चंडीगढ़ कोर्ट का बड़ा फैसला, मजीठिया, खैरा और पूर्व जज को अंतरिम रोक के साथ चेतावनी
पंजाब की सियासत में भूचाल लाने वाले कथित 5 करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोपों पर चंडीगढ़ जिला अदालत ने बुधवार को एक बेहद अहम और निर्णायक आदेश पारित किया है। अदालत ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर की ओर से दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए विपक्षी नेताओं और पूर्व जज पर किसी भी प्रकार की असत्यापित व मानहानिकारक सामग्री पोस्ट करने या प्रसारित करने पर अंतरिम रोक (Interim Injunction) लगा दी है। अदालत ने शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया, कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस रंजीत सिंह को सख्त चेतावनी देते हुए नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी व्यक्ति की सार्वजनिक प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
क्या है पूरा मामला और क्या थे आरोप?
विवाद की शुरुआत पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजीत सिंह द्वारा एक निजी समाचार कार्यक्रम में लगाए गए आरोपों से हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि एक रेप केस को रफा-दफा करने और एक कारोबारी के खिलाफ केस रद्द कराने के बदले मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर ने कथित तौर पर 5 करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
इसके बाद कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा और अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लपक लिया। मजीठिया ने 1 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री के इस्तीफे और सीबीआई जांच की मांग की, जबकि सुखपाल खैरा ने सोशल मीडिया पर वीडियो, तस्वीरें और विवादित टिप्पणियां पोस्ट कर इसे राजनीतिक तूल दे दिया। इसके बाद एक शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक भी पहुंचाई गई थी।
डॉ. गुरप्रीत कौर ने भेजा था लीगल नोटिस, फिर पहुंचीं अदालत
विपक्षी नेताओं के आक्रामक रुख के बाद डॉ. गुरप्रीत कौर ने कानूनी कदम उठाते हुए मजीठिया, खैरा और पूर्व जज को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजकर 24 घंटे के भीतर बिना शर्त माफी मांगने और सामग्री हटाने को कहा था। जब नेताओं ने अपने बयान वापस लेने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने चंडीगढ़ की जिला अदालत में मानहानि का वाद (Suit for Defamation & Injunction) दाखिल किया।
याचिका में कहा गया कि वे एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती हैं और राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री की पत्नी हैं। बिना किसी पुख्ता सबूत या जांच के केवल राजनीतिक दुर्भावना के चलते उनकी छवि को सोशल मीडिया पर लाखों लोगों के सामने धूमिल किया जा रहा है।
सिमरनजीत हुंदल के वीडियो का कोर्ट में हवाला: प्रथम दृष्टया झूठे दिखे आरोप
चंडीगढ़ कोर्ट के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) डॉ. परीक्षित की अदालत में सुनवाई के दौरान एक अहम मोड़ आया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जिस सिमरनजीत हुंदल के जरिए पैसे मांगने की बात कही जा रही थी, उसने खुद 31 अगस्त को एक इंस्टाग्राम वीडियो जारी कर साफ किया था कि उसका सीएम की पत्नी से कोई संपर्क नहीं है और न ही उन्होंने कोई पैसा मांगा है।
अदालत ने सभी साक्ष्यों—न्यूज क्लिप, फेसबुक पोस्ट और प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो—का अवलोकन करने के बाद पाया कि प्रतिवादियों (मजीठिया, खैरा व अन्य) द्वारा प्रसारित की गई सामग्री प्रथम दृष्टया पूरी तरह से असत्यापित (Unverified) है। अदालत ने कहा कि जब तक ठोस साक्ष्य न हों, तब तक ऐसी सामग्री चलाना न्यायसंगत नहीं है।
चंडीगढ़ अदालत का सख्त निर्देश: 'प्रतिष्ठा का अधिकार मौलिक है'
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा:
-
असत्यापित पोस्ट पर तत्काल रोक: प्रतिवादी (बिक्रम सिंह मजीठिया, सुखपाल सिंह खैरा और जस्टिस रंजीत सिंह) अदालत के अगले आदेश तक सोशल मीडिया, टीवी चैनलों, प्रेस कॉन्फ्रेंस या किसी भी अन्य माध्यम से डॉ. गुरप्रीत कौर के खिलाफ कथित 5 करोड़ की रिश्वत मांग से जुड़ी कोई भी असत्यापित या मानहानिकारक सामग्री न तो पोस्ट करेंगे और न ही प्रसारित करेंगे।
-
प्रतिष्ठा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में संतुलन: कोर्ट ने टिप्पणी की कि हर नागरिक की प्रतिष्ठा उसकी व्यक्तिगत गरिमा का अभिन्न हिस्सा है। यदि अभी इस असत्यापित अभियान पर रोक नहीं लगाई गई, तो याचिकाकर्ता की छवि को ऐसी क्षति पहुंचेगी जिसकी भरपाई बाद में नहीं की जा सकेगी।
-
पुरानी पोस्ट हटाने पर नोटिस: हालांकि, सोशल मीडिया पर पहले से अपलोड वीडियो और पोस्ट को तुरंत हटाने (टेकडाउन) की मांग पर कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादियों का विस्तृत पक्ष सुनने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। इसके लिए सभी पक्षों को औपचारिक नोटिस जारी किया गया है।
30 सितंबर को होगी अगली सुनवाई, पंजाब की राजनीति में आया नया मोड़
चंडीगढ़ जिला अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 30 सितंबर 2026 तय की है। कोर्ट के इस अंतरिम आदेश को आम आदमी पार्टी और सीएम भगवंत मान के परिवार के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है। 'आप' नेताओं का कहना है कि विपक्ष के झूठे प्रोपेगैंडा और साजिश की हवा अब अदालत के आदेश से निकल चुकी है। वहीं, कानूनी जानकारों का मानना है कि कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब मजीठिया और खैरा के लिए सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाना भारी अवमानना (Contempt of Court) का कारण बन सकता है।