अपनी मां से क्यों बोले अभिजीत दीपके- 'अब पीछे नहीं हट सकता, लोग मेरा मजाक उड़ाएंगे'
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दीपके के लिए अमेरिका से भारत लौटने और सीधे राजनीतिक व सामाजिक आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में खड़े होने का फैसला कतई आसान नहीं था। एक तरफ जहां उनके भीतर इस बात का डर था कि भारत लौटने पर उनकी निजी जिंदगी पूरी तरह बदल सकती है, वहीं दूसरी तरफ उनका परिवार उनकी सुरक्षा, संभावित गिरफ्तारी और हमलों की आशंकाओं को लेकर बुरी तरह सहमा हुआ था। अब खुद अभिजीत दीपके ने उस भावुक क्षण का खुलासा किया है जब फोन पर रोती हुई मां ने उन्हें भारत न लौटने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने अपनी मां को दो टूक जवाब देते हुए कहा था कि "अब मैं पीछे नहीं हट सकता, क्योंकि अगर ऐसा किया तो लोग मेरा मजाक उड़ाएंगे"।
फोन पर रोने लगी थीं मां: गिरफ्तारी और हमलों की सता रही थी चिंता
अभिजीत दीपके ने बताया कि जब उन्होंने अमेरिका (बोस्टन) से भारत लौटने का पक्का मन बनाया, तो उनका परिवार इस फैसले से बेहद परेशान था। फोन पर बात करते हुए उनकी मां भावुक हो गईं और फफक-फफक कर रोने लगीं।
मां को गंभीर आशंका थी कि छात्रों और युवाओं से जुड़े इस तीखे आंदोलन का चेहरा बनने के बाद सरकार और प्रशासन उनके बेटे के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है, उन्हें जेल में डाला जा सकता है या उन पर जानलेवा हमला हो सकता है। मां ने एक भावुक अपील करते हुए कहा था कि वे भारत वापस न आएं और विदेश में ही सुरक्षित रहें।
'अमेरिका में छिपा रहता तो लोग कहते धोखा दे दिया': दीपके की मजबूरी और जिम्मेदारी
मां की ममता और आंसुओं के बावजूद अभिजीत दीपके ने अपना फैसला नहीं बदला। इसके पीछे की ठोस वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर वे आंदोलन को हवा देने के बाद खुद अमेरिका के सुरक्षित कमरे में बैठे रहते, तो कॉकरोच जनता पार्टी और देश भर में सड़कों पर उतरे लाखों युवाओं को लगता कि उनके नेता ने उनके साथ विश्वासघात किया है।
दीपके ने कहा:
-
"लोग यह सोच सकते थे कि मैंने आंदोलन खड़ा तो कर दिया, लेकिन जब संघर्ष और जोखिम उठाने का वक्त आया, तो मेरे पास भारत आने की हिम्मत नहीं थी और मैं अमेरिका में ही छिपकर बैठ गया। लोग मेरा मजाक उड़ाते कि सिर्फ सोशल मीडिया पर बड़ी-बड़ी बातें कीं और मैदान छोड़कर भाग गया। मैं यह बर्दाश्त नहीं कर सकता था। इसलिए मैंने अपनी मां से साफ कहा कि अब तीर कमान से निकल चुका है, अब मैं पीछे नहीं हट सकता। मुझे हर हाल में देश लौटना ही होगा।"
'झूठ नहीं बोलूंगा, खुद भी डरा हुआ था': कई रातों तक नहीं आई थी नींद
अभिजीत दीपके ने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया कि वे कोई सुपरमैन नहीं हैं और भारत लौटने के फैसले से पहले वे खुद भीतर से बुरी तरह डरे हुए थे। उन्होंने माना कि वे झूठ नहीं बोलेंगे कि उन्हें कोई भय नहीं था।
दीपके के मुताबिक, बोस्टन में टिकट बुक कराने से पहले उन्हें कई रातों तक नींद नहीं आई थी। वे लगातार यही सोचते रहे कि भारत में कदम रखते ही उनकी पूरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाएगी। कुछ महीने पहले तक वे बोस्टन में एक सामान्य छात्र की तरह कमरे में बैठकर डॉक्यूमेंट्री देखते और लेक्चर्स अटेंड करते थे, लेकिन अब वे कैमरों, समर्थकों, पुलिस और कानूनी पचड़ों के बीच घिरे रहने वाले थे। हालांकि, डर के ऊपर उन्होंने अपने आंदोलन और छात्रों के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी को तरजीह दी।
सोशल मीडिया पोस्ट से मंत्री के इस्तीफे तक का सफर
गौरतलब है कि अभिजीत दीपके की एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ यह अभियान देखते ही देखते एक बड़े छात्र आंदोलन में तब्दील हो गया था। नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर जंतर-मंतर पर छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बाद दबाव इतना बढ़ गया था कि 25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
हाल ही में महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर अनशन कर रहे मनोज जरांगे पाटिल के मंच पर पहुंचकर भी दीपके ने खुलकर अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने साफ कर दिया है कि भले ही परिवार उनकी सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद हो, लेकिन एक बार जब उन्होंने जनता और युवाओं के हक की लड़ाई में कदम रख दिया है, तो वे किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।