7 राज्य, 271 बूथ और 6.25 लाख मतदाता: पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट की 15 सीटों के लिए मतदान शुरू, 51 दिग्गज मैदान में
पंजाब यूनिवर्सिटी (PU), चंडीगढ़ के सर्वोच्च शासी निकाय यानी सीनेट के रजिस्टर्ड ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के लिए आज मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उत्तर भारत की इस प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के सीनेट चुनाव का दायरा केवल चंडीगढ़ शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ आयोजित किया जा रहा है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में फैले कुल 271 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और प्रशासनिक इंतजामों के बीच सुबह से ही ग्रेजुएट वोटर्स अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने पहुंच रहे हैं।
इस चुनाव में कुल 6,25,784 पंजीकृत ग्रेजुएट मतदाता अपने वोट की ताकत दिखाएंगे। मतदान दो पारियों में संपन्न कराया जा रहा है। सुबह 8:00 बजे मतदान शुरू हुआ है जो शाम 5:00 बजे तक चलेगा। दोपहर 1:15 बजे से 2:00 बजे तक 45 मिनट का लंच ब्रेक निर्धारित किया गया है, जिसके बाद दूसरे सत्र का मतदान शाम 5:00 बजे तक निरंतर चलेगा। सीमाओं पर तैनात सेना के जवानों और सुरक्षा बलों के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पोस्टल बैलेट पहले ही भेजे जा चुके हैं, ताकि कोई भी मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे।
15 सीटों पर 51 प्रत्याशियों में कड़ा मुकाबला, 23 सितंबर से जिम्नेजियम हॉल में होगी मतगणना
रजिस्टर्ड ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र से सीनेट की कुल 15 सीटों के लिए इस बार कुल 51 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। सीटों के आरक्षण ढांचे के अनुसार, 15 में से 2 सीटें पंजाब राज्य के लिए आरक्षित रखी गई हैं, जबकि 1 सीट केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के लिए आरक्षित है। शेष बची 12 सीटें सामान्य (ओपन) श्रेणी की हैं, जिन पर सबसे कड़ा और रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है। चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से पूरा कराने के लिए 1500 से अधिक विश्वविद्यालय कर्मियों, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी राज्यों से मतपेटियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पंजाब यूनिवर्सिटी के चंडीगढ़ स्थित मुख्य परिसर में लाया जाएगा। वोटों की गिनती 23 सितंबर को सुबह 9:30 बजे से शुरू होगी। मतगणना के लिए पीयू कैंपस के सेक्टर-14 स्थित जिम्नेजियम हॉल को मुख्य केंद्र बनाया गया है, जहां सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और कड़ी सुरक्षा के बीच मतों की गिनती की जाएगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।
शिक्षा मंत्रालय के नोटिफिकेशन और 27 दिनों तक चले ऐतिहासिक 'पीयू बचाओ' आंदोलन की पृष्ठभूमि
इस सीनेट चुनाव का रास्ता इतनी आसानी से साफ नहीं हुआ था। इसके पीछे लंबा छात्र और शिक्षक आंदोलन जुड़ा हुआ है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को सीनेट चुनाव और यूनिवर्सिटी सुधारों को लेकर नौ दिनों के भीतर चार बार अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी करनी पड़ी थीं। शुरुआत में जब 28 अक्टूबर 2025 की अधिसूचना के जरिए सीनेट और सिंडिकेट की संरचना में बदलाव और सुधारों का प्रस्ताव रखा गया, तो पूरे परिसर में इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया था। इसके बाद चार नवंबर को दो नए नोटिफिकेशन आए और अंततः सात नवंबर को मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सीनेट और सिंडिकेट की मूल संरचना में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा।
यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपतियों, मौजूदा कुलपति, शिक्षक संघों और विभिन्न छात्र संगठनों ने इन प्रस्तावित बदलावों पर भारी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। सीनेट बहाली और उसके लोकतांत्रिक स्वरूप को बचाने के लिए कुलपति कार्यालय के बाहर 27 दिनों तक अनवरत धरना-प्रदर्शन चला था। इस आंदोलन को गति देने के लिए 'पीयू बचाओ मोर्चा' का गठन किया गया था, जिसे समर्थन देने के लिए पंजाब और हरियाणा के कई प्रमुख राजनेता, सांसद और सामाजिक कार्यकर्ता भी पहुंचे थे। भारी जनदबाव और अकादमिक हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने पुराने ढांचे को यथावत रखते हुए चुनाव कराने की हरी झंडी दी थी।
क्या है पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट और क्यों इसे कहा जाता है सर्वोच्च गवर्निंग बॉडी?
पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक और अकादमिक ढांचे में सीनेट सर्वोच्च शासी निकाय (Governing Body) की भूमिका निभाती है। विश्वविद्यालय का वार्षिक बजट पारित करने, नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को मंजूरी देने, प्रशासनिक नीतियां तैयार करने, प्रोफेसरों व स्टाफ की नियुक्तियों और छात्रों के कल्याण से जुड़े सभी नीतिगत फैसले लेने का अंतिम अधिकार इसी सीनेट के पास सुरक्षित होता है।
सीनेट में कुल 91 सदस्य होते हैं, जो इस संस्था को बेहद लोकतांत्रिक और व्यापक स्वरूप प्रदान करते हैं। इन सदस्यों में विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र (एलुम्नाई), वरिष्ठ प्रोफेसर, विभिन्न संकायों के डीन, छात्र प्रतिनिधि, केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों के मनोनीत प्रतिनिधि, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के प्रतिनिधि तथा स्वयं यूनिवर्सिटी के कुलपति शामिल होते हैं। यही कारण है कि सीनेट के 15 ग्रेजुएट निर्वाचन सीटों के चुनाव को उत्तर भारत की उच्च शिक्षा राजनीति में प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जाता है।