अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैन डाइक पर आतंकी आरोप खत्म नहीं हुए हैं: NIA और सरकार ने दी सफाई, जानिए पूरा मामला

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैन डाइक पर आतंकी आरोप खत्म नहीं हुए हैं: NIA और सरकार ने दी सफाई, जानिए पूरा मामला

म्यांमार के विद्रोही गुटों को ड्रोन और सैन्य प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार किए गए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक (Matthew Aaron VanDyke) और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) द्वारा दाखिल चार्जशीट को लेकर देश में सियासी और कानूनी बहस छिड़ गई है। मीडिया में यह खबरें आने के बाद कि एनआईए ने चार्जशीट में कड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धाराएं हटा दी हैं, विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए। हालांकि, विवाद गहराने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी और सरकारी सूत्रों ने आधिकारिक रुख साफ करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवादी साजिश की जांच को बंद या खत्म नहीं किया गया है, बल्कि तकनीकी व कानूनी बाध्यताओं के चलते यह कदम उठाया गया है।

चार्जशीट में UAPA की जगह इमिग्रेशन एक्ट क्यों? सरकार और NIA का तर्क

राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष न्यायाधीश के समक्ष दायर पहली चार्जशीट में एनआईए ने सभी सातों आरोपियों पर केवल आव्रजन एवं विदेशी (नागरिक) अधिनियम (Immigration and Foreigners Act) की धारा 21 और 23 के तहत आरोप तय किए हैं। इसको लेकर सरकारी सूत्रों ने स्पष्टीकरण दिया:

  • डिफ़ॉल्ट बेल (Default Bail) से रोकना मुख्य मकसद: कानून के तहत हिरासत में 180 दिनों की वैधानिक अवधि (Statutory Period) पूरी होने से पहले यदि चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती, तो आरोपियों को स्वतः जमानत (डिफ़ॉल्ट बेल) पाने का कानूनी अधिकार मिल जाता। 8 सितंबर को यह 180 दिनों की समयसीमा पूरी हो रही थी।

  • इमिग्रेशन उल्लंघन के पक्के सबूत: एजेंसी के अनुसार, अवैध प्रवेश, वीजा शर्तों के उल्लंघन और संरक्षित क्षेत्र (Protected Area) मिजोरम में अवैध आवाजाही के आरोप जांच में पूरी तरह साबित हो चुके थे। इसलिए आरोपियों को जेल में बनाए रखने के लिए इस हिस्से की चार्जशीट तुरंत दायर की गई।

  • UAPA की जांच अभी भी जारी: एनआईए के विशेष लोक अभियोजक (SPP) ने अदालत को बताया कि यूएपीए के तहत आतंकी साजिश की जांच समाप्त नहीं हुई है। जांच खुली रखी गई है और पर्याप्त फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद सप्लीमेंट्री (पूरक) चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

डिजिटल उपकरणों और ड्रोन रिकवरी की फॉरेंसिक जांच बाकी

एनआईए ने अपनी चार्जशीट में अदालत को अवगत कराया है कि आरोपियों से जब्त किए गए साक्ष्यों की व्यापक जांच अभी प्रक्रियाधीन है:

  • भारी मात्रा में ड्रोन और पुर्जे: आरोपियों के नेटवर्क से बड़ी संख्या में ड्रोन, जैमिंग उपकरण और युद्ध सामग्री के पार्ट्स बरामद हुए हैं, जिन्हें यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमार ले जाया गया था।

  • डिजिटल डिवाइसेज की स्क्रूटनी: आरोपियों के पास से बरामद लैपटॉप, सैटेलाइट कम्युनिकेशन उपकरण और मोबाइल फोन के डेटा का विश्लेषण सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) में चल रहा है।

  • एजेंसी का मानना है कि यह जांच भारत की संप्रभुता, अखंडता और पूर्वोत्तर के आतंकी गुटों से उनके सीधे कनेक्शन को पुख्ता करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसके लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।

कौन है मैथ्यू वैन डाइक और क्या है पूरा मामला?

मैथ्यू एरॉन वैन डाइक अमेरिका की नॉन-प्रॉफिट प्राइवेट मिलिट्री व सिक्योरिटी फर्म 'सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल' (SOLI) का संस्थापक है। वह पूर्व में लीबिया और सीरियाई गृहयुद्ध में भी सक्रिय लड़ाके के रूप में शामिल रहा है।

  • मार्च में हुई थी गिरफ्तारी: वैन डाइक को 13 मार्च को कोलकाता हवाई अड्डे से पकड़ा गया था, जबकि उसके छह यूक्रेनी साथियों को दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से दबोचा गया था।

  • आरोप: ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए और बिना परमिट के मिजोरम सीमा पार कर म्यांमार के 'विक्टोरिया कैंप' पहुंचे, जहां इन्होंने विद्रोही गुटों को आधुनिक ड्रोन वॉरफेयर और असेंबलिंग का प्रशिक्षण दिया।

विपक्ष के सवाल और कानूनी प्रक्रिया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी सहित कई विपक्षी नेताओं ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि इतने गंभीर टेरर आरोपों में गिरफ्तार विदेशी नागरिक पर से यूएपीए की धाराएं अचानक चार्जशीट में कैसे गायब हो गईं।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने जहां इसे पूरी तरह अदालती व कानूनी प्रक्रिया बताते हुए टिप्पणी से परहेज किया, वहीं जांच एजेंसी के आधिकारिक सूत्रों ने साफ कर दिया है कि किसी भी आरोपी को राहत नहीं दी गई है और न ही आतंकवाद की धाराएं बंद की गई हैं। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर की तारीख तय की है।