चंडीगढ़ में पंजाब CM आवास घेरने निकलीं हरसिमरत कौर बादल, पुलिस से तीखी झड़प के बाद अकाली कार्यकर्ताओं सहित हिरासत में

चंडीगढ़ में पंजाब CM आवास घेरने निकलीं हरसिमरत कौर बादल, पुलिस से तीखी झड़प के बाद अकाली कार्यकर्ताओं सहित हिरासत में

पंजाब की राजनीति में उस वक्त भारी तनाव और हलचल देखने को मिली, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और बठिंडा से शिरोमणि अकाली दल (SAD) की सांसद हरसिमरत कौर बादल के नेतृत्व में पार्टी की महिला विंग (इस्त्री अकाली दल) ने चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री भगवंत मान के सरकारी आवास का घेराव करने के लिए जोरदार रोष मार्च निकाला। यह विरोध प्रदर्शन पंजाब के मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर आयोजित किया गया था।

जैसे ही प्रदर्शनकारियों का जत्था मुख्यमंत्री आवास की ओर आगे बढ़ा, चंडीगढ़ पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए भारी बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इस दौरान पुलिस और अकाली दल कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई। माहौल तनावपूर्ण होता देख पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सांसद हरसिमरत कौर बादल समेत कई वरिष्ठ महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में ले लिया।

बैरिकेडिंग पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की, सड़क पर बैठकर दिया धरना

मार्च के दौरान चंडीगढ़ के मुख्य मार्गों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल ने वज्र वाहनों और कई लेयर की बैरिकेडिंग के जरिए प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी, तो बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता सड़क पर ही बैठ गईं और पंजाब सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। अकाली दल ने पुलिस की इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन और सरकार द्वारा विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया। घंटों चले हंगामे और मान-मनौव्वल के बाद पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए हरसिमरत कौर बादल और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया और संबंधित थाने ले गई।

क्या है पूरा मामला जिसके चलते अकाली दल ने खोला मोर्चा?

इस पूरे राजनीतिक विवाद की जड़ पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और उनकी पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर से जुड़े कथित आरोपों को लेकर है। शिरोमणि अकाली दल का आरोप है कि सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों पर लगे गंभीर मामलों और कथित वित्तीय लेन-देन के आरोपों की किसी स्वतंत्र एजेंसी (जैसे सीबीआई) से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता में बैठे लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और गंभीर आरोपों को केवल 'राजनीतिक दुर्भावना' कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। अकाली दल ने इस बात पर भी जोर दिया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले में संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है, इसलिए इसकी पूरी सच्चाई पंजाब की जनता के सामने आनी चाहिए।

पंजाब की सियासत में गरमाया मुद्दा, अन्य विपक्षी दलों ने भी उठाए सवाल

हरसिमरत कौर बादल की हिरासत के बाद पंजाब का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। केवल अकाली दल ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के नेताओं ने भी इस मामले को लेकर पंजाब सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता परनीत कौर ने भी हाल ही में इस प्रकरण पर बयान देते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग उठाई थी।

विपक्षी दलों का कहना है कि जब आरोप इतने गंभीर हैं, तो सरकार को जांच से भागने के बजाय दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ, सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विपक्ष की हताशा और राजनीतिक स्टंट बताया है। सरकार का कहना है कि विपक्ष के पास कोई ठोस चुनावी या जनहित का मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए बेबुनियाद बातों को तूल देकर केवल सनसनी फैलाई जा रही है।

आगामी दिनों में और तेज हो सकता है आंदोलन

चंडीगढ़ में हुए इस घटनाक्रम के बाद शिरोमणि अकाली दल ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को आसानी से शांत नहीं होने देगा। पार्टी की कोर कमेटी इस मसले पर राज्यपाल से मुलाकात करने और कानूनी कदम उठाने के साथ-साथ पूरे पंजाब के जिला मुख्यालयों पर चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रही है।

चंडीगढ़ प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मुख्यमंत्री आवास, पंजाब राजभवन और सचिवालय के आसपास सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।