अब टलेंगे रेल हादसे! पटियाला में दौड़ा देश का पहला AI पावर्ड रेल इंजन, पलक झपकते पकड़ेगा OHE और ट्रैक की खराबी

अब टलेंगे रेल हादसे! पटियाला में दौड़ा देश का पहला AI पावर्ड रेल इंजन, पलक झपकते पकड़ेगा OHE और ट्रैक की खराबी

भारतीय रेलवे ने रेल सुरक्षा, आधुनिकीकरण और सुरक्षित सफर की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी छलांग लगाई है। देश में अक्सर ओवरहेड बिजली तारों में स्पार्किंग, तारों के टूटने, बिजली ट्रिपिंग या पटरियों पर तकनीकी खराबी के कारण बड़े रेल हादसे और ट्रेनों की लंबी देरी देखने को मिलती थी। लेकिन अब इन तकनीकी खामियों और खतरों पर समय रहते लगाम लगाने के लिए पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स (PLW) ने देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित रेल इंजन तैयार कर पटरियों पर उतार दिया है। भारतीय रेलवे की किसी भी उत्पादन इकाई द्वारा विकसित किया गया यह अपनी तरह का पहला अनोखा और अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव है, जो चलती ट्रेन के दौरान ही खतरे को भांपकर मेंटेनेंस टीम को आगाह कर देगा।

पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स ने रचा इतिहास, महिला तकनीशियन ने दिखाई हरी झंडी

पंजाब के पटियाला स्थित पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स (PLW) वर्कशॉप में इस ऐतिहासिक इंजन (लोकोमोटिव नंबर 39642) को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस गौरवपूर्ण पल की सबसे खास बात यह रही कि इस अत्याधुनिक लोकोमोटिव को पीएलडब्ल्यू की वरिष्ठ महिला कर्मचारी और तकनीशियन नीलम देवी ने प्रधान मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (PCAO) एस. के. श्रीवास्तव की मौजूदगी में हरी झंडी दिखाई। इस दौरान रेलवे कार्यशाला के तमाम वरिष्ठ अधिकारी, इंजीनियर और कर्मचारी परिषद के प्रतिनिधि मौजूद रहे। रेलवे अधिकारियों ने इसे भारतीय रेल के स्वर्णिम इतिहास में 'गेम चेंजर' कदम करार दिया है।

डब्ल्यूपी-7 श्रेणी का शक्तिशाली इंजन, रियल-टाइम OHE मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस

पटियाला में तैयार किया गया यह नया एआई इंजन शक्तिशाली पैसेंजर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव WAP-7 श्रेणी में तैयार किया गया है। इस इंजन की सबसे बड़ी यूएसपी इसमें इन-बिल्ट किया गया 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) मॉनिटरिंग सिस्टम' है।

इंजन के ऊपरी और बाहरी हिस्सों में हाई-डेफिनिशन स्मार्ट कैमरे, थर्मल इमेजिंग सेंसर्स और एआई एल्गोरिदम लगाए गए हैं। जब ट्रेन 130 से 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी, तब भी यह सिस्टम ऊपर से गुजर रही 25,000 वोल्ट की हाई-टेंशन बिजली लाइन (OHE) और नीचे बिछी पटरियों की प्रति सेकंड लाइव स्कैनिंग करता रहेगा।

बिजली की स्पार्किंग से लेकर ढीले तारों तक, पलक झपकते पकड़ेगा हर गड़बड़ी

अक्सर चलती ट्रेनों में ओवरहेड वायर से पैंटोग्राफ टकराने या तारों में खिंचाव की वजह से तेज स्पार्किंग (आर्किंग) होती है, जिससे बिजली की लाइनें टूट जाती हैं और रूट घंटों बाधित रहता है। यह एआई सिस्टम तारों में होने वाली मामूली सी स्पार्किंग, फॉल्टी ड्रॉपर्स, ढीले पुर्जे, कैटेनरी स्ट्रैंड्स का टूटना, इंसुलेटर की दरारें और न्यूट्रल सेक्शन के मिसअलाइनमेंट को तुरंत पकड़ लेगा। इतना ही नहीं, रेलवे ट्रैक के किनारे उगी झाड़ियों-पेड़ की टहनियों के तारों से छूने या खंभों पर पक्षियों के बने घोंसलों को भी यह सिस्टम तुरंत स्कैन कर लेता है, जिससे शॉर्ट-सर्किट का जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस से टलेंगे हादसे और खत्म होगी ट्रेनों की लेटलतीफी

पारंपरिक व्यवस्था में रेलवे ट्रैकों और बिजली तारों की जांच के लिए मेंटेनेंस वैन या मैन्युअल गश्त की जरूरत पड़ती थी, जिससे कई बार छोटी दरारें नजरअंदाज हो जाती थीं और बाद में बड़े हादसे का सबब बनती थीं।

यह एआई सिस्टम 'प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस' (संभावित खराबी की एडवांस चेतावनी) तकनीक पर काम करता है। जैसे ही सिस्टम किसी तार या ट्रैक पर असामान्यता देखता है, वह खराबी की सटीक लोकेशन, खंभा नंबर (Pole Number) और तकनीकी डेटा तुरंत कंट्रोल रूम और नजदीकी मेंटेनेंस डिपो को वायरलेस तरीके से भेज देता है। इससे रेलवे इंजीनियर ट्रेन के पहुंचने से पहले ही उस हिस्से को दुरुस्त कर सकेंगे। तारों के टूटने या इंजन ट्रिपिंग की घटनाएं न होने से ट्रेनों का बेवजह लेट होना बंद होगा और यात्रियों को बिना रुकावट सुरक्षित व समयबद्ध सफर मिल सकेगा।

आत्मनिर्भर भारत और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की रीढ़ बनेगा नया AI लोको

भारतीय रेलवे लगातार अपने नेटवर्क को आधुनिक बना रहा है और सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों के साथ नेटवर्क का पूर्ण विद्युतीकरण कर चुका है। ऐसे में 100 प्रतिशत सुरक्षित संचालन के लिए इस तरह के स्वदेशी एआई-संचालित इंजनों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स द्वारा शुरू किया गया यह सफल परीक्षण आने वाले समय में देश के सभी प्रमुख रूटों पर चलने वाले लोकोमोटिव्स में भी लागू किया जाएगा, जिससे भारतीय रेल का सफर पहले से कहीं अधिक भरोसेमंद और दुर्घटना-मुक्त बन सकेगा।