200 दिनों में 990 अवैध हथियार और 774 किलो हेरोइन जब्त, 1 लाख से अधिक छापों के बाद टूटी नशा तस्करों व गैंगस्टरों की कमर
पंजाब में संगठित अपराध, गैंगस्टर संस्कृति और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त करने के लिए चलाए जा रहे पंजाब पुलिस के विशेष अभियान 'गैंगस्टरां ते वार' ने अपने सफलतापूर्व 200 दिन पूरे कर लिए हैं। इस 200 दिनों की अवधि के दौरान राज्य पुलिस बल ने पूरे पंजाब में आपराधिक तत्वों, अंतरराज्यीय गैंगस्टरों और अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पंजाब पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस विशेष रणनीति और इंटेलिजेंस-बेस्ड ऑपरेशन्स के बल पर पुलिस ने न केवल गैंगस्टरों और तस्करों की रीढ़ तोड़ दी है, बल्कि राज्य में शांति और कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया है। सीमावर्ती राज्य होने के कारण पंजाब में पाकिस्तान से होने वाली ड्रोन डिलीवरी और सीमा पार हथियारों व नशीले पदार्थों की घुसपैठ को रोकना पुलिस के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है, लेकिन पिछले 200 दिनों में राज्य की विशेष टीमों, एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF), स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC) और लोकल पुलिस के संयुक्त प्रयासों से इस नेटवर्क को पूरी तरह पंगु बना दिया गया है।
1 लाख से अधिक छापेमारी और 1500 से अधिक भगोड़े गिरफ्तार: पुलिस कार्रवाई के बड़े आंकड़े
'गैंगस्टरां ते वार' अभियान के तहत पंजाब पुलिस की टीमों ने पूरे प्रदेश में दिन-रात एक करके अभूतपूर्व कार्रवाई की है। प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक, इन 200 दिनों के दौरान पुलिस ने राज्य के विभिन्न जिलों में 1,09,087 से अधिक स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इन छापेमारी अभियानों का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों, वांछित अपराधियों और गैंगस्टरों को पनाह देने वाले सहयोगियों को दबोचना था। इस दौरान पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी और कुल 1,532 घोषित अपराधियों (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर्स) को सलाखों के पीछे भेजा गया। इसके अतिरिक्त, संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल 58,212 से अधिक अपराधियों एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कदम उठाए गए हैं। पुलिस की इस आक्रामक रणनीति ने अपराधियों के हौसले पस्त कर दिए हैं और कई बड़े गैंगस्टर नेटवर्क भूमिगत होने पर मजबूर हो गए हैं।
774 किलो हेरोइन जब्त: सरहद पार से होने वाली नशा तस्करी के सिंडिकेट ध्वस्त
पंजाब को नशा मुक्त बनाने की दिशा में चलाए जा रहे इस अभियान में नशीले पदार्थों की बरामदगी के आंकड़ों ने अब तक के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बीते 200 दिनों में पंजाब पुलिस ने अलग-अलग जिलों और सीमाओं के पास की गई कार्रवाइयों में कुल 774 किलोग्राम हेरोइन जब्त की है। जब्त की गई इस हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत अरबों रुपये आंकी जा रही है। जांच अधिकारियों के अनुसार, जब्त की गई हेरोइन की अधिकांश खेप पाकिस्तान स्थित तस्करों द्वारा सतलुज नदी के रास्तों, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन तकनीक और खुफिया गुप्त मार्गों के जरिए भारत में भेजी जा रही थी। पंजाब पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और खुफिया शाखा ने नशा तस्करी के मुख्य सरगनाओं यानी 'बिग फिश' को लक्षित किया, जिससे नशीले पदार्थों की बड़ी सप्लाई चेन पूरी तरह से टूट गई है। पुलिस ने केवल ड्रग्स बरामद करने तक सीमित न रहकर एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत दर्ज मामलों में तस्करों की अवैध संपत्तियों को जब्त और ध्वस्त करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।
990 अवैध हथियार बरामद: गैंगस्टरों के हथियार सप्लाई नेटवर्क की रीढ़ टूटी
पंजाब में लक्षित हत्याओं, रंगदारी और गैंगवार की घटनाओं को रोकने के लिए अवैध हथियारों की खेप को जब्त करना पुलिस के लिए प्राथमिक रणनीति रही है। 'गैंगस्टरां ते वार' के दौरान चलाए गए तलाशी अभियानों में पुलिस टीमों ने 990 अवैध अत्याधुनिक हथियार और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। इनमें विदेशी पिस्तौलें, स्वचालित रायफलें और देश-निर्मित अवैध कट्टे शामिल हैं। जांच से खुलासा हुआ है कि ये हथियार मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अवैध हथियार निर्माताओं के साथ-साथ सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से पंजाब में सप्लाई किए जा रहे थे। हथियार सप्लाई करने वाले प्रमुख कोरियरों और मुख्य तस्करों की गिरफ्तारी से राज्य में सक्रिय विभिन्न गैंगस्टरों के बीच हथियारों के आदान-प्रदान और नई आपराधिक वारदातों की साजिशों को समय रहते नाकाम कर दिया गया है।
'युद्ध नशियां विरुद्ध' और स्थानीय खुफिया इनपुट: जानिए पंजाब पुलिस का आगे का रोडमैप
पंजाब सरकार और राज्य पुलिस महानिदेशक (DGP) के नेतृत्व में चल रहा यह अभियान 'युद्ध नशियां विरुद्ध' (War Against Drugs) की व्यापक अवधारणा से जुड़ा हुआ है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब में अपराधियों और नशा तस्करों के लिए कोई जगह नहीं है। इस अभियान की सफलता के पीछे स्थानीय स्तर पर जनता का सहयोग और 'पिंड दे पहरेदार' (गांव के रक्षक) जैसी सामुदायिक पहल की भी बड़ी भूमिका रही है, जहां ग्रामीण पुलिस को तस्करों की गुप्त जानकारी दे रहे हैं। पुलिस का लक्ष्य केवल आरोपियों को गिरफ्तार करना ही नहीं, बल्कि अदालत में मजबूत पैरवी के जरिए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाना और उनकी संपत्ति कुर्क करना है। आने वाले दिनों में पुलिस खुफिया-आधारित अभियानों को और अधिक तेज करेगी तथा सरहद पार से होने वाले ड्रोन ऑपरेशन्स पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के साथ मिलकर और सख्त निगरानी रखेगी, ताकि पंजाब को पूरी तरह से अपराध और नशा मुक्त बनाया जा सके।