नीति आयोग की रैंकिंग में केरल, दिल्ली और महाराष्ट्र को पछाड़कर नंबर-1 बना राज्य, जानिए सीएम भगवंत मान की 'शिक्षा क्रांति' का पूरा ब्योरा
देश में स्कूली शिक्षा के परिदृश्य में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। कभी राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक रैंकिंग में 27वें स्थान पर पिछड़ने वाला राज्य पंजाब आज देश भर में प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में नंबर-1 राज्य बनकर उभरा है। नीति आयोग द्वारा जारी हालिया आंकड़ों और राष्ट्रीय उपलब्धियों के मूल्यांकन में पंजाब ने शिक्षा के मामले में पारंपरिक रूप से अग्रणी रहे केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान पर अपना कब्जा जमाया है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और राज्य के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस उपलब्धि पर राज्य के सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों, अध्यापकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री मान ने अपने संदेश में कहा कि पंजाब सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में बीते वर्षों में किए गए गंभीर निवेश और दूरदर्शी नीतियों का परिणाम अब धरातल पर दिखाई दे रहा है। नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, तीसरी कक्षा के भाषा मूल्यांकन में पंजाब ने 82 प्रतिशत अंक हासिल किए, जबकि केरल 75 प्रतिशत अंकों पर रहा। इसी तरह तीसरी कक्षा के गणित में पंजाब ने 78 प्रतिशत अंक प्राप्त कर केरल के 70 प्रतिशत को पछाड़ा, जबकि नौवीं कक्षा के गणित में पंजाब 52 प्रतिशत अंकों के साथ केरल के 45 प्रतिशत से काफी आगे रहा।
डिजिटल क्रांति और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर: 19,125 सरकारी स्कूलों का कायाकल्प
पंजाब के सरकारी स्कूलों को 'आखिरी विकल्प' से बदलकर 'पहली पसंद' बनाने के लिए राज्य सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर के नवीनीकरण पर अभूतपूर्व ध्यान दिया है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस द्वारा पंजाब विधानसभा में प्रस्तुत चार साल के रिपोर्ट कार्ड के अनुसार, राज्य के 19,125 सरकारी स्कूलों में कुल 2,638 करोड़ रुपये की लागत से बुनियादी ढांचे का कायाकल्प किया गया है। इसके अतिरिक्त, विश्व बैंक से शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार जारी रखने के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मंजूरी भी हासिल की गई है।
डिजिटल शिक्षा के मानकों पर भी पंजाब पड़ोसी राज्यों से कहीं आगे निकल गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पंजाब के 80.1 प्रतिशत स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही, 88.9 प्रतिशत स्कूलों में हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी, 99.9 प्रतिशत स्कूलों में सुचारू बिजली आपूर्ति और 99 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर की उपलब्धता सुनिश्चित की जा चुकी है। कुछ वर्ष पूर्व तक पंजाब के 8,000 से अधिक स्कूलों में सुरक्षा दीवारें (चारदीवारी) नहीं थीं, 3,200 स्कूलों में इस्तेमाल योग्य शौचालय नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे। आज उन सभी स्कूलों में पक्की चारदीवारी, आधुनिक शौचालय, डेस्क और पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था मुकम्मल कर दी गई है।
'पेस' पहल का दिखा जादू: नीट परीक्षा में 11 गुना बढ़ी सरकारी स्कूल के बच्चों की सफलता
पंजाब की शिक्षा क्रांति का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष प्रमाण राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं के नतीजों में देखने को मिल रहा है। पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई 'पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस' (PACE/पेस) पहल ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए डॉक्टर और इंजीनियर बनने के रास्ते खोल दिए हैं। वर्ष 2021 में जहां पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा पास करने वाले छात्रों की संख्या महज 80 थी, वहीं वर्ष 2026 में यह आंकड़ा 11 गुना से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 882 पर पहुंच गया है।
राज्य के कई ग्रामीण और सामान्य इलाकों के सरकारी स्कूलों से एक साथ दर्जनों बच्चों का नीट परीक्षा में चयन हो रहा है। उदाहरण के तौर पर, अमृतसर के मजीठा स्थित सरकारी स्कूल के 6 विद्यार्थियों और दीनानगर के सरकारी स्कूल के 17 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास कर एक नया इतिहास रचा है। वहीं राज्य में बनाए गए 'स्कूल ऑफ एमिनेन्स' में विश्वस्तरीय प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। कई 'स्कूल ऑफ एमिनेन्स' के निर्माण पर 18-18 करोड़ रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं, जहां से अकेले एक-एक स्कूल के 17-17 बच्चे नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में सफलता का परचम लहरा चुके हैं।
बुनियादी साक्षरता और अध्यापकों का सम्मान: 12 लाख विद्यार्थियों का संवरा भविष्य
शैक्षणिक गुणवत्ता को जमीनी स्तर पर सुधारने के लिए पंजाब शिक्षा विभाग ने विशेष साक्षरता और गणितीय दक्षता अभियान चलाया है। शुरुआती आकलनों में देखा गया था कि उच्च प्राथमिक कक्षाओं के कई छात्र बुनियादी जोड़, घटाव या पठन-पाठन में कठिनाई महसूस कर रहे थे। सरकार ने ऐसे विद्यार्थियों को चिह्नित कर विशेष पाठ्यक्रम और उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) के जरिए उनके शैक्षणिक स्तर में सुधार किया। वर्तमान में इस कार्यक्रम के तहत सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को लाभान्वित किया जा रहा है।
इसके साथ ही, भारत सरकार द्वारा शुरू की गई 'अपार आईडी' (APAAR ID) प्रणाली को पंजाब में पारदर्शिता के साथ लागू किया गया है। इससे पूर्व के सालों में एक ही बच्चे का नाम कई स्कूलों में दर्ज होने और फर्जी आंकड़ों की समस्या का स्थायी समाधान हो गया है, जिससे अब राज्य के पास सटीक और पारदर्शी छात्र डेटा मौजूद है। अध्यापकों की क्षमता निर्माण के लिए पंजाब सरकार ने सैकड़ों शिक्षकों और स्कूल प्रिंसिपलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिलाने के लिए सिंगापुर, फिनलैंड और देश के प्रतिष्ठित आईआईएम (IIM) संस्थानों में भेजा है।
'आखिरी विकल्प' से 'पहली पसंद' बने सरकारी स्कूल: पंजाब में शिक्षा के नए युग का आगाज
पंजाब की मान सरकार ने सरकारी स्कूलों के प्रबंधन में भी क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। पिछली सरकारों के दौर में जहां स्कूल प्रिंसिपलों और शिक्षकों को छोटी-मोटी मरम्मत या सुविधाओं के लिए चंदा मांगने या दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, वहीं अब सरकार ने हर स्कूल को पर्याप्त प्रशासनिक एवं विकास फंड सीधे उपलब्ध करा दिए हैं। इससे शिक्षकों का ध्यान प्रशासनिक उलझनों से हटकर पूरी तरह से अध्यापन और छात्रों के मार्गदर्शन पर केंद्रित हुआ है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दोहराया कि राज्य में शिक्षा का बजट बढ़ाना और स्कूलों का आधुनिकीकरण करना केवल एक चुनावी वादा नहीं था, बल्कि यह पंजाब को पुनः 'रंगला पंजाब' बनाने की दिशा में एक बुनियादी नींव है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनने के बाद अब पंजाब का लक्ष्य हर क्षेत्र—चाहे वह स्वास्थ्य हो, रोजगार हो या उद्योग—में देश में प्रथम स्थान हासिल करना है। नीति आयोग की इस रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और नीतियां पारदर्शी हों, तो सरकारी शिक्षा तंत्र का पूरी तरह से कायाकल्प किया जा सकता है।