चंडीगढ़ की शराब का अंतरराज्यीय खेल! 5 राज्यों में पहुंची अवैध खेप, महज 2 महीने में जब्त हुईं 2371 से ज्यादा पेटियां; कंटेनर और लग्जरी कारों से चल रहा था तस्करी का सिंडिकेट
सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ इन दिनों अंतरराज्यीय शराब तस्करों का सबसे बड़ा और सुरक्षित लॉन्चपैड बनता नजर आ रहा है। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम आबकारी शुल्क (Excise Duty) और सस्ती शराब की उपलब्धता का फायदा उठाकर संगठित शराब माफिया ने एक विशाल अंतरराज्यीय तस्करी सिंडिकेट खड़ा कर लिया है। हालिया जांच और विभिन्न राज्यों की पुलिस व आबकारी विभागों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों ने इस अवैध नेटवर्क की चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है।
विभिन्न राज्यों की संयुक्त कार्रवाई में पिछले महज दो महीनों के भीतर 5 अलग-अलग राज्यों से 'फॉर सेल इन चंडीगढ़ ओनली' (For Sale in Chandigarh Only) मार्का वाली 2371 से अधिक शराब की पेटियां बरामद की जा चुकी हैं। भारी मात्रा में पकड़ी गई इन अवैध खेपों ने न केवल शराब तस्करों की कमर तोड़ी है, बल्कि चंडीगढ़ प्रशासन, स्थानीय ठेकेदारों और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
5 राज्यों तक फैला तस्करी का जाल: ड्राई स्टेट बिहार से लेकर यूपी-उत्तराखंड तक नेटवर्क
शराब माफियाओं का यह जाल केवल पंजाब और हरियाणा की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत और पूर्वी भारत के 5 प्रमुख राज्यों—पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्ण शराबबंदी वाले राज्य बिहार तक फैला हुआ है।
-
बिहार में भारी मांग: बिहार में शराबबंदी (Dry State) होने के कारण वहां चंडीगढ़ और पंजाब की अंग्रेजी शराब की मांग सबसे अधिक है। हाल ही में बिहार के भोजपुर (बिहिया फोरलेन) पर मद्य निषेध विभाग ने चंडीगढ़ से आ रहे एक बड़े कंटेनर से करीब 55 लाख रुपये मूल्य की 13,776 बोतलें (4448 लीटर से अधिक) अवैध शराब जब्त की थी
-
उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे रूट: उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ (STF) ने पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे पर चेकिंग के दौरान चंडीगढ़ से बिहार और यूपी के स्थानीय कस्बों में ले जाई जा रही कई खेपें पकड़ी हैं। अंबेडकरनगर में भी लग्जरी कार से चंडीगढ़ मार्का शराब की बरामदगी हुई थी।
-
उत्तराखंड के पर्वतीय इलाके: चंडीगढ़ से पहाड़ों की ओर जाने वाले मार्गों पर पंचकूला और हरिद्वार पुलिस ने कई पिकअप और लोडिंग वाहनों को पकड़ा है। पंचकूला पुलिस ने उत्तराखंड जा रही 25 पेटी अंग्रेजी शराब सहित अंतरराज्यीय तस्कर को दबोचा था।
-
पंजाब और हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्र: चंडीगढ़ के बॉर्डरों से सटे मोहाली, जीरकपुर, डेराबस्सी और अंबाला के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय ठेकों से बचने और अधिक मुनाफा कमाने के लिए चंडीगढ़ की शराब डंप की जा रही है।
'फॉर सेल इन चंडीगढ़' शराब बाहर कैसे पहुंच रही? आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि चंडीगढ़ के अधिकृत शराब ठेकों और बॉटलिंग प्लांट्स के लिए आवंटित शराब थोक में तस्करों के हाथों में कैसे पहुंच रही है?
नियमों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में बिकने वाली हर बोतल पर बारकोड और 'फॉर सेल इन चंडीगढ़' का स्पष्ट लेबल होना अनिवार्य है। इसके बावजूद 2371 से अधिक पेटियों का दूसरे राज्यों में पकड़ा जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि शहर के कुछ थोक शराब कारोबारी या ठेकेदार नियमों को ताक पर रखकर बड़े स्तर पर अवैध आपूर्ति कर रहे हैं। हाल ही में आज समाज की रिपोर्ट में चंडीगढ़ के मौली जागरां स्थित सुंदर नगर में टीन शेड से 1814 बोतलें जब्त होने का मामला भी सामने आया था, जिससे यह साबित होता है कि स्थानीय स्तर पर अवैध स्टोरेज सेंटर संचालित हो रहे थे।
तस्करी का अनोखा मॉडस ऑपरेंडी: लग्जरी कारों के सीक्रेट कैबिन, कंटेनर और फर्जी ई-वे बिल
पुलिस और आबकारी जांच एजेंसियों की पूछताछ में तस्करों के बेहद शातिर और हाईटेक तौर-तरीकों का पर्दाफाश हुआ है:
-
लग्जरी और वीआईपी कारों का इस्तेमाल: पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए तस्कर एसयूवी, फॉर्च्यूनर, स्कॉर्पियो और होंडा सिटी जैसी लग्जरी कारों की सीटों के नीचे, सीएनजी सिलेंडरों के भीतर और बूट स्पेस में गुप्त कैबिन (Secret Cavities) बनवाते हैं। इन गाड़ियों पर अक्सर प्रेस, पुलिस या प्रशासनिक स्टीकर लगाकर टोल प्लाजा पार किए जाते हैं।
-
सब्जी, दवा और कुरियर कंटेनरों की आड़: बड़े पैमाने पर अंतरराज्यीय तस्करी के लिए डाक पार्सल, फल-सब्जी और दूध के टैंकरों जैसी आवश्यक सेवाओं वाले बंद कंटेनरों का इस्तेमाल किया जाता है। बाहर से सामान्य दिखने वाले इन कंटेनरों के भीतर शराब की पेटियां छिपाकर ले जाई जाती हैं।
-
फर्जी ई-वे बिल और बिल्टी का खेल: तस्कर कंप्यूटर से अन्य गैर-प्रतिबंधित व्यापारिक सामानों जैसे स्टेशनरी, कपड़े या सैनिटरी सामान के नाम पर फर्जी ई-वे बिल जनरेट करते हैं ताकि चेकिंग के दौरान कागजात दिखाकर आगे निकला जा सके।
-
पायलट गाड़ियों द्वारा रेकी: तस्करी वाले मुख्य वाहन से 5 से 10 किलोमीटर आगे एक बाइक या छोटी कार 'पायलट' के रूप में चलती है। पायलट गाड़ी में सवार गुर्गा आगे पुलिस नाकाबंदी या आबकारी चेकिंग की लाइव लोकेशन मुख्य वाहन चालक को मोबाइल पर देता रहता है।
मुनाफे का खूनी खेल: चंडीगढ़ से बिहार पहुंचते ही 4 गुना हो जाते हैं दाम
शराब के इस अंतरराज्यीय काले कारोबार के फलने-फूलने की मुख्य वजह इसमें मिलने वाला अप्रत्याशित और अंधाधुंध मुनाफा है:
-
कीमतों में भारी अंतर: चंडीगढ़ में जो प्रीमियम अंग्रेजी व्हिस्की की बोतल 400 से 500 रुपये में आसानी से उपलब्ध होती है, वही बोतल पंजाब या हरियाणा के बॉर्डर पार करते ही 800 से 1000 रुपये में बिकती है।
-
बिहार में चार गुना कीमत: ड्राई स्टेट बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर, गया या भागलपुर जैसे शहरों में होम डिलीवरी के जरिए वही 500 रुपये वाली बोतल 2000 से 2500 रुपये तक में बेची जाती है।
-
कम निवेश में करोड़ों की कमाई: एक बार में यदि 500 पेटी शराब सफलतापूर्वक गंतव्य तक पहुंच जाती है, तो तस्करों को एक ही चक्कर में 20 से 30 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा होता है। इसी भारी भरकम मुनाफे के लालच में युवा और पेशेवर अपराधी इस धंधे में कूद रहे हैं।
सख्ती के बावजूद क्यों नहीं थम रहा अवैध खेल? अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय और निगरानी की रणनीति
लगातार हो रही बरामदगियों के बाद अब उत्तर भारत के राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियों ने संयुक्त रणनीति पर काम करना शुरू किया है:
-
बॉर्डर चेकपोस्ट्स पर सीसीटीवी और आधुनिक स्कैनर: चंडीगढ़ से बाहर निकलने वाले सभी प्रमुख मार्गों (जीरकपुर बैरियर, पंचकूला बॉर्डर, मुल्लांपुर और नयागांव) पर हाई-डेफिनिशन नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे और चेकिंग प्वाइंट्स को सक्रिय किया गया है।
-
बारकोड ट्रैकिंग सिस्टम: पकड़ी गई शराब की बोतलों के बैच नंबर और बारकोड को चंडीगढ़ आबकारी विभाग के सेंट्रल डेटाबेस से मैच कराया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह स्टॉक किस डिस्टिलरी से किस ठेके को आवंटित किया गया था।
-
व्हाट्सएप और डार्क वेब सिंडिकेट पर नजर: तस्करों के बीच होने वाली बातचीत, पेमेंट के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले यूपीआई (UPI) खातों और हवाला नेटवर्क को खंगालने के लिए साइबर सेल की मदद ली जा रही है।
-
दोषी ठेकेदारों के लाइसेंस होंगे रद्द: आबकारी विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी लाइसेंसी ठेके से अवैध सप्लाई की पुष्टि होती है, तो संबंधित ठेके का लाइसेंस तुरंत रद्द करने के साथ-साथ संचालक पर सख्त आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
चंडीगढ़ की शराब की इस अंतरराज्यीय तस्करी ने राज्यों के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। 5 राज्यों में 2371 पेटियों की बरामदगी सिर्फ हिमशैल का सिरा (Tip of the iceberg) मानी जा रही है। जब तक चंडीगढ़ के स्थानीय स्रोतों पर सख्त पहरा नहीं बैठेगा और माफियाओं के पूरे वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त नहीं किया जाएगा, तब तक इस अंतरराज्यीय खेल पर पूरी तरह नकेल कसना मुश्किल होगा।