विजय थलपति की लक्जरी या CM की जरूरत? 6.17 करोड़ के नए ऑफिस पर भाजपा ने खोला मोर्चा, नैनार नागेंद्रन बोले- 'विधानसभा सिनेमा स्टूडियो नहीं'

विजय थलपति की लक्जरी या CM की जरूरत? 6.17 करोड़ के नए ऑफिस पर भाजपा ने खोला मोर्चा, नैनार नागेंद्रन बोले- 'विधानसभा सिनेमा स्टूडियो नहीं'

तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की सरकार बनने के कुछ ही महीनों के भीतर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय विपक्षी दलों के कड़े निशाने पर आ गए हैं। अपनी शानदार और लक्जरी लाइफस्टाइल के लिए पहचाने जाने वाले थलपति विजय पर अब सरकारी खजाने और जनता के टैक्स के पैसे को निजी ऐशोआराम पर लुटाने के आरोप लग रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री नैनार नागेंद्रन ने सूचना का अधिकार (RTI) से मिले आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए खुलासा किया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को 'नमक्कल कविग्नार मलिगई' (Namakkal Kavignar Maaligai) की 10वीं मंजिल पर शिफ्ट करने और उससे जुड़े रेनोवेशन कार्यों के लिए राज्य सरकार ने 6.17 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि आवंटित की है। इस खुलासे के बाद राज्य की राजनीति में यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह मुख्यमंत्री की प्रशासनिक आवश्यकता है या फिर महज एक फिल्मी सितारे की लक्जरी।

1,200 करोड़ का नया सचिवालय तो फिर 6 करोड़ का अस्थायी दफ्तर क्यों?

तमिलनाडु भाजपा प्रमुख नैनार नागेंद्रन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दस्तावेज साझा करते हुए सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर कड़े सवाल दागे हैं:

  • अस्थायी दफ्तर पर करोड़ों की बर्बादी: नागेंद्रन ने पूछा कि जब टीवीके सरकार पहले ही 1,200 करोड़ रुपये की लागत से एक नया भव्य सचिवालय परिसर बनाने का औपचारिक ऐलान कर चुकी है, तो फिर पुराने सचिवालय से हटाकर अस्थायी रूप से कार्यालय शिफ्ट करने में 6.17 करोड़ रुपये फूंकने का क्या औचित्य है?

  • फोर्ट सेंट जॉर्ज में क्या कमी थी: ऐतिहासिक 'सचिवालय फोर्ट' (Fort St. George) में पहले से ही मुख्यमंत्री और पूरे प्रशासनिक अमले के लिए सभी आधुनिक और पर्याप्त सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में व्यक्तिगत पसंद और विलासिता के लिए जनता के टैक्स का पैसा बहाना पूरी तरह अनुचित है।

  • किसानों की बदहाली का हवाला: भाजपा नेता ने राज्य के किसानों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ सरकारी गोदामों की कमी के कारण किसानों का उगाया हुआ धान खुले आसमान के नीचे बारिश में भीगकर सड़ रहा है, और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अपनी सहूलियत के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं। नागेंद्रन ने तंज कसते हुए कहा, "बदलाव मुख्यमंत्री कार्यालय की दीवारों पर नहीं, बल्कि राज्य की जनता के जीवन में दिखना चाहिए।"

आरटीआई खुलासे से सामने आई हकीकत

लोक निर्माण (भवन) विभाग द्वारा 23 अगस्त को दायर एक आरटीआई आवेदन के जवाब में यह आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक हुई है। विभाग के जन सूचना अधिकारी (PIO) और कार्यपालक अभियंता ने लिखित रूप में पुष्टि की कि मुख्यमंत्री कार्यालय को नमक्कल कविग्नार मलिगई की 10वीं मंजिल पर स्थानांतरित करने और संबंधित इंटीरियर व सिविल कार्यों के लिए 6.17 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है।

भाजपा ने इस सरकारी जवाब को आधार बनाते हुए कहा कि 'नई राजनीति और व्यवस्था परिवर्तन' का नारा देकर सत्ता हासिल करने वाले विजय का असली राजनीतिक रंग चंद महीनों में ही फीका पड़ गया है।

'विधानसभा कोई सिनेमा स्टूडियो नहीं': कानून-व्यवस्था पर भी घेरा

नैनार नागेंद्रन ने केवल दफ्तर के खर्च पर ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री विजय के राजनीतिक अंदाज और राज्य की लचर कानून-व्यवस्था पर भी तीखा हमला बोला:

  • डायलॉगबाजी का आरोप: नागेंद्रन ने कहा, "विधानसभा आपका कोई सिनेमा स्टूडियो नहीं है, मिस्टर विजय।" उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सदन को अपनी फिल्मों की तरह केवल भारी-भरकम डायलॉगबाजी का मंच बना रहे हैं और जमीनी समस्याओं पर जवाबदेही से बच रहे हैं।

  • अपराध और हिरासत में मौतें: भाजपा ने आरोप लगाया कि कोयंबटूर, जहां टीवीके के दो-दो कैबिनेट मंत्री हैं, वहां अकेले पिछले एक महीने में 10 हत्याएं हुईं। इसके अलावा राजधानी चेन्नई में दिनदहाड़े दोहरे हत्याकांड और विजय के कार्यकाल में हुई 6 पुलिस हिरासत में मौतों (Custodial Deaths) को लेकर भी सरकार को घेरा गया।

विधानसभा में भी गरमाया माहौल, डीएमके से भी तकरार

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु विधानसभा में भी मुख्यमंत्री विजय और मुख्य विपक्षी दल डीएमके (DMK) के बीच तीखी रार देखने को मिल रही है। हाल ही में सदन में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पुराने मामलों, नगर प्रशासन और तस्माक (TASMAC) में कथित घपलों को लेकर विजय द्वारा डीएमके पर लगाए गए आरोपों के बाद भारी हंगामा हुआ था और द्रमुक विधायकों ने वॉकआउट किया था।

अब 6.17 करोड़ के लक्जरी सीएम ऑफिस के मुद्दे ने भाजपा और अन्य विपक्षी दलों को मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ एक नया और धारदार राजनीतिक हथियार थमा दिया है। आगामी विधानसभा उपचुनावों से ठीक पहले फिजूलखर्ची के इस विवाद ने टीवीके सरकार की 'सादगी और जनसेवा' वाली छवि के सामने कड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।