मानसा में मेडिकल स्टोर पर CBI का छापा, नशीले कैप्सूल सिंडिकेट और मर्डर मिस्ट्री के खुलेंगे राज
पंजाब के बहुचर्चित एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शनिवार की सुबह एक बड़ी और आक्रामक कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी की विशेष टीम ने भारी पुलिस बल के साथ मानसा शहर के रामबाग रोड स्थित 'मानसा मेडिकल हॉल' पर अचानक छापेमारी की। शनिवार तड़के शुरू हुई इस रेड के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और मेडिकल स्टोर के आसपास भारी सुरक्षा घेरा तैयार कर दिया गया। जांच एजेंसी इस पूरे हत्याकांड को केवल आपसी रंजिश के नजरिए से नहीं, बल्कि पंजाब में फैले संगठित नशा तस्करों के नेटवर्क और मेडिकल नशे की अवैध कालाबाजारी के बड़े गठजोड़ से जोड़कर देख रही है। केंद्रीय एजेंसी का मुख्य ध्यान यह पता लगाने पर है कि क्या प्रतिबंधित दवाओं की अंधाधुंध बिक्री का विरोध करने के कारण ही परविंदर झोटा को रास्ते से हटाने की खूनी साजिश रची गई थी।
रामबाग रोड स्थित मानसा मेडिकल हॉल पर CBI का छापा: बिलिंग रिकॉर्ड्स, स्टॉक रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज खंगाले
शनिवार सुबह करीब पौने बारह बजे सीबीआई के वरिष्ठ जांच अधिकारियों का एक काफिला सीधे मानसा के व्यस्त रामबाग रोड पर पहुंचा। टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के मानसा मेडिकल हॉल को चारों तरफ से घेर लिया और अंदर मौजूद कर्मचारियों व संचालकों को बाहर जाने से रोक दिया। मौके पर मौजूद स्थानीय पुलिस के जवानों ने दुकान के बाहर सुरक्षा का कड़ा पहरा लगा दिया ताकि कोई भी बाहरी व्यक्ति जांच प्रक्रिया में बाधा न डाल सके। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई की टीम पिछले करीब आधे घंटे से अधिक समय से स्टोर के भीतर मौजूद एक-एक दस्तावेज, लेजर बुक, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, दवाओं के स्टॉक रजिस्टर और थोक खरीद-बिक्री से जुड़े बिलों की बारीकी से जांच कर रही है। इसके साथ ही पिछले कुछ महीनों के दौरान दुकान में आने-जाने वाले संदिग्ध लोगों और नकद लेन-देन के रिकॉर्ड्स को भी फॉरेंसिक एनालिसिस के लिए सुरक्षित किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील किए गए सभी मेडिकल स्टोर्स आएंगे CBI के रडार पर: लाइसेंस रद्दीकरण की फाइलें तलब
जांच एजेंसी के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, सीबीआई की यह कार्रवाई सिर्फ एक मेडिकल स्टोर तक सीमित नहीं रहने वाली है। परविंदर झोटा की नृशंस हत्या के ठीक बाद स्वास्थ्य विभाग की ड्रग कंट्रोल विंग ने मानसा शहर के अलग-अलग इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। उस दौरान स्वास्थ्य विभाग ने शहर के रेलवे फाटक और मुख्य बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित चार बड़े मेडिकल स्टोरों को सील कर दिया था, जबकि दो अन्य मेडिकल दुकानों के ड्रग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिए गए थे। अब सीबीआई इन सभी सील किए गए मेडिकल स्टोरों के पूरे रिकॉर्ड, पूर्व में की गई जब्ती की रिपोर्ट और ड्रग इंस्पेक्टर्स द्वारा तैयार की गई निरीक्षण पत्रावलियों को अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय जांच दल इस बात की कड़ियां जोड़ रहा है कि किन-किन स्टोर संचालकों के खिलाफ झोटा ने खुला मोर्चा खोला था और उनमें से किन लोगों के संबंध अंडरवर्ल्ड व स्थानीय अपराधियों से जुड़े हैं।
प्रेगाबलीन कैप्सूल की अवैध फैक्ट्रियों और खुलेआम नशाखोरी पर झोटा ने खोला था मोर्चा: पूछताछ के दायरे में पड़ोसी दुकानदार
परविंदर सिंह झोटा ने अपनी हत्या से पहले मानसा और आसपास के जिलों में 'सिग्नेचर' और अन्य ब्रांड नामों से बिकने वाले प्रेगाबलीन (Pregabalin) कैप्सूल के अवैध कारोबार के खिलाफ एक आक्रामक जन-आंदोलन छेड़ रखा था। झोटा ने सार्वजनिक रूप से सनसनीखेज खुलासे किए थे कि शहर के कुछ रसूखदार मेडिकल स्टोर संचालक नकली और प्रतिबंधित नशीली दवाओं की अवैध फैक्ट्रियां संचालित कर रहे हैं और भारी मात्रा में नशीले कैप्सूल युवाओं को धड़ल्ले से बेच रहे हैं। विशेष रूप से मानसा मेडिकोज और रामबाग रोड के मेडिकल स्टोरों पर खुलेआम मेडिकल नशा बेचने के सीधे आरोप झोटा ने लगाए थे। झोटा द्वारा बार-बार शिकायतें दर्ज कराने और जनदबाव बनाने के बाद ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस बल को साथ लेकर कई बार इन दुकानों पर छापेमारी की थी। शनिवार को छापेमारी के दौरान सीबीआई के अधिकारी मेडिकल स्टोर के आसपास स्थित अन्य दुकानदारों, स्थानीय निवासियों और प्रत्यक्षदर्शियों से भी अलग-अलग कमरे में बैठाकर पूछताछ कर रहे हैं ताकि यह जाना जा सके कि रात के समय इन दुकानों पर कौन से संदिग्ध वाहन आते थे।
परिवार की तीखी नाराजगी के बीच CBI जांच में आई तेजी: एसएसपी के तबादले की मांग पर अड़े परिजन
सीबीआई द्वारा यह त्वरित कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब परविंदर झोटा के परिवार और समर्थकों ने पंजाब पुलिस व स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। झोटा के पिता ने हाल ही में मीडिया के सामने आकर सार्वजनिक रूप से अपना दर्द साझा करते हुए आरोप लगाया था कि प्रशासनिक अधिकारियों के साथ होने वाली बैठकों में उनका लगातार अपमान किया जा रहा है। पीड़ित परिवार ने स्पष्ट मांग रखी है कि जब तक जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) का तबादला नहीं किया जाता, तब तक निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। परिवार का सीधा आरोप है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन नशा तस्करों और मेडिकल माफिया को राजनीतिक संरक्षण देता रहा है, जिसके चलते झोटा की जान को पहले से बने खतरे को नजरअंदाज किया गया। अब सीबीआई द्वारा जांच की कमान अपने हाथ में लेकर सीधे मेडिकल स्टोरों पर दबिश देने से इस बात की प्रबल संभावना बन गई है कि हत्या की इस गहरी साजिश में शामिल बड़े सफेदपोशों और ड्रग माफिया के आकाओं के चेहरे जल्द बेनकाब होंगे।