6 दिन में 3 बार रद हुई दिल्ली-लुधियाना फ्लाइट: साहनेवाल में 65 यात्री फंसे, 8000 की महंगी टैक्सी कर पहुंचे IGI एयरपोर्ट

6 दिन में 3 बार रद हुई दिल्ली-लुधियाना फ्लाइट: साहनेवाल में 65 यात्री फंसे, 8000 की महंगी टैक्सी कर पहुंचे IGI एयरपोर्ट

पंजाब के सबसे बड़े औद्योगिक महानगर लुधियाना और देश की राजधानी दिल्ली के बीच हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एयरलाइंस की लापरवाही भारी मुसीबत का सबब बन चुकी है। लुधियाना के साहनेवाल हवाई अड्डे (Sahnewal Airport) से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) के बीच संचालित होने वाली उड़ान छह दिनों के भीतर तीसरी बार अचानक रद कर दी गई। बिना किसी पूर्व सूचना के ऐन वक्त पर फ्लाइट कैंसिल होने से एयरपोर्ट पहुंचे 65 से अधिक यात्रियों को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा। कनेक्टिंग अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों को पकड़ने की जल्दी में यात्रियों को भारी-भरकम किराया चुकाकर निजी टैक्सियों के जरिए दिल्ली रवाना होना पड़ा। इस अव्यवस्था को लेकर यात्रियों ने साहनेवाल एयरपोर्ट पर एयरलाइन प्रबंधन के खिलाफ जमकर रोष जताया।

ऐन वक्त पर तकनीकी खामी का हवाला, बोर्डिंग से ठीक पहले कैंसिल हुई फ्लाइट

साहनेवाल हवाई अड्डे पर उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब दिल्ली जाने वाली निर्धारित फ्लाइट के लिए पहुंचे यात्रियों को अचानक उड़ान रद होने की सूचना दी गई। एयरलाइन अधिकारियों ने हर बार की तरह इस बार भी संचालन से जुड़े कारणों और तकनीकी खराबी (Operational & Technical Glitch) का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया। यात्रियों का आरोप है कि उन्हें उड़ान के समय से मात्र कुछ मिनट पहले यह जानकारी दी गई, जब वे सुरक्षा जांच और चेक-इन की प्रक्रिया के लिए कतारों में खड़े थे।

हवाई अड्डे पर मौजूद यात्रियों ने बताया कि पिछले छह दिनों में यह तीसरी घटना है जब इस रूट की सर्विस को बिना किसी ठोस वैकल्पिक इंतजाम के अचानक बंद कर दिया गया। बार-बार उड़ानों के रद्द होने से रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (RCS-UDAN) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसके तहत औद्योगिक शहर लुधियाना को राजधानी से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे।

कनेक्टिंग फ्लाइट्स छूटने का डर, 8 से 10 हजार रुपये में टैक्सी बुक करने को मजबूर हुए मुसाफिर

फ्लाइट कैंसिल होने से सबसे बड़ा झटका उन यात्रियों को लगा, जिनकी दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से आगे लंदन, कनाडा, दुबई और अमेरिका के लिए अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिंग उड़ानें थीं। कई यात्रियों को दक्षिण भारत और मुंबई के लिए जरूरी बिजनेस बैठकों में शामिल होना था। फ्लाइट रद होने के कारण टिकट कैंसिल होने और लाखों रुपये के नुकसान के डर से यात्रियों के पास सड़क मार्ग से दिल्ली भागने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा।

साहनेवाल से दिल्ली की दूरी करीब 320 किलोमीटर है, जिसे तय करने में सड़क मार्ग से 5 से 6 घंटे का समय लगता है। स्थिति का फायदा उठाते हुए स्थानीय टैक्सी चालकों ने भी मनमाना किराया वसूला। यात्रियों को मजबूरी में 8,000 से लेकर 10,000 रुपये तक देकर आनन-फानन में टैक्सियां बुक करनी पड़ीं ताकि वे समय रहते दिल्ली पहुंच सकें। कई बुजुर्ग यात्रियों और बच्चों के साथ सफर कर रहे परिवारों को इस अचानक आई आफत के चलते बेहद फजीहत झेलनी पड़ी।

औद्योगिक नगरी के कारोबारियों में भारी रोष, एयरलाइन की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल

लुधियाना पंजाब की आर्थिक राजधानी और एशिया का प्रमुख होजरी व साइकिल उद्योग केंद्र है। यहां के उद्योगपतियों, निर्यातकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को रोजाना देश-विदेश के क्लाइंट्स से मिलने के लिए दिल्ली आना-जाना पड़ता है। फ्लाइट्स के लगातार कैंसिल होने से स्थानीय उद्योग जगत में गहरा रोष व्याप्त है।

कारोबारियों का कहना है कि जब सरकार ने साहनेवाल से दोबारा उड़ानें शुरू की थीं, तब उम्मीद जगी थी कि व्यापार को गति मिलेगी और समय की बचत होगी। लेकिन एयरलाइन की यह गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली विश्वसनीयता को पूरी तरह खत्म कर रही है। उद्योगपतियों ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय से मांग की है कि इस रूट पर लगातार उड़ानें रद करने वाली एयरलाइन की जवाबदेही तय की जाए और यात्रियों को हुए वित्तीय नुकसान का उचित मुआवजा दिलाया जाए।

रिफंड के नाम पर खानापूर्ति, यात्रियों ने की स्थायी समाधान की मांग

हवाई अड्डे पर फंसे यात्रियों ने बताया कि एयरलाइन प्रबंधन ने केवल टिकट का पैसा वापस (रिफंड) करने या अगली किसी तारीख पर री-शेड्यूल करने का विकल्प दिया। यात्रियों का कहना था कि ऐन वक्त पर रिफंड मिलने से उनकी छूटी हुई कनेक्टिंग फ्लाइट्स और टैक्सी में लगे भारी खर्च की भरपाई नहीं हो सकती। यात्रियों ने नागरिक उड्डयन मंत्री से अपील की है कि दिल्ली-लुधियाना रूट पर बड़े विमानों का संचालन सुनिश्चित किया जाए और मौसम या तकनीकी दिक्कतों का बहाना बनाकर यात्रियों को अधर में लटकाने वाली व्यवस्था का स्थायी समाधान निकाला जाए।