परफ्यूम बेचता था और साथ ही रैपिडो ऐप पर बाइक राइडर के रूप में काम करता था। इन सामान्य पेशों की आड़ लेकर वह सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचते हुए ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री प्रसारित करने और युवाओं को भड़काने के नापाक मिशन में जुटा हुआ था।

पाकिस्तानी टेलीग्राम चैनलों और मसूद अजहर की जहरीली ऑडियो से जुड़ा लिंक: बाबरी मस्जिद का जिक्र कर भड़का रहा था भावनाएं

जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर सीधे तौर पर पाकिस्तानी खुफिया तंत्र और जैश-ए-मोहम्मद के डिजिटल सिंडिकेट के संपर्क में बना हुआ था। वह 'इब्न-ए-कासिम' (IBN E Qasim) नाम के एक कुख्यात पाकिस्तानी कट्टरपंथी टेलीग्राम चैनल का सक्रिय सदस्य था, जहां से उसे भारत विरोधी प्रचार सामग्री और हिंसक निर्देश प्राप्त होते थे। इसके अलावा वह 'इंडियन मुस्लिम' नामक एक अन्य संवेदनशील टेलीग्राम ग्रुप में सक्रिय था, जहां उसने जैश-ए-मोहम्मद के खूंखार आतंकी सरगना मौलाना मसूद अजहर की कई भड़काऊ ऑडियो क्लिप्स साझा की थीं। इन ऑडियो संदेशों में बाबरी मस्जिद का उल्लेख कर मुस्लिम युवाओं की धार्मिक भावनाओं को भड़काने, उन्हें हथियार उठाने और समाज में विभाजन पैदा करने के लिए उकसाया जा रहा था। एटीएस की तकनीकी टीम अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या अख्तर के जरिए स्थानीय स्तर पर कोई स्लीपर सेल तैयार करने या वित्तीय मदद पहुंचाने का काम भी चल रहा था।

सोशल मीडिया पर फैला रहा था जहर: 'अब जिहाद का जमाना आ गया है' लिखकर पीएम मोदी और सुरक्षा पर साधा था निशाना

अख्तर केवल टेलीग्राम तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर भी कई संदिग्ध अकाउंट्स बना रखे थे। इन प्रोफाइल्स के जरिए वह खुलेआम हिंसा का समर्थन कर रहा था। उसने अपने सोशल मीडिया पोस्ट्स में लिखा था कि 'अब जिहाद का जमाना आ गया है', जिसके जरिए वह सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था को चुनौती दे रहा था। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया मुंबई दौरे से पहले उसने सुरक्षा घेरे में चूक को लेकर विवादित और खतरनाक पोस्ट्स किए थे। इसके साथ ही उसने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के संदर्भ को जोड़ते हुए बेहद आपत्तिजनक और उकसाने वाले कमेंट्स भी पोस्ट किए थे। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी किसी बड़ी साजिश का हिस्सा थी या फिर यह किसी बड़े आतंकी हमले के लिए जमीनी माहौल तैयार करने की कोशिश थी।

रेडमी नोट 14 प्रो जब्त और 39 पुख्ता स्क्रीनशॉट सुरक्षित: BNS की धारा 196(1) में कसा शिकंजा, पड़ोसी भी रह गए दंग

एटीएस ने गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के कब्जे से उसका 'रेडमी नोट 14 प्रो' स्मार्टफोन जब्त कर लिया है। डिजिटल फॉरेंसिक लैब की प्राथमिक जांच में उसके फोन से पाकिस्तानी नंबरों से हुई बातचीत, चैट हिस्ट्री, भड़काऊ ऑडियो फाइल्स और आतंकी साहित्यों के कई पुख्ता डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं। जांच दल ने कोर्ट में मजबूत केस पेश करने के लिए उसकी नफरती गतिविधियों और पोस्ट्स के 39 महत्वपूर्ण स्क्रीनशॉट्स को केस डायरी का हिस्सा बनाया है। विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने, राष्ट्रीय एकता को खतरे में डालने और नफरत भड़काने के आरोप में अख्तर के खिलाफ 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) की धारा 196(1) के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। दूसरी ओर, समाचार एजेंसी आईएएनएस की ग्राउंड रिपोर्ट में आरोपी के एक पड़ोसी ने स्तब्ध होते हुए बताया कि वह पिछले करीब साढ़े तीन साल से इलाके में किराए के कमरे में रह रहा था। वह दिन में इत्र बेचता था और बाहर बैठकर सामान्य बातचीत करता था, जिससे किसी को कभी उस पर रत्ती भर भी शक नहीं हुआ। एटीएस अब आरोपी को रिमांड पर लेकर उसके कॉल रिकॉर्ड्स, मनी ट्रेल और अन्य संपर्कों को खंगालने में जुटी है।