'सपा के बिना रायबरेली भी जीत पाओगे या नहीं?': राजनाथ सिंह का राहुल गांधी पर तीखा कटाक्ष
लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस के आक्रामक रुख पर पलटवार करते हुए राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी की राजनीतिक जमीन पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने सीधा कटाक्ष करते हुए कहा, "क्या समाजवादी पार्टी के समर्थन के बिना कांग्रेस रायबरेली में अपनी सीट भी जीतने की क्षमता रखती है?"
रक्षा मंत्री ने कांग्रेस को जमीनी हकीकत का आईना दिखाते हुए याद दिलाया कि कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में पिछले 37 वर्षों से सत्ता से बाहर है। उन्होंने कहा कि जो पार्टी अपने दम पर एक सीट निकालने की स्थिति में नहीं है और क्षेत्रीय दलों की बैसाखियों के सहारे खड़ी है, वह देश भर में जनादेश का अपमान करने और संस्थाओं पर उंगली उठाने का काम कर रही है।
'रिजीम चेंज' की बात करने वाले पहले अपनी स्थिति का आकलन करें
राजनाथ सिंह ने विपक्षी खेमे में इस्तेमाल किए जा रहे 'रिजीम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) जैसे बयानों पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संसद और संवैधानिक प्रक्रियाओं के जरिए लड़ाई लड़ने के बजाय सड़कों पर माहौल बिगाड़ने की कोशिशें की जा रही हैं।
-
गठबंधन की निर्भरता: उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज पूरी तरह अन्य दलों के वोट बैंक और समर्थन पर आश्रित हो चुकी है। रायबरेली जैसी पारंपरिक सीट पर भी अगर सपा कार्यकर्ताओं का जमीनी सहयोग न मिले, तो कांग्रेस की स्थिति क्या होगी, यह किसी से छिपा नहीं है।
-
अराजकता फैलाने का आरोप: रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि जब जनता चुनावों में नकार देती है, तो विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं—चाहे वह चुनाव आयोग हो, न्यायपालिका हो या संसद—की विश्वसनीयता पर कीचड़ उछालने लगता है।
आपातकाल की याद दिलाते हुए संविधान की दुहाई पर घेरा
राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी द्वारा संविधान की प्रति दिखाने और लोकतंत्र खतरे में होने के दावों पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दौर का हवाला दिया:
-
उन्होंने कहा, "मैं याद दिलाना चाहता हूं कि 1975 में लोकतंत्र को सलाखों के पीछे किसने डाला था? इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र को कैद कर लिया था और नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए थे। आज राहुल गांधी जेब में संविधान रखकर घूमते हैं और व्यवस्था के खिलाफ अराजकता पैदा करने की कोशिश करते हैं।"
-
रक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के इतिहास के पन्ने लोकतांत्रिक संस्थाओं के हनन और शक्तियों के दुरुपयोग से भरे पड़े हैं, इसलिए उन्हें लोकतंत्र और शुचिता पर उपदेश देने का कोई नैतिक हक नहीं है।
चुनाव आयोग पर निष्पक्षता का सवाल उठाने वालों का पुराना रिकॉर्ड
राजनाथ सिंह ने चुनाव आयोग पर लग रहे आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस के शासनकाल के कई फैसलों को उजागर किया:
-
उन्होंने 1993 के उस घटनाक्रम का जिक्र किया जब चुनाव आयोग में अचानक फेरबदल किए गए थे।
-
उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी के उस पत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने चुनाव आयुक्त नवीन चावला को पद से हटाने की सिफारिश करते हुए संवेदनशील जानकारियां कांग्रेस के साथ साझा करने का आरोप लगाया था।
-
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज जब चुनाव आयोग पारदर्शी तकनीक, वोटर आईडी और मतदाता सूची के गहन शुद्धिकरण (SIR) पर काम कर रहा है, तो कांग्रेस को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है।
राजनाथ सिंह ने अंत में कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस को चाहिए कि वे संस्थाओं पर बेबुनियाद हमले करने और विदेशी मॉडलों की तर्ज पर अशांति की उम्मीद पालने के बजाय जनता के बीच जाएं, अपनी कमियों को पहचानें और स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करें।