12 सितंबर को कैबिनेट मंत्री ईटीओ के घर का घेराव, पन्नू बोले- 'मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष'

12 सितंबर को कैबिनेट मंत्री ईटीओ के घर का घेराव, पन्नू बोले- 'मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष'

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की भगवंत मान सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच टकराव गहराता जा रहा है। महंगाई भत्ते (DA) के बकाए, पुरानी पेंशन बहाली (OPS), एसीपी (ACP) लाभ और अन्य वित्तीय मांगों को लेकर कर्मचारी संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। 'साझा मुलाजिम मंच' और 'मुलाजिम व पेंशनर्स साझा फ्रंट' के आह्वान पर कर्मचारियों ने तरनतारन समेत प्रदेश के विभिन्न जिला प्रबंधकीय परिसरों (DAC) पर धरना देकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस विरोध प्रदर्शन के बाद कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि 12 सितंबर को अमृतसर में पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के आवास का घेराव किया जाएगा। मंच के कन्वीनर सुखप्रीत सिंह पन्नू ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक सरकार लिखित में उनकी न्यायसंगत मांगें पूरी नहीं करती, तब तक उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

12 सितंबर को अमृतसर में बड़ा जुटान, मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के आवास का होगा घेराव

साझा मुलाजिम मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण बैठकों और ज्ञापनों के जरिए अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण अब सड़कों पर उतरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। इसी क्रम में 12 सितंबर को अमृतसर में पूरे माझा क्षेत्र और पंजाब भर के हजारों कर्मचारी जुटेंगे और कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के सरकारी व निजी आवास का पूर्ण घेराव करेंगे।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह केवल एक मंत्री के आवास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि साझा समन्वय समिति के फैसले के तहत आने वाले दिनों में अन्य मंत्रियों और विधायकों के आवासों के बाहर भी ऐसे ही कड़े विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

किसान संगठनों का भी मिला साथ: बीकेयू (उगराहां) ने दिया खुला समर्थन

पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के इस आंदोलन को प्रदेश के सबसे बड़े किसान संगठन 'भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां)' का भी खुला समर्थन मिल गया है। किसान नेताओं ने धरने में शामिल होकर कहा कि किसानों और मजदूरों की तरह ही कर्मचारी वर्ग भी सरकार की वादाखिलाफी का शिकार है। संयुक्त किसान मोर्चा और कर्मचारी यूनियनों के इस तालमेल ने पंजाब सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था की नई चुनौती खड़ी कर दी है।

क्या हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें?

मंच के कन्वीनर सुखप्रीत सिंह पन्नू, महासचिव अंग्रेज सिंह और वित्त सचिव जसपाल सिंह ने धरने को संबोधित करते हुए कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को रेखांकित किया:

  • 18% डीए का बकाया: कर्मचारियों का लगभग 18 प्रतिशत महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) और उसका पिछला एरियर तुरंत जारी किया जाए।

  • पुरानी पेंशन योजना (OPS) का पूर्ण क्रियान्वयन: सरकार ने ओपीएस की सैद्धांतिक घोषणा तो कर दी, लेकिन जमीन पर उसकी स्पष्ट नियमावली और शर्तें तय नहीं की हैं। नए भर्ती कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन के दायरे में लाया जाए।

  • एसीपी और वेतन भत्ते: सुनिश्चित करियर प्रगति (ACP) योजना के रुके हुए लाभ और विभिन्न विभागों में बंद किए गए भत्तों को बहाल किया जाए।

  • कच्चे मुलाजिमों का पक्का होना: संविदा, आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों को बिना किसी शर्त के नियमित किया जाए।

  • 'नो वर्क, नो पे' का आदेश वापस लेना: हड़ताल और विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले कर्मचारियों पर सरकार द्वारा जारी किए गए वेतन कटौती के दंडात्मक आदेशों को बिना शर्त निरस्त किया जाए।

पन्नू बोले: 'आप सरकार कर रही है अनदेखी, दमनकारी नीतियों से नहीं डरेंगे'

कन्वीनर सुखप्रीत सिंह पन्नू ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले आम आदमी पार्टी ने कर्मचारियों की सभी जायज मांगों को पहली कलम से पूरा करने का वादा किया था, लेकिन आज वही सरकार कर्मचारियों की आवाज दबाने के लिए 'नो वर्क, नो पे' जैसे हथकंडों का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा, "सरकार हमें डराने की कोशिश न करे। हमने पहले की सरकारों के दमन का भी सामना किया है। जब तक 18% डीए, पेंशन और पे-स्केल से जुड़े वित्तीय मामलों का आधिकारिक शासनादेश जारी नहीं होता, तब तक कर्मचारी पीछे हटने वाले नहीं हैं। 12 सितंबर का घेराव सरकार की आंखें खोलने का काम करेगा। संघर्ष हमारा अधिकार है और यह हर हाल में जारी रहेगा।"

प्रशासनिक हलकों में बेचैनी, वार्ताओं का दौर बेनतीजा

उधर, चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय से लेकर जिला मुख्यालयों तक मिनिस्टीरियल स्टाफ की हड़ताल और सामूहिक अवकाश से सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप होने की नौबत आ गई है। हालांकि शासन स्तर पर सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कर्मचारी यूनियनों की बैठकें भी आयोजित की गईं, लेकिन किसी ठोस वित्तीय सहमति के अभाव में वार्ताएं बेनतीजा साबित हुईं। अब देखना यह होगा कि 12 सितंबर के प्रस्तावित महा-घेराव से पहले क्या मान सरकार कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को बातचीत की नई मेज पर बुलाती है या फिर यह आंदोलन पंजाब में और विकराल रूप धारण करेगा।