सीएम भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर ने सुखपाल खैहरा और बिक्रम मजीठिया को भेजा लीगल नोटिस

सीएम भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर ने सुखपाल खैहरा और बिक्रम मजीठिया को भेजा लीगल नोटिस

पंजाब की राजनीति इन दिनों एक नए और बड़े सियासी भूचाल के दौर से गुजर रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने राज्य के दो दिग्गज विपक्षी नेताओं—कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ बेहद कड़ा कानूनी कदम उठाया है। डॉ. गुरप्रीत कौर की ओर से इन दोनों नेताओं को एक आधिकारिक लीगल नोटिस भेजा गया है, जिसमें उन पर लगाए गए कथित भ्रष्टाचार और 5 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के गंभीर आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया गया है। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दोनों नेता आगामी 24 घंटे के भीतर अपने दिए गए बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगें, अन्यथा उनके खिलाफ अदालत में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इस कानूनी कार्रवाई के बाद से पंजाब की राजनीतिक फिज़ा में सरगर्मी अचानक काफी तेज हो गई है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तकरार अपने चरम पर पहुंच गई है।

क्या है पूरा मामला? 5 करोड़ की रिश्वत और पूर्व जज के आरोपों से उपजा विवाद

इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद की जड़ें कुछ हफ्ते पहले तब गहरी हुई थीं जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस रणजीत सिंह ने एक सार्वजनिक बयान और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए गंभीर आरोप लगाए थे। रिटायर्ड जस्टिस ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर और उनके एक करीबी रिश्तेदार ने एक हाई-प्रोफाइल दुष्कर्म (रेप) मामले—जिसमें गुर चहल मुख्य आरोपी के रूप में नामजद है—को दबाने और एक अन्य कारोबारी के खिलाफ दर्ज पुलिस मामले को रद्द करवाने के एवज में कथित तौर पर 5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत की मांग की थी। इन आरोपों के सामने आते ही पंजाब के राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया था। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए आम आदमी पार्टी (आप) सरकार और मुख्यमंत्री परिवार को घेरना शुरू कर दिया था। इस मामले में बढ़ते दबाव को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी कड़ा संज्ञान लिया था और पंजाब के मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से दो सप्ताह के भीतर पूरी रिपोर्ट तलब की थी। अपनी साख पर लग रहे इन आरोपों के बाद डॉ. गुरप्रीत कौर ने पहले रिटायर्ड जस्टिस रणजीत सिंह को कानूनी नोटिस भेजकर अपने बयान वापस लेने की चेतावनी दी थी और अब विपक्षी नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसा है।

बिक्रम सिंह मजीठिया का ऑडियो-वीडियो बम और राजनीतिक बयानबाजी

इस विवाद को और अधिक हवा देने का काम अकाली दल के आक्रामक नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने किया। लीगल नोटिस भेजे जाने से ठीक पहले, यानी 2 सितंबर को बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक कथित ऑडियो-वीडियो क्लिप सार्वजनिक कर दी थी। मजीठिया ने दावा किया कि इस ऑडियो रिकॉर्डिंग में मामले से जुड़े कथित बिचौलियों और डॉ. गुरप्रीत कौर के एक रिश्तेदार के बीच पैसों के लेन-देन, पटियाला जेल में आरोपी को मिलने वाली कथित वीआईपी सुविधाओं और मुख्यमंत्री आवास पर मुलाकातों को लेकर गंभीर बातचीत हो रही है। इस ऑडियो-वीडियो के सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। अकाली दल और कांग्रेस के नेताओं ने इसे सरकार में भ्रष्टाचार का सीधा सबूत बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे और उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग दोहराई। मजीठिया का यह दांव सत्ता पक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया, जिसके बाद डॉ. गुरप्रीत कौर ने कानूनी रास्ते से इन बयानों का मुकाबला करने का निर्णय लिया और दोनों नेताओं को नोटिस थमा दिया।

सुखपाल सिंह खैहरा का आक्रामक रुख, बोले- नहीं दूंगा नोटिस का कोई जवाब

लीगल नोटिस मिलने के बाद कांग्रेस के बेबाक और वरिष्ठ विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने बेहद आक्रामक और दो टूक तेवर दिखाए हैं। सुखपाल खैहरा ने मीडिया के सामने खुलकर स्वीकार किया कि उन्हें मुख्यमंत्री की पत्नी की तरफ से कानूनी नोटिस प्राप्त हुआ है, लेकिन वे इसके आगे झुकने वाले बिल्कुल नहीं हैं। खैहरा ने ऐलान किया कि वह इस नोटिस का कोई भी आधिकारिक जवाब नहीं देंगे। उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री परिवार चाहें तो उनके खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करवा ले या अपनी 'पुलिस स्टेट' का इस्तेमाल करके जो भी दमनकारी कार्रवाई करना चाहे कर ले, वे सच की आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। खैहरा ने इससे पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए सीएम मान और डीजीपी से सवाल किया था कि क्या वे 5 करोड़ रुपये मांगने वाले कथित किरदारों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई करेंगे या नहीं। खैहरा और मजीठिया के इस रुख से यह साफ जाहिर होता है कि वे इस कानूनी नोटिस से डरने के बजाय इस लड़ाई को राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर और अधिक आक्रामक तरीके से लड़ने के मूड में हैं।

आगामी राजनीतिक और कानूनी परिणामों पर टिकी सबकी निगाहें

डॉ. गुरप्रीत कौर द्वारा उठाए गए इस सख्त कदम और विपक्षी नेताओं के तीखे बयानों के बाद पंजाब की राजनीति एक बेहद दिलचस्प और संवेदनशील मोड़ पर आ गई है। यदि 24 घंटे की निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुखपाल सिंह खैहरा और बिक्रम सिंह मजीठिया माफी नहीं मांगते हैं, तो मुख्यमंत्री की पत्नी की कानूनी टीम की ओर से अदालत में मानहानि के बड़े मुकदमे दायर किए जा सकते हैं, जिससे अदालती कार्यवाही और लंबी राजनीतिक जंग का रास्ता साफ हो जाएगा। आने वाले दिनों में यह विवाद पंजाब की सियासत के केंद्र में रहने वाला है, क्योंकि राज्य में पहले से ही आगामी चुनावों और सांगठनिक रणनीतियों को लेकर माहौल गर्म है। जनता और राजनीतिक विश्लेषक अब इस बात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं कि क्या यह मामला केवल बयानों की हद तक सीमित रहेगा या पंजाब की अदालतों और राजनीतिक मंचों पर एक ऐतिहासिक कानूनी संघर्ष का रूप लेगा।