'राम का विरोध करने वाले अब शिवजी की बात कर रहे, ये हुड़दंगियों की जमात'; राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर शिवराज सिंह चौहान का तीखा प्रहार
राजधानी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर चल रहे घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी के उस बयान पर जोरदार पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने विपक्ष के प्रदर्शन और मार्च की तुलना 'शिवजी की बारात' से की थी। बीजेपी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि जो लोग कल तक भगवान श्रीराम के अस्तित्व और मंदिर का विरोध करते रहे, वे आज राजनीतिक फायदे के लिए भगवान शिव की बात कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष के इस मार्च को 'हुड़दंगियों की जमात' और सड़कों पर अराजकता फैलाने वाला 'गुंडों का समूह' करार दिया।
'शिवजी की बारात' वाली टिप्पणी पर शिवराज का कड़ा एतराज
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा विपक्षी मार्च को 'शिवजी की बारात' कहना न सिर्फ हास्यास्पद है, बल्कि धार्मिक आस्था का राजनीतिक दुरुपयोग भी है। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि क्या भगवान शिव के नाम पर अराजकता और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने की इजाजत दी जा सकती है? चौहान ने कहा कि यह कोई भक्ति या जन-आंदोलन नहीं है, बल्कि सड़कों पर उपद्रव मचाने और जनता को परेशान करने की सुनियोजित कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उनके सहयोगी दल जब भी सत्ता से बाहर होते हैं या चुनाव हारते हैं, तो वे लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करने के बजाय सड़कों पर हंगामे की राजनीति करने लगते हैं।
सीजेआई से मिलने के ड्रामे को बताया विशुद्ध नौटंकी
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलने के विपक्षी प्रयास पर निशाना साधते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश से मिलने की एक तयशुदा कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि आप बस एक पत्र लिखकर जब चाहें तब सीजेआई से नहीं मिल सकते। चौहान के मुताबिक, विपक्ष का यह पूरा मार्च और सुप्रीम कोर्ट के बाहर जमावड़ा केवल एक 'राजनीतिक नौटंकी' है, जिसका मकसद खबरों में बने रहना और अदालतों पर दबाव बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेआई सूर्यकांत ने पहले ही विपक्षी नेताओं को न्यायिक याचिका दाखिल करने का सुझाव देकर यह साबित कर दिया है कि संवैधानिक संस्थाएं राजनीतिक दबाव में काम नहीं करतीं।
चुनावी हार के लिए संस्थाओं को दोष देने का लगाया आरोप
चौहान ने आगे कहा कि कांग्रेस पूरी तरह से नेतृत्व-विहीन और 'विचार-शून्य' हो चुकी है। जब भी चुनाव परिणाम विपक्ष के खिलाफ आते हैं, वे अपनी कमियों और जनता के नकारे जाने का आत्ममंथन करने के बजाय कभी चुनाव आयोग, कभी ईवीएम और कभी अदालतों को कटघरे में खड़ा करने लगते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस देश के कई राज्यों से पूरी तरह गायब हो चुकी है और अब वह अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन खोकर केवल क्षेत्रीय दलों की बैसाखी पर टिकी एक 'परजीवी पार्टी' बनकर रह गई है। उन्होंने बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस अब अन्य दलों के पीछे चलने वाली एक जूनियर पार्टनर मात्र है।
राष्ट्रीय राजधानी में दोनों पक्षों के बीच आर-पार की जंग
केंद्रीय मंत्री के इस तीखे बयान ने साफ कर दिया है कि सत्ता पक्ष विपक्ष के सड़क पर उतरने के दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं है। जहां एक ओर राहुल गांधी और 'इंडिया' गठबंधन के नेता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर लगातार मार्च और प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं बीजेपी ने इसे जनादेश का अपमान और व्यवस्था को बंधक बनाने की साजिश करार दिया है। धार्मिक प्रतीकों को लेकर शुरू हुआ यह नया जुबानी वार आने वाले दिनों में और तेज होने के पूरे आसार हैं।