पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले जालंधर नॉर्थ में बड़ा सियासी उलटफेर: 'आप' के पूर्व हलका इंचार्ज दिनेश ढल्ल और पार्षद अमित ढल्ल समर्थकों संग भाजपा में शामिल

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले जालंधर नॉर्थ में बड़ा सियासी उलटफेर: 'आप' के पूर्व हलका इंचार्ज दिनेश ढल्ल और पार्षद अमित ढल्ल समर्थकों संग भाजपा में शामिल

पंजाब के औद्योगिक और राजनीतिक केंद्र दोआबा की धरती जालंधर से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सभी राजनीतिक दलों द्वारा जमीन पर बिछाई जा रही बिसात के बीच जालंधर नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को एक तगड़ा झटका लगा है। 'आप' के कद्दावर नेता, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी और पूर्व हलका इंचार्ज दिनेश ढल्ल (काली) ने अपने भाई व लगातार तीन बार से पार्षद अमित ढल्ल सहित दर्जनों प्रमुख समर्थकों के साथ आम आदमी पार्टी को अलविदा कहकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। स्थानीय होटल में आयोजित एक भव्य राजनीतिक समागम के दौरान पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, पूर्व कैबिनेट मंत्री मनोरंजन कालिया, जिला अध्यक्ष अशोक सरीन हिक्की, प्रदेश महासचिव अनिल सरीन, पूर्व विधायक के.डी. भंडारी और पूर्व विधायक शीतल अंगुराल की मौजूदगी में ढल्ल बंधुओं को विधिवत रूप से पार्टी का केसरिया पटका पहनाकर भाजपा में शामिल कराया गया।

ढल्ल बंधुओं के इस पाला बदलने को जालंधर शहर ही नहीं, बल्कि पूरे दोआबा अंचल के राजनीतिक समीकरणों को बदलने वाला एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। जालंधर नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र में दिनेश ढल्ल का अपना एक गहरा व्यक्तिगत जनाधार है, विशेष रूप से युवाओं, स्थानीय व्यापारिक वर्ग और सामाजिक संगठनों में उनकी मजबूत पैठ मानी जाती है। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के भीतर जहां संगठनात्मक असमंजस पैदा कर दिया है, वहीं विपक्षी खेमे में हलचल तेज कर दी है। नगर निगम चुनावों और भविष्य के विधानसभा दंगल से ठीक पहले हुए इस फेरबदल से यह साफ हो गया है कि पंजाब में भाजपा अब पारंपरिक शहरी सीटों पर आक्रामक रुख अपनाते हुए दूसरे दलों के जनाधार वाले नेताओं को अपने पाले में खींचने की पुख्ता रणनीति पर काम कर रही है।

जालंधर नॉर्थ की सियासत में बड़ा धमाका: हलका इंचार्ज पद से हटाए जाने के बाद दिनेश ढल्ल ने थामा कमल

जालंधर नॉर्थ के राजनीतिक गलियारों में दिनेश ढल्ल के भाजपा में जाने की अटकलें पिछले कुछ सप्ताह से लगातार लगाई जा रही थीं। दरअसल, इस बगावत की पटकथा उसी दिन लिख दी गई थी जब आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अचानक एक संगठनात्मक फैसला लेते हुए दिनेश ढल्ल को जालंधर नॉर्थ के हलका इंचार्ज पद से हटा दिया था। 29 जुलाई को पार्टी आलाकमान ने जालंधर के मौजूदा मेयर वनीत धीर को नॉर्थ हलके की कमान सौंप दी थी। इस फैसले के बाद से ही दिनेश ढल्ल और उनका पूरा खेमा खुद को उपेक्षित और अपमानित महसूस कर रहा था।

दिनेश ढल्ल पिछले करीब साढ़े चार वर्षों से जालंधर नॉर्थ क्षेत्र में लगातार सक्रिय थे और उन्होंने इलाके में विकास कार्यों को गति देने के लिए जमीनी स्तर पर दिन-रात काम किया था। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जब आम आदमी पार्टी ने उन्हें नॉर्थ हलके से अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था, तब उन्होंने पूरे दम-खम के साथ चुनाव लड़ा था। हालांकि वे कड़े मुकाबले में जीत हासिल नहीं कर सके थे, लेकिन उन्होंने क्षेत्र में पार्टी के संगठन को शून्य से शिखर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। हलका इंचार्ज के पद से अचानक बेदखल किए जाने के बाद से ही उनके समर्थक पार्टी के इस फैसले का विरोध कर रहे थे। बुधवार को ढल्ल ने भाजपा में शामिल होकर उन तमाम कयासों पर पूर्ण विराम लगा दिया और अपने राजनीतिक जीवन की नई पारी की औपचारिक शुरुआत कर दी।

वार्ड नंबर 24 के पार्षद अमित ढल्ल भी भाजपा में शामिल: नगर निगम में 'आप' का घटा संख्याबल

इस बड़े सियासी फेरबदल का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पहलू दिनेश ढल्ल के भाई अमित ढल्ल का भाजपा में जाना है। अमित ढल्ल जालंधर नगर निगम की राजनीति में एक बेहद मजबूत और विश्वसनीय चेहरा माने जाते हैं। वे जालंधर नॉर्थ के वार्ड नंबर 24 से लगातार तीन बार से पार्षद चुने जाते रहे हैं। स्थानीय जनता के बीच उनकी उपलब्धता, वार्ड में करवाए गए विकास कार्य और विनम्र स्वभाव के चलते उनकी जीत का अंतर हर चुनाव में बढ़ता रहा है।

अमित ढल्ल के आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने से जालंधर नगर निगम के भीतर 'आप' को सीधा संख्याबल का नुकसान उठाना पड़ा है। नगर निगम में अब आम आदमी पार्टी के पार्षदों की संख्या में एक की कमी आ गई है, जबकि भाजपा को वार्ड 24 के रूप में एक मजबूत और सुरक्षित किला हासिल हो गया है। अमित ढल्ल के साथ उनके वार्ड के कई वरिष्ठ कार्यकर्ता, ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी और महिला विंग की सक्रिय कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल हो गए हैं। स्थानीय राजनीतिक पंडितों का मानना है कि वार्ड 24 के साथ-साथ आसपास के कम से कम चार अन्य वार्डों में भी ढल्ल परिवार का सीधा प्रभाव है, जिसका सीधा नुकसान भविष्य में आम आदमी पार्टी को निकाय और विधानसभा स्तर पर झेलना पड़ सकता है।

क्यों बिगड़े आम आदमी पार्टी से रिश्ते? मेयर वनीत धीर को कमान सौंपने से भड़की थी बगावत की चिंगारी

आम आदमी पार्टी और दिनेश ढल्ल के बीच पनपे इस गतिरोध की जड़ें स्थानीय सत्ता संघर्ष से जुड़ी हुई हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जालंधर नॉर्थ में दो सत्ता केंद्र बन चुके थे—एक तरफ हलका इंचार्ज के तौर पर दिनेश ढल्ल का खेमा था, तो दूसरी तरफ जालंधर नगर निगम के मेयर वनीत धीर का प्रभाव बढ़ रहा था। मेयर बनने के बाद वनीत धीर ने नॉर्थ क्षेत्र के विकास कार्यों और प्रशासनिक नियुक्तियों में अपना दखल बढ़ा दिया था, जिसे लेकर दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच कई मौकों पर तनातनी देखने को मिली।

आलाकमान ने जब संतुलन साधने के बजाय दिनेश ढल्ल से हलका इंचार्ज की कुर्सी छीनकर सीधे मेयर वनीत धीर की झोली में डाल दी, तो ढल्ल खेमे में यह संदेश गया कि पार्टी अब उनकी निष्ठा और पुराने संघर्ष को नजरअंदाज कर रही है। दिनेश ढल्ल ने अपने निष्कासन या पदमुक्ति के बाद भी सार्वजनिक तौर पर यह बात बार-बार दोहराई थी कि उन्होंने जालंधर नॉर्थ की जनता के लिए बिना किसी स्वार्थ के विकास कार्य करवाए हैं। जब संगठन के भीतर संवाद के सभी दरवाजे बंद नजर आए, तो ढल्ल बंधुओं ने अपने समर्थकों के साथ गोपनीय बैठकें शुरू कीं और अंततः अपने राजनीतिक वजूद को बचाने के लिए भाजपा का रुख करना ही सबसे मुफीद समझा।

कांग्रेस वापसी के रास्ते थे बंद: बावा हेनरी से पुरानी अदावत ने ढल्ल बंधुओं को दिखाया भाजपा का रास्ता

दिनेश ढल्ल के राजनीतिक अतीत पर नजर डालें तो वे मूल रूप से कांग्रेस पार्टी की पृष्ठभूमि से आते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक निगम पार्षद के तौर पर की थी और लंबे समय तक कांग्रेस के सक्रिय नेता रहे। लेकिन कांग्रेस में रहते हुए भी उनकी कभी भी पंजाब सरकार के पूर्व कद्दावर मंत्री अवतार हेनरी और उनके बेटे व वर्तमान कांग्रेस विधायक बावा हेनरी (अवतार सिंह जूनियर) के साथ पटरी नहीं बैठी।

वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस ने जालंधर नॉर्थ से अवतार हेनरी परिवार को टिकट दिया था, तो दिनेश ढल्ल ने पार्टी से बगावत करते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोक दी थी। इसके बाद भी वे लगातार नॉर्थ सीट से अपनी दावेदारी पेश करते रहे। हेनरी परिवार के साथ उनकी राजनीतिक और व्यक्तिगत अदावत इतनी गहरी रही है कि उनके लिए कांग्रेस में वापसी की कोई गुंजाइश नहीं बची थी। शिरोमणि अकाली दल का शहरी इलाकों में कमजोर जनाधार और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ढल्ल बंधुओं के सामने केवल भाजपा ही एक ऐसा विकल्प थी जो उन्हें सम्मानजनक स्थान और आने वाले समय में विधानसभा स्तर का बड़ा मंच दे सकती थी।

2022 के विधानसभा चुनाव में दिखाया था दम: युवाओं और व्यापारियों में मजबूत पकड़ का भाजपा को मिलेगा सीधा फायदा

वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में जालंधर नॉर्थ सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला था। उस चुनाव में कांग्रेस के बावा हेनरी ने जीत दर्ज की थी, लेकिन दिनेश ढल्ल ने आम आदमी पार्टी के टिकट पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए हजारों मत हासिल किए थे और दूसरे नंबर पर रहे थे। उस चुनाव में भाजपा के पूर्व विधायक के.डी. भंडारी तीसरे स्थान पर खिसक गए थे।

अब राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। भाजपा के पूर्व विधायक के.डी. भंडारी की उपस्थिति में ही दिनेश ढल्ल ने पार्टी की सदस्यता ली है। यदि के.डी. भंडारी का पारंपरिक कैडर वोट बैंक और दिनेश ढल्ल का व्यक्तिगत युवा समर्थक वर्ग एक साथ आ जाता है, तो जालंधर नॉर्थ में भाजपा का संयुक्त वोट शेयर कांग्रेस और आप दोनों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होगा। ढल्ल बंधुओं का जालंधर के ऑटोमोबाइल मार्केट, लोहा कारोबारियों, स्पोर्ट्स गुड्स निर्माताओं और छोटे दुकानदारों के बीच गहरा जुड़ाव है। यह वर्ग हमेशा से भाजपा की विचारधारा के करीब रहा है, ऐसे में ढल्ल बंधुओं की एंट्री से भाजपा का यह आधार और अधिक सुदृढ़ हो गया है।

2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का 'मिशन 117': दोआबा में शक्ति संतुलन बदलने की बड़ी रणनीति

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी दल के साथ बैसाखियों के सहारे नहीं चलेगी, बल्कि सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले और अपनी पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी। पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष और प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की अगुवाई में पार्टी पूरे राज्य में एक आक्रामक विस्तार योजना चला रही है।

पंजाब के तीन प्रमुख भौगोलिक अंचलों—माझा, मालवा और दोआबा—में से दोआबा को राज्य की राजनीतिक धुरी माना जाता है। जालंधर दोआबा का हृदय स्थल है। यहां की नौ विधानसभा सीटों में से शहरी सीटों पर भाजपा का ऐतिहासिक रूप से मजबूत प्रभाव रहा है। ढल्ल बंधुओं को पार्टी में लाकर भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक सरीन हिक्की ने एक बड़ा संगठनात्मक दांव चला है। इस फैसले से भाजपा ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह केवल कार्यकर्ताओं के भरोसे नहीं बैठेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर चुनाव जीतने की क्षमता रखने वाले जिताऊ चेहरों को अपने साथ जोड़कर 2027 के महासमर के लिए जालंधर को अपना सबसे मजबूत गढ़ बनाएगी। आने वाले दिनों में जालंधर नॉर्थ की राजनीति किस करवट बैठेगी, इस पर पूरे पंजाब के सियासी विश्लेषकों की पैनी नजरें टिकी हुई हैं।