'2019 में जीत पर तलाश रहे थे, 2024 में हार के बाद किसी ने नहीं खोजा': अमेठी हार पर छलका स्मृति ईरानी का दर्द, नतीजों वाले दिन को किया याद

'2019 में जीत पर तलाश रहे थे, 2024 में हार के बाद किसी ने नहीं खोजा': अमेठी हार पर छलका स्मृति ईरानी का दर्द, नतीजों वाले दिन को किया याद

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से मिली हार के बाद की मनःस्थिति और राजनीति की असलियत पर बड़ा बयान दिया है। हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान उन्होंने चुनावी हार और उसके बाद लोगों के बदले हुए रवैये को लेकर गहरा दर्द और यथार्थ बयां किया।

स्मृति ईरानी ने कहा कि चुनावी राजनीति में सफलता और विफलता के बीच का अंतर बहुत बड़ा होता है। उन्होंने 2019 की अपनी ऐतिहासिक जीत और 2024 की शिकस्त की तुलना करते हुए कहा, "फर्क सिर्फ इतना था कि 2019 में जब मैं जीती थी, तो हर कोई मुझे तलाश रहा था, लेकिन 2024 में हारने के बाद किसी ने मुझे नहीं खोजा, कोई ढूंढ नहीं रहा था।"

नतीजों वाले दिन मंदिर में कही थी बात: 'जो किया, अच्छा किया'

स्मृति ईरानी ने 4 जून 2024 को मतगणना के दिन का आंखों देखा हाल साझा करते हुए बताया कि जब रुझानों में हार स्पष्ट होने लगी, तो वे शाम करीब 6 बजे अमेठी स्थित अपने आवास के मंदिर में गईं। वहां स्थापित मां भगवती और शिव परिवार की प्रतिमा के सामने उन्होंने हाथ जोड़कर कहा—'जो भी किया, अच्छा किया'।

उन्होंने याद करते हुए बताया कि उनके साथ खड़े पार्टी कार्यकर्ता इस बात को सुनकर सन्न रह गए थे। कार्यकर्ताओं को लगा कि दीदी को शायद हार का गहरा सदमा लग गया है और वे इसी वजह से बहकी-बहकी बातें कर रही हैं। ईरानी ने कहा, "कार्यकर्ता परेशान थे, लेकिन मैंने अपने मन को शांत रखा। मैंने कहा कि जब तक आखिरी वोट की गिनती नहीं हो जाती, हम रुकेंगे। इसके बाद रात 12 बजे जब आधिकारिक नतीजे आए, तो अपने प्रतिनिधि को सर्टिफिकेट लेने भेजा।"

'अमेठी को दिए जीवन के 10 साल, इतना आसान नहीं होता भुलाना'

अमेठी में अपने एक दशक के लंबे कार्यकाल को याद करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्होंने उस क्षेत्र के लिए अपना खून-पसीना बहाया था। 2014 में हारने के बावजूद वे वहां लगातार सक्रिय रहीं और 2019 में राहुल गांधी को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।

उन्होंने कहा, "मैंने अमेठी में अपनी जिंदगी के 10 अनमोल साल दिए। गांव-गांव जाकर सड़कें, मेडिकल कॉलेज, बाईपास, नाली-खड़ंजा और ओवरब्रिज जैसी बुनियादी सुविधाएं खड़ी कीं। किसी भी नेता के लिए इतना काम करने के बाद हार स्वीकार करना और आगे बढ़ना इतना आसान नहीं होता। जब मैं दिल्ली घर लौटी तो किसी ने मुझसे पूछा कि क्या मुझे कोई झटका लगा है? मैंने कहा कि नहीं, मैंने वही किया जो 2019 में किया था, बस फर्क यह था कि जीत में लोग आसपास मंडराते हैं और हार में कोई पूछने नहीं आता।"

'मैं बेरोजगार हूं, काम दे सकते हैं?': टीवी की दुनिया में वापसी का किस्सा

राजनीति में सत्ता से बाहर होने के बाद की व्यावहारिक चुनौतियों पर बोलते हुए स्मृति ईरानी ने बताया कि हार के बाद उन्होंने खाली बैठने के बजाय काम की तलाश शुरू की। उन्होंने मीडिया दिग्गज उदय शंकर को फोन किया और बेझिझक कहा कि वे फिलहाल बेरोजगार हैं और क्या उनके लिए कोई काम है।

पूर्व कैबिनेट मंत्री के इस फोन कॉल से सामने वाले भी हैरान रह गए थे कि इतना बड़ा कद होने के बाद वे काम मांगने में कोई संकोच नहीं कर रही हैं। जब वे दोबारा टेलीविजन सेट पर लौटीं, तो वहां के लोग भी चौंक गए। स्मृति ने कहा कि यह कदम उनके लिए आत्म-मुक्ति जैसा था, क्योंकि उन्हें अपनी मेहनत से कमाने में कभी कोई झिझक नहीं रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी हुईं भावुक

इंटरव्यू के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने कार्य संबंधों पर बात करते हुए स्मृति ईरानी काफी भावुक हो गईं। उन्होंने पीएम मोदी की कार्यशैली और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने अपनी मां के देहांत और दाह संस्कार के तुरंत बाद देश के लिए वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने का काम किया, वे राजनीति में एक संस्था के समान हैं।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी उनके पिता की उम्र के हैं और उनके सम्मान पर किसी भी तरह का अनुचित हमला वे कभी बर्दाश्त नहीं कर सकतीं। स्मृति ईरानी का यह पॉडकास्ट साक्षात्कार राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें उन्होंने सत्ता, लोकप्रियता और चुनावी हार के बाद के मानवीय पहलुओं को बिना किसी लाग-लपेट के सामने रखा है।