कौन हैं देबाशीष शर्मा? 4 दिन पहले BJP में हुए शामिल, नौगांव लोकसभा सीट से बन गए उम्मीदवार
असम की हाई-प्रोफाइल नौगांव (Nagaon) लोकसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक चौंकाने वाला और रणनीतिक दांव चला है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा (Debashish Sharma / Sarma) को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि शर्मा ने महज कुछ ही दिन पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली थी और 8 सितंबर को भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। पार्टी में शामिल होने के चौथे दिन ही भाजपा आलाकमान ने उन्हें लोकसभा उपचुनाव का टिकट थमाकर चुनावी मैदान में उतार दिया है।
34 साल की लोकसेवा, ACS से IAS तक का सफर
देबाशीष शर्मा असम के एक बेहद जाने-माने पूर्व नौकरशाह हैं। उन्होंने लगभग 34 वर्षों तक राज्य प्रशासन में अपनी सेवाएं दी हैं:
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शुरुआती सफर: अंग्रेजी साहित्य में स्नातक और पब्लिक रिलेशंस (PR) में पोस्ट ग्रेजुएट करने के बाद उन्होंने 1992 में असम सिविल सेवा (ACS) के जरिए अपने करियर की शुरुआत की थी। उनकी पहली पोस्टिंग बारपेटा जिले में हुई थी।
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आईएएस में पदोन्नति: प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए बाद में उन्हें प्रमोट कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 2011 बैच (असम-मेघालय कैडर) में शामिल किया गया।
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प्रमुख प्रशासनिक पद: अपने सेवाकाल के दौरान शर्मा असम के तत्कालीन राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल एस. के. सिन्हा के विशेष अधिकारी (Special Officer) रहे। उन्होंने मुंबई स्थित असम भवन के डिप्टी रेजिडेंट कमिश्नर के रूप में भी कार्य किया। इसके अलावा वे गुवाहाटी नगर निगम (GMC) के कमिश्नर और मोरीगांव के जिला आयुक्त (DC) जैसे अहम पदों पर तैनात रहे।
नौगांव के डीसी पद से लिया VRS, 8 सितंबर को ली भाजपा की सदस्यता
देबाशीष शर्मा हाल ही तक नौगांव जिले के डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर (DC) के पद पर कार्यरत थे। 3 सितंबर 2026 को उन्होंने अपने पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली। इसके ठीक पांच दिन बाद, 8 सितंबर को उन्होंने गुवाहाटी स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय (वाजपेयी भवन) में असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में औपचारिक रूप से भाजपा का दामन थाम लिया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नौगांव के डीसी के रूप में उनके स्थानीय संपर्क, जमीनी पकड़ और प्रशासनिक छवि को भुनाने के लिए भाजपा ने उन्हें सीधे टिकट देने का फैसला किया। इसके साथ ही वे कैंसर पीड़ितों की मदद करने वाली जानी-मानी संस्था 'दीपशिखा' (Deepshikha Foundation) के संस्थापक चेयरमैन और ट्रस्टी भी हैं, जिसने उन्हें राज्य भर में एक लोकप्रिय सामाजिक चेहरा बनाया है।
क्यों खाली हुई थी नौगांव लोकसभा सीट?
नौगांव सीट पर उपचुनाव की नौबत कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद आई। बोरदोलोई ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से जीत हासिल की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने पाला बदलते हुए भाजपा का दामन थाम लिया और हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में दिसपुर सीट से भाजपा विधायक चुने गए। विधानसभा सदस्य बनने के बाद उन्होंने लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण यह सीट रिक्त हुई।
6 अक्टूबर को मतदान, कांग्रेस ने निष्पक्षता पर उठाए सवाल
चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, नौगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को वोटों की गिनती की जाएगी।
दूसरी तरफ, देबाशीष शर्मा के राजनीति में प्रवेश और तुरंत टिकट मिलने पर विवाद भी शुरू हो गया है। कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन ने असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस का आरोप है कि हाल ही तक उसी जिले के डीसी रहे अधिकारी का तुरंत चुनाव लड़ना चुनाव की निष्पक्षता और तटस्थता पर सवाल खड़े करता है, इसलिए उनके हालिया प्रशासनिक फैसलों की समीक्षा होनी चाहिए। हालांकि, भाजपा नेताओं का दावा है कि शर्मा की स्वच्छ छवि और नौगांव की जनता से जुड़ाव के दम पर पार्टी इस सीट पर भारी मतों से जीत दर्ज करेगी।