ED का बड़ा खुलासा: GMADA में 7 साल तक पुरानी कौड़ियों के भाव बांटे गए बेशकीमती प्लॉट

ED का बड़ा खुलासा: GMADA में 7 साल तक पुरानी कौड़ियों के भाव बांटे गए बेशकीमती प्लॉट

पंजाब के मोहाली में ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) के भीतर हुए एक बहुत बड़े वित्तीय घोटाले और जमीन आवंटन फर्जीवाड़े की परतें प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में खुलकर सामने आ गई हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा की जा रही मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) की जांच में यह सनसनीखेज सच उजागर हुआ है कि गमाडा के जिम्मेदार अधिकारियों ने रियल एस्टेट बाजार में जमीन की आसमान छूती कीमतों की अनदेखी करते हुए सात वर्षों तक विस्थापितों के कोटे के तहत पुरानी और बेहद सस्ती दरों पर प्रीमियम भूखंडों का खुलेआम आवंटन किया। जिस जमीन का बाजार भाव और सरकारी आरक्षित मूल्य सात साल में तीन गुना तक बढ़ चुका था, उसे वर्ष 2018 की पुरानी दरों पर ही चहेतों और रसूखदारों को लुटाया जाता रहा। जांच एजेंसी के शुरुआती वित्तीय विश्लेषण के अनुसार, इस आपराधिक लापरवाही और कथित मिलीभगत के चलते पंजाब के सरकारी खजाने को सीधे तौर पर करीब 400 करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व नुकसान झेलना पड़ा है।

25 हजार की पुरानी दर पर 2026 तक जारी हुए आवंटन पत्र: 65 हजार प्रति वर्ग गज पहुंच चुकी थी वास्तविक कीमत

ईडी की तकनीकी और फॉरेंसिक जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि गमाडा ने वर्ष 2018 में विस्थापितों के लिए 25 हजार रुपये प्रति वर्ग गज की दर निर्धारित की थी। इसके बाद अथॉरिटी ने अपने राजस्व और बाजार दरों को संतुलित करने के लिए समय-समय पर प्लॉटों के भाव में नियमित बढ़ोतरी की। गमाडा के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2018-19 और 2019-20 में दर 25 हजार रुपये प्रति वर्ग गज थी, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर 32,500 रुपये, वर्ष 2022-23 में 39 हजार रुपये, वर्ष 2023-24 में 42,900 रुपये, वर्ष 2024-25 में 51,500 रुपये और वर्ष 2025-26 तक पहुंचते-पहुंचते 65 हजार रुपये प्रति वर्ग गज के आंकड़े को पार कर गई थी। इसके बावजूद गमाडा के अधिकारियों ने विस्थापितों के कोटे में संशोधित दरों को लागू करने के बजाय रहस्यमयी तरीके से 2025-26 के वित्तीय वर्ष तक 25 हजार रुपये प्रति वर्ग गज की पुरानी दर पर ही आवंटन पत्र (Allotment Letters) धड़ल्ले से जारी रखे, जिससे साफ संकेत मिलता है कि सरकारी खजाने की कीमत पर भारी निजी मुनाफा कमाया गया।

आईटी सिटी के सेक्टर-82 अल्फा और सेक्टर-66 बीटा में बांटे गए 441 प्लॉट: 169 फाइलें अभी भी कतार में

जांच एजेंसी के दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2026 के बीच मोहाली के सबसे महंगे और तेजी से विकसित हो रहे आईटी सिटी क्षेत्र के दो प्रमुख सेक्टरों में यह सारा खेल खेला गया। सेक्टर-82 अल्फा और सेक्टर-66 बीटा में विस्थापितों के नाम पर कुल 441 बेशकीमती प्लॉट आवंटित कर दिए गए। इनमें से 100 प्लॉट सेक्टर-82 अल्फा में दिए गए, जबकि 341 प्लॉट सेक्टर-66 बीटा में बांटे गए। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया है कि 169 अन्य आवेदन अभी भी विचाराधीन और लंबित रखे गए हैं, जिनमें सेक्टर-82 अल्फा के 39 और सेक्टर-66 बीटा के 130 आवेदन शामिल हैं। यदि समय रहते ईडी का शिकंजा नहीं कसता, तो इन लंबित आवेदनों पर भी करोड़ों रुपये की हेराफेरी कर पुरानी दरों पर ही प्राइम लोकेशंस के प्लॉट सौंप दिए जाते।

जून 2020 की बैठक और कमेटी के निर्देशों की खुली अवहेलना: बिना जांच आवेदकों को ड्रॉ में किया गया शामिल

ईडी के हाथ जून 2020 में आयोजित एक उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक के अहम मिनट्स लगे हैं। इस बैठक में गमाडा और पंजाब अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पुडा) के आला अधिकारी, एस्टेट ऑफिसर (प्लॉट्स) और मुख्य कानूनी सलाहकार शामिल हुए थे। गमाडा ने 24 अगस्त 2018 को विस्थापितों के लिए स्कीम निकाली थी और 12 जून 2019 को दरों में संशोधन हुआ था। इस बैठक में तय हुआ था कि 2013 और 2018 की योजनाओं के पात्र आवेदकों को 15 दिनों के भीतर आवंटन पत्र जारी किए जाएं। हालांकि जांच से यह खुलासा हुआ कि इन निर्देशों को ताक पर रख दिया गया और फाइलों को वर्षों तक दबाकर रखा गया ताकि बाद में मनमाने ढंग से आवंटन किया जा सके। इसके अलावा, योजना के ब्रोशर में तय समयसीमा के भीतर लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी नहीं किए गए और सबसे बड़ी बात यह रही कि आवेदकों के मूल दस्तावेजों की भौतिक जांच (Document Verification) किए बिना ही उन्हें सीधे लकी ड्रॉ में शामिल कर लिया गया।

मोहाली दफ्तर में 3 दिन चली थी ईडी की तलाशी: 10 हजार करोड़ रुपये के संभावित नुकसान की भी आशंका

प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने पिछले महीने मोहाली स्थित गमाडा के मुख्य मुख्यालय में लगातार तीन दिनों तक सघन तलाशी अभियान चलाया था, जिसमें विस्थापित नीति (Oustees Policy) और जमीन अधिग्रहण से जुड़े सैकड़ों महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड्स और हार्ड ड्राइव्स जब्त की गई थीं। जांच एजेंसी ने एक और बड़ा अंदेशा जताया है कि गमाडा क्षेत्र में बिना बिके कॉमर्शियल और रेजिडेंशियल जमीन के टुकड़ों के आरक्षित मूल्य (Reserve Price) में की गई कथित हेराफेरी के चलते पंजाब सरकार को भविष्य में 10 हजार करोड़ रुपये तक का भारी नुकसान हो सकता है। उधर, इस पूरे मामले पर जब पंजाब के आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव विकास गर्ग से पक्ष मांगा गया, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल यह मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है और वे गमाडा से विस्तृत रिकॉर्ड तलब कर पूरे मामले की आंतरिक समीक्षा और आवश्यक जांच करवाएंगे।