15 दिनों में दूसरी बार राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मिले सीएम भगवंत मान, जगतार सिंह हवारा की पैरोल और पंजाब के सियासी-प्रशासनिक हालात पर राजभवन में बड़ी चर्चा

15 दिनों में दूसरी बार राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मिले सीएम भगवंत मान, जगतार सिंह हवारा की पैरोल और पंजाब के सियासी-प्रशासनिक हालात पर राजभवन में बड़ी चर्चा

पंजाब की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को चंडीगढ़ स्थित पंजाब राजभवन पहुंचकर राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से औपचारिक मुलाकात की। बीते महज 15 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच यह दूसरी व्यक्तिगत बैठक है। इससे पहले 12 अगस्त को भी मुख्यमंत्री मान ने राजभवन जाकर राज्यपाल से लंबी चर्चा की थी।

इतने कम समय अंतराल में दो शीर्ष संवैधानिक पदों के बीच हो रही लगातार मुलाकातों को राज्य की वर्तमान कानून-व्यवस्था, संवेदनशील पंथिक मामलों और प्रशासनिक समन्वय के दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक के दौरान राज्य से जुड़े कई ज्वलंत और नीतिगत विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें सबसे प्रमुख मुद्दा 1995 के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे बंदी जगतार सिंह हवारा की पैरोल का रहा।

जगतार सिंह हवारा की 10 दिन की पैरोल का मामला बना मुख्य केंद्र बिंदु

राजभवन सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मुलाकात के दौरान बंदी जगतार सिंह हवारा की पैरोल अर्जी से जुड़े तथ्यों और राज्य सरकार के पक्ष से राज्यपाल को अवगत कराया। हवारा पिछले 31 वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद हैं और वर्तमान में दिल्ली की मंडोली जेल में निरुद्ध हैं।

मुख्यमंत्री ने मानवीय आधार (Humanitarian Grounds) का हवाला देते हुए राज्यपाल से अपील की कि हवारा को उनकी गंभीर रूप से अस्वस्थ और बुजुर्ग मां से मिलने के लिए कम से कम 10 दिन की पैरोल देने की सिफारिश पर विचार किया जाए। सीएम मान ने स्पष्ट किया कि 31 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बीमार और अर्ध-बेहोशी की हालत में बिस्तर पर पड़ी मां को अपने बेटे से मिलने की अंतिम उम्मीद जगी है। इस मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए संवैधानिक प्रमुख के स्तर से आवश्यक कदम उठाए जाने की मांग रखी गई।

हाई कोर्ट के आदेश और कानूनी पेंच के बीच प्रशासनिक उलझन

जगतार सिंह हवारा की पैरोल का मामला कानूनी रूप से काफी पेचीदा रहा है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हाल ही में दिल्ली स्थित मंडोली जेल प्रशासन को निर्देश दिया था कि वह चंडीगढ़ प्रशासन से आवश्यक अनुशंसाएं प्राप्त करके एक तय समय सीमा के भीतर हवारा की पैरोल याचिका पर फैसला करे।

चूंकि यह मामला केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, दिल्ली जेल प्रशासन और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की अदालतों से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें पंजाब के राज्यपाल (जो चंडीगढ़ के प्रशासक भी हैं) की भूमिका और सिफारिश सबसे निर्णायक हो जाती है। सुरक्षा एजेंसियों ने हवारा को 'हाई-रिस्क कैदी' की श्रेणी में रखा हुआ है, जिसके चलते पूर्व में उन्हें केवल 2 दिन की कस्टडी पैरोल की पेशकश की गई थी, जिसे हवारा ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। अब राज्य सरकार की ओर से 10 दिन की नियमित पैरोल की वकालत किए जाने से इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

कानून-व्यवस्था पर सरकार का भरोसा: शांति भंग नहीं होने दी जाएगी

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल को आश्वस्त किया कि यदि जगतार सिंह हवारा को मानवीय आधार पर पैरोल दी जाती है, तो पंजाब सरकार राज्य में अमन-चैन और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी लेगी। सीएम ने कहा कि पंजाब ने आतंकवाद के काले दौर के बाद बड़ी मुश्किल से शांति और सामाजिक सौहार्द हासिल किया है और सरकार किसी भी कीमत पर इसे प्रभावित नहीं होने देगी।

प्रशासनिक स्तर पर कड़े सुरक्षा प्रबंध, रूट मॉनिटरिंग और निगरानी तंत्र का पूरा खाका तैयार किया जा सकता है ताकि किसी भी तरह की अवांछित गतिविधि या कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।

पंजाब में गरमाता सामाजिक माहौल और पंथिक संगठनों का दबाव

मुख्यमंत्री और राज्यपाल की यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पंजाब में बंदी सिंहों की रिहाई और हवारा की पैरोल को लेकर सामाजिक और धार्मिक स्तर पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। कौमी इंसाफ मोर्चा पिछले लंबे समय से मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर अनिश्चितकालीन धरना दे रहा है।

हाल ही में शुक्रवार को किसान संगठनों और विभिन्न जत्थेबंदियों द्वारा बुलाए गए 'पंजाब बंद' का व्यापक असर राज्य के कई प्रमुख जिलों में देखा गया था। इसके अलावा, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की अंतरंग कमेटी ने भी 27 अगस्त से ऐतिहासिक गुरुद्वारों में विशेष अखंड पाठ साहिब और 23 अगस्त से 'खालसा वाहिर' निकालने का ऐलान किया है। इन सभी परिस्थितियों के मद्देनजर राज्य सरकार चाहती है कि इस संवेदनशील मामले का शांतिपूर्ण और न्यायसंगत समाधान जल्द निकाला जाए ताकि जनता के बीच पनप रहे असंतोष को शांत किया जा सके।

राज्य के अन्य प्रशासनिक मुद्दे और विकास योजनाओं पर भी मंथन

हवारा की पैरोल के अतिरिक्त, मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच करीब 45 मिनट तक चली इस बैठक में पंजाब के कई अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विकासात्मक मुद्दों पर भी चर्चा हुई:

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा और बाढ़ रोकथाम: अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करने और दरियाई क्षेत्रों में बांध व तटबंध निर्माण की योजनाओं पर विचार किया गया।

  • केंद्र-राज्य समन्वय: केंद्रीय योजनाओं के तहत पंजाब को मिलने वाले फंड, ग्रामीण विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई।

  • संस्थानों का सुचारू संचालन: पिछले दिनों राजभवन और सरकार के बीच विभिन्न विधेयकों तथा कुलपतियों की नियुक्तियों को लेकर जो गतिरोध रहा था, नए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के कार्यभार संभालने के बाद उसमें सकारात्मक संवाद का माहौल बनता दिखाई दे रहा है।

बैठक के क्या हो सकते हैं राजनीतिक और प्रशासनिक मायने?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 15 दिनों में दो बार मुख्यमंत्री का राज्यपाल से मिलना यह संकेत देता है कि पंजाब सरकार अब राजभवन के साथ टकराव के बजाय रचनात्मक बातचीत का रास्ता अपना रही है। हवारा की पैरोल पर राज्यपाल की सहमति या केंद्र सरकार को भेजी जाने वाली सिफारिश राज्य की आगामी राजनीति को गहराई से प्रभावित कर सकती है।

यदि गृह मंत्रालय और चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से इस मामले में सकारात्मक रुख अपनाया जाता है, तो यह पंजाब में भावनात्मक और पंथिक मुद्दों पर सरकार की स्थिति को मजबूत कर सकता है। फिलहाल सबकी निगाहें राजभवन द्वारा गृह मंत्रालय को भेजी जाने वाली रिपोर्ट और आगामी दिनों में होने वाले कानूनी घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी पंजाब के हर जिले में स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।