कौन हैं देबाशीष शर्मा? 34 साल की लोकसेवा छोड़ 8 सितंबर को थामा था BJP का दामन, पार्टी ने नौगांव लोकसभा सीट से बनाया उम्मीदवार

कौन हैं देबाशीष शर्मा? 34 साल की लोकसेवा छोड़ 8 सितंबर को थामा था BJP का दामन, पार्टी ने नौगांव लोकसभा सीट से बनाया उम्मीदवार

असम की राजनीति में एक बार फिर नौकरशाही से राजनीति में आने का बड़ा दांव देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की केंद्रीय चुनाव समिति ने असम की बहुचर्चित नौगांव (Nagaon) लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा (Debasish Sharma) को आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है।

देबाशीष शर्मा ने मात्र 3 सितंबर 2026 को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली थी। इसके बाद 8 सितंबर को वे गुवाहाटी स्थित प्रदेश भाजपा मुख्यालय में राज्य अध्यक्ष दिलीप सैकिया और असम सरकार के मंत्रियों की उपस्थिति में औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हुए थे। पार्टी में शामिल होने के कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें लोकसभा का टिकट सौंपे जाने के फैसले ने राज्य के राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।

कौन हैं देबाशीष शर्मा? जानिए उनका प्रशासनिक सफर

देबाशीष शर्मा असम प्रशासनिक सेवा से पदोन्नत होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पहुंचे एक वरिष्ठ और लोकप्रिय अधिकारी रहे हैं:

  • 34 वर्षों का प्रशासनिक अनुभव: उन्होंने वर्ष 1992 में असम सिविल सेवा (ACS) से अपने करियर की शुरुआत की थी और लगभग 34 वर्षों तक विभिन्न प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन किया। बाद में उन्हें असम-मेघालय कैडर के 2011 बैच के आईएएस के रूप में पदोन्नति मिली।

  • नौगांव के जिला आयुक्त (DC): वीआरएस लेने से ठीक पहले वे नौगांव जिले के उपायुक्त/जिला आयुक्त (District Commissioner) के पद पर ही तैनात थे। इस दौरान जमीनी स्तर पर जनता, खासकर अल्पसंख्यक वर्ग के बीच उनकी सक्रिय कार्यप्रणाली और सुलभता ने उन्हें काफी लोकप्रियता दिलाई।

  • अन्य प्रमुख जिम्मेदारियां: इससे पहले वे मोरीगांव के डीसी और गुवाहाटी नगर निगम (GMC) के कमिश्नर के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

  • सामाजिक कार्य और पहचान: मुंबई स्थित असम भवन में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने टाटा मेमोरियल अस्पताल में कैंसर के इलाज के लिए जाने वाले मरीजों की मदद के लिए बड़ा अभियान चलाया था। वे कैंसर पीड़ितों के लिए काम करने वाले ट्रस्ट 'दीपशिखा' (Deepsikha) के संस्थापक और ट्रस्टी भी हैं।

क्यों खाली हुई थी नौगांव लोकसभा सीट?

नौगांव सीट पर उपचुनाव की नौबत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोरदोलोई (Pradyut Bordoloi) के इस्तीफे के चलते आई है:

  • प्रद्युत बोरदोलोई ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर नौगांव सीट से जीत हासिल की थी।

  • बाद में वे कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और असम विधानसभा चुनाव में दिसपुर सीट से विधायक चुने गए।

  • उनके विधायक बनने और लोकसभा से इस्तीफा देने के कारण यह सीट रिक्त हो गई थी।

  • चुनाव आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर 2026 को मतदान और 9 अक्टूबर 2026 को मतगणना की तारीख तय की है।

बीजेपी और हिमंता बिस्वा सरमा का बड़ा चुनावी गणित

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने नौगांव जैसी जटिल जनसांख्यिकी (Demographic Challenge) वाली सीट पर देबाशीष शर्मा को उतारकर एक नपा-तुला दांव चला है:

  • प्रशासनिक साख और धर्मनिरपेक्ष छवि: एक पारंपरिक राजनेता के मुकाबले पूर्व डीसी के तौर पर शर्मा की छवि केवल किसी एक विचारधारा से बंधी नहीं है। पूरे जिले में विभिन्न समुदायों के बीच उनका सीधा संवाद रहा है, जिसका फायदा पार्टी को अल्पसंख्यक मतों में सेंध लगाने में मिल सकता है।

  • कोर वोट बैंक को एकजुट रखना: नौगांव सीट पर भाजपा का मजबूत जनाधार पहले से रहा है (पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेन गोहेन यहां से चार बार सांसद रहे हैं)। भाजपा को अपनी कोर वोट बैंक को एकजुट रखने के साथ विपक्षी वोटों के बिखराव का लाभ उठाने के लिए एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी, जिसकी स्थानीय स्वीकार्यता हो।

देबाशीष शर्मा की उम्मीदवारी ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा उपचुनाव में किसी पुराने चेहरे के बजाय प्रशासनिक दक्षता और सामाजिक छवि वाले चेहरे पर भरोसा जताकर नौगांव की सीट अपने खाते में डालने की पूरी तैयारी कर चुकी है।