कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल बोले- हक के लिए जाएंगे अदालत, 109 ब्लॉकों में सुधरा भूजल

कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल बोले- हक के लिए जाएंगे अदालत, 109 ब्लॉकों में सुधरा भूजल

पंजाब और राजस्थान के बीच अंतरराज्यीय जल बंटवारे और वित्तीय देनदारियों को लेकर छिड़ा विवाद अब कानूनी लड़ाई के मुहाने पर पहुंच गया है। पंजाब के जल संसाधन एवं खनन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने राजस्थान सरकार को कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि पंजाब अपने वैध जल बकाए के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगा। यदि राजस्थान ने पंजाब के हक का भुगतान नहीं किया, तो मान सरकार अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय (अदालत) का दरवाजा खटखटाने से भी नहीं हिचकिचाएगी।

अमृतसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कैबिनेट मंत्री ने राज्य के जल प्रबंधन, नहरी ढांचे और भूजल स्तर को लेकर कई महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि जहां एक तरफ पंजाब अपने वित्तीय और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए कानूनी कदम उठाने को तैयार है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में किए गए नहरी विस्तार के चलते राज्य के 109 ब्लॉकों में भूजल स्तर में ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने उन दावों और भविष्यवाणियों को भी पूरी तरह तथ्यहीन करार दिया जिनमें कहा जा रहा था कि वर्ष 2037 तक पंजाब रेगिस्तान में तब्दील हो जाएगा।

राजस्थान पर ₹1.44 लाख करोड़ का बकाया: जानिए 1920 के समझौते से लेकर वर्तमान विवाद की पूरी पृष्ठभूमि

पंजाब सरकार का दावा है कि राजस्थान दशकों से पंजाब के नहरी तंत्र से पानी ले रहा है, लेकिन उसने लंबे समय से इसके रखरखाव और रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया है। इस पूरे विवाद की जड़ें आजादी से पहले के समझौतों से जुड़ी हैं।

  • 1920 का ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता: अविभाजित पंजाब, बीकानेर की तत्कालीन रियासत और ब्रिटिश हुकूमत के बीच 1920 के दशक में हुए समझौते के तहत बीकानेर को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने पर प्रति एकड़ शुल्क तय हुआ था।

  • 1960 के बाद बंद हुआ भुगतान: वर्ष 1960-61 तक राजस्थान इस पानी के बदले पंजाब को निर्धारित शुल्क और रॉयल्टी देता रहा। हालांकि, इसके बाद की सरकारों के ढुलमुल रवैये के चलते राजस्थान की तरफ से भुगतान रुक गया, जबकि वह फिरोजपुर फीडर और अन्य नहरी माध्यमों से लगभग 18,000 क्यूसेक पानी लगातार लेता रहा।

  • ₹1.44 लाख करोड़ की वैधानिक मांग: पंजाब सरकार के अनुसार पिछले छह दशकों से अधिक समय का यह बकाया बढ़कर लगभग ₹1.44 लाख करोड़ हो चुका है। कैबिनेट मंत्री गोयल ने साफ कहा कि राजस्थान को या तो पंजाब के इस वैध बकाए को तुरंत जारी करना चाहिए या फिर पानी के उपयोग पर नए सिरे से समीक्षा करनी चाहिए। पंजाब अपने किसानों और जनता के हक का एक भी पैसा नहीं छोड़ेगा।

109 ब्लॉकों में सुधरा भूजल स्तर: '2037 में पंजाब बनेगा रेगिस्तान' का दावा पूरी तरह खारिज

पंजाब में पिछले कई वर्षों से भूजल के अंधाधुंध दोहन को लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंताएं जताई जा रही थीं। कई अध्ययनों में यह डरावनी आशंका जताई गई थी कि यदि यही गति रही, तो वर्ष 2037 तक पंजाब का बड़ा हिस्सा बंजर रेगिस्तान बन जाएगा।

जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार के ठोस प्रयासों से यह तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के नवीनतम आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पंजाब के 109 संवेदनशील ब्लॉकों में भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि और स्थिरता दर्ज की गई है।

भूजल में सुधार का मुख्य कारण यह रहा है कि धान की रोपाई और सामान्य फसलों की सिंचाई के लिए किसानों की ट्यूबवेल और सबमर्सिबल पंपों पर निर्भरता काफी कम हुई है। जब किसानों को खेतों तक पर्याप्त और समय पर नहरी पानी मिलने लगा, तो उन्होंने भूजल खींचना बंद कर दिया, जिससे धरती की कोख में पानी का प्राकृतिक पुनर्भरण (Recharge) तेजी से हुआ।

26% से 80% तक पहुंचा नहरी पानी का दायरा: मान सरकार के नहरी क्रांति के बड़े आंकड़े

पंजाब में नहरी ढांचे के पुनरुद्धार को लेकर कैबिनेट मंत्री ने विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार पंजाब में नहरी पानी को अंतिम छोर (Tail-End) और रेतीले टीलों तक पहुंचाया गया है।

  • नहरी सिंचाई में तीन गुना उछाल: वर्ष 2022 में जब आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी, तब पंजाब की कुल कृषि योग्य भूमि का मात्र 26.50 प्रतिशत हिस्सा ही नहरी पानी से सिंचित होता था। वर्तमान में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत पहुंच चुका है और सरकार का लक्ष्य आगामी वर्षों में इसे 86 प्रतिशत तक ले जाने का है।

  • 1,446 गांवों तक पहली बार पहुंचा नहरी पानी: राज्य के 1,446 ऐसे दूरदराज के गांव जहां 1947 के बाद कभी नहर का पानी नहीं पहुंचा था, वहां पक्के खाले और डिस्ट्रीब्यूट्रीज बनाकर पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।

  • दशकों से बंद पड़ी 101 नहरों का पुनर्जीवन: राज्य में 30 से 40 वर्षों से सिल्ट और कबाड़ से अटी 545 किलोमीटर लंबी 101 बंद नहरों को साफ कर दोबारा शुरू किया गया। इसके साथ ही 15,500 से अधिक नालों की सफाई और 18,000 से ज्यादा जल स्रोतों का कायाकल्प किया गया है।

  • शाहपुरकंडी बांध का ऐतिहासिक तोहफा: 25 वर्षों से अधर में लटके ₹3,394 करोड़ के शाहपुरकंडी बांध प्रोजेक्ट को पूरा कर कंडी क्षेत्र के 13,000 एकड़ खेतों तक सीधा नहरी पानी पहुंचाया गया है। इससे रावी नदी का जो पानी व्यर्थ बहकर पाकिस्तान चला जाता था, उसे पूरी तरह रोककर पंजाब के खेतों में मोड़ दिया गया है।

भाखड़ा बांध पूरी तरह मजबूत और सुरक्षित: विदेशी तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट से संशय दूर

पत्रकारों द्वारा भाखड़ा बांध की संरचनात्मक सुरक्षा और मियाद को लेकर पूछे गए सवाल पर जल संसाधन मंत्री ने पंजाब और पड़ोसी राज्यों की जनता को पूरी तरह आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि भाखड़ा बांध को लेकर किसी भी नागरिक को भयभीत या चिंतित होने की तनिक भी आवश्यकता नहीं है।

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी जांच: गोयल ने जानकारी दी कि हाल ही में देश और विदेश से आए उच्चस्तरीय जल संरचना और बांध सुरक्षा विशेषज्ञों (Dam Safety Experts) की तकनीकी टीम ने भाखड़ा बांध का विस्तृत ऑडिट और निरीक्षण किया है।

  • दुनिया के सबसे मजबूत बांधों में शुमार: अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि भाखड़ा बांध की इंजीनियरिंग, कंक्रीट की मजबूती और संचालन प्रणाली विश्वस्तरीय मानकों पर खरी उतरती है। यह बांध पूरी तरह सुरक्षित और सुदृढ़ स्थिति में है।

  • माधोपुर हेडवर्क्स का आधुनिकीकरण: इसी क्रम में उन्होंने बताया कि माधोपुर हेडवर्क्स के सभी 54 गेटों को ₹50 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक और इलेक्ट्रिकली ऑपरेटेड बना दिया गया है, जिससे बाढ़ नियंत्रण और जल वितरण अधिक सटीक हो गया है।

अंतरराज्यीय जल विवाद पर पंजाब की रणनीति: केंद्र, ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की तैयारी

राजस्थान से बकाए और हरियाणा के साथ जल विवाद के मुद्दों पर पंजाब सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने संवैधानिक और अंतरराज्यीय अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। पंजाब का स्पष्ट मत है कि रिपेरियन सिद्धांतों (Riparian Principles) के अनुसार राज्य के जल स्रोतों पर पहला अधिकार पंजाब के किसानों और नागरिकों का है।

कानूनी जानकारों के अनुसार यदि राजस्थान सरकार पंजाब द्वारा भेजे गए मांग पत्रों और बैठकों के प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाती है, तो पंजाब सरकार केंद्रीय जल आयोग (CWC), अंतरराज्यीय नदी जल विवाद ट्रिब्यूनल और अंततः भारत के सर्वोच्च न्यायालय में विशेष याचिका दायर करेगी। पंजाब सरकार का तर्क है कि जब अन्य राज्य बिजली और बुनियादी ढांचे का पूरा व्यावसायिक शुल्क वसूलते हैं, तो पंजाब द्वारा दशकों से दिए जा रहे लाखों क्यूसेक पानी का रखरखाव खर्च और रॉयल्टी रोकना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं है।