बाल विवाह के खिलाफ पंजाब सरकार का 'मिशन शक्ति': 5 नाबालिगों की शादियां रुकवाईं, रोकथाम के लिए 2,076 नोडल अधिकारी तैनात
पंजाब में सामाजिक कुरीतियों और बेटियों के अधिकारों के हनन के खिलाफ राज्य सरकार ने निर्णायक कानूनी व प्रशासनिक जंग छेड़ दी है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग ने राज्य भर में बाल विवाह की रोकथाम के लिए विशेष सघन अभियान शुरू किया है। इस तत्परता के चलते हाल के दिनों में विभिन्न जनपदों में समय रहते हस्तक्षेप कर 5 नाबालिग बालिकाओं की शादियां रुकवाई गई हैं। कम उम्र में बच्चियों को वैवाहिक बंधनों में बांधने की इस गैर-कानूनी प्रथा को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए राज्य सरकार ने जमीनी स्तर पर 2,076 अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपकर मैदान में उतारा है। यह प्रशासनिक अमला न केवल गांवों और वार्डों में मुखबिर तंत्र को मजबूत करेगा, बल्कि शादी के आयोजनों, मैरिज पैलेसों, हलवाइयों, टेंट व्यवसायियों और धार्मिक स्थलों पर होने वाले फेरों पर सीधी नजर रखेगा। सरकार के इस कड़े रुख से उन परिवारों और बिचौलियों में हड़कंप मच गया है जो कानून को ताक पर रखकर नाबालिगों का विवाह कराने की योजना बना रहे थे।
पंजाब में बाल विवाह पर जीरो टॉलरेंस: 5 बाल विवाह रुकवाकर बालिकाओं को सुरक्षित किया
महिला एवं बाल विकास विभाग को गुप्त सूत्रों और चाइल्ड हेल्पलाइन के जरिए सूचनाएं मिली थीं कि राज्य के कुछ सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों में नाबालिग लड़कियों का विवाह गुपचुप तरीके से कराने की साजिश रची जा रही है। सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण इकाइयों (DCPU), स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक टीमों ने संयुक्त रूप से त्वरित छापेमारी की। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जब वर और वधू पक्ष के जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और स्कूल के दस्तावेजों की जांच की, तो 5 अलग-अलग मामलों में कन्याओं की उम्र विवाह के लिए कानूनी रूप से तय 18 वर्ष से कम पाई गई।
प्रशासनिक टीम ने तत्काल प्रभाव से विवाह की सभी रस्मों को रुकवाया और दोनों पक्षों के परिजनों को सख्त चेतावनी दी। माता-पिता और रिश्तेदारों को बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के कानूनी प्रावधानों से अवगत कराया गया। इसके साथ ही दोनों पक्षों से लिखित शपथ पत्र (Undertaking) लिया गया कि जब तक बच्ची 18 वर्ष की वयस्क आयु पूरी नहीं कर लेती, तब तक उसका विवाह किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जाएगा। बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत कर आवश्यक काउंसलिंग उपलब्ध कराई गई, ताकि उनके शिक्षण और मानसिक विकास में कोई बाधा न आए।
जमीनी स्तर पर 2,076 नोडल अधिकारियों की तैनाती: गांव-गांव फैलेगा प्रशासनिक पहरा
बाल विवाह की रोकथाम केवल कागजी आदेशों तक सीमित न रहे, इसके लिए पंजाब सरकार ने पूरे राज्य में 2,076 समर्पित अधिकारियों को 'बाल विवाह निषेध अधिकारी' (Child Marriage Prohibition Officers - CMPOs) के रूप में अधिसूचित और सक्रिय किया है। इस विशाल नेटवर्क में बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO), आंगनवाड़ी सुपरवाइजर, ग्राम पंचायत सचिव, राजस्व अधिकारी और खंड स्तर के प्रशासनिक कर्मियों को शामिल किया गया है।
इन 2,076 अधिकारियों को उनके संबंधित कार्यक्षेत्र में मजिस्ट्रेट स्तर की निगरानी शक्तियां दी गई हैं। इनका मुख्य दायित्व अपने अधिकार क्षेत्र के हर गांव, मजरे और शहरी वार्ड में किसी भी संभावित बाल विवाह की अग्रिम सूचना जुटाना होगा। यदि किसी इलाके में 18 वर्ष से कम आयु की लड़की या 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह तय होने की भनक लगती है, तो ये अधिकारी सीधे पुलिस सहायता लेकर मौके पर पहुंचेंगे और विवाह रुकवाने के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया शुरू कराएंगे। इसके अतिरिक्त, स्कूल स्तर पर भी शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है ताकि यदि कोई छात्रा लंबे समय तक बिना किसी ठोस कारण के स्कूल से अनुपस्थित रहती है, तो उसकी तुरंत जांच की जा सके।
बाल विवाह निषेध कानून (PCMA 2006): सख्त सजा, गैर-जमानती अपराध और हलफनामे के नियम
बाल विवाह भारत के कानून में एक संज्ञेय और गैर-जमानती (Cognizable and Non-Bailable) अपराध है। बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी रूप से शादी के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है। इस कानून की धाराएं इतनी सख्त हैं कि इसमें केवल विवाह तय करने वाले माता-पिता ही दोषी नहीं माने जाते, बल्कि विवाह को संपन्न कराने और उसमें सहयोग करने वाला हर व्यक्ति अपराधी की श्रेणी में आता है।
यदि कोई व्यक्ति बाल विवाह कराता है, उसमें शामिल होता है या उसे बढ़ावा देता है, तो उसे 2 वर्ष तक के कठोर कारावास और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। कानून के दायरे में शादी कराने वाले पंडित, मौलवी, पादरी, ग्रंथी, विवाह स्थल (मैरिज पैलेस/होटल) के मालिक, खानपान की व्यवस्था करने वाले कैटरर्स, बैंड-बाजा बजाने वाले और विवाह में उपस्थित होने वाले आमंत्रित अतिथि तक शामिल हैं। पंजाब सरकार ने मैरिज पैलेस एसोसिएशनों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बुकिंग स्वीकार करने से पहले वर और वधू दोनों के प्रामाणिक आयु प्रमाण पत्र (जैसे 10वीं की अंकतालिका या नगर निगम जन्म प्रमाण पत्र) अनिवार्य रूप से रिकॉर्ड में दर्ज किए जाएं।
पंजाब से लेकर उत्तर प्रदेश तक: सामाजिक कुरीति के खिलाफ अंतर्राज्यीय प्रशासनिक नेटवर्क
बाल विवाह की समस्या केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के कई हिस्सों में सामाजिक रूढ़िवादिता, अशिक्षा और आर्थिक तंगी की आड़ में दबी हुई है। पंजाब के सीमावर्ती जिलों से लेकर उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों तक इस कुरीति के तार जुड़े मिलते हैं। उत्तर प्रदेश के उन्नाव, कानपुर देहात, फतेहपुर और बुंदेलखंड के कई इलाकों में भी जिला प्रशासन और चाइल्ड वेलफेयर कमेटियां 'मिशन वात्सल्य' के अंतर्गत इसी प्रकार की सतर्कता बरत रही हैं।
उन्नाव जनपद के ग्रामीण इलाकों में जहां कृषि और असंगठित क्षेत्र से जुड़े परिवारों में कम उम्र में बेटियों के हाथ पीले करने की पुरानी धारणाएं देखने को मिलती हैं, वहां भी ग्राम स्तर की बाल संरक्षण समितियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अक्सर देखा गया है कि कानूनी सख्ती से बचने के लिए परिवार अंतर्राज्यीय स्तर पर दूसरे राज्यों या सीमावर्ती जिलों में जाकर गुपचुप विवाह करने की कोशिश करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने पड़ोसी राज्यों हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती जिला प्रशासनों के साथ सूचनाएं साझा करने का डिजिटल समन्वय स्थापित किया है, ताकि किसी भी लड़की को धोखे से सीमा पार ले जाकर विवाह के बंधन में न धकेला जा सके।
कैसे करें शिकायत? चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और सामुदायिक सहभागिता से बनेगी बात
बाल विवाह को पूर्ण रूप से समाप्त करने के लिए जनता की सजगता सबसे बड़ा हथियार है। पंजाब सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके आस-पड़ोस या जान-पहचान में कहीं भी किसी नाबालिग बालक या बालिका का विवाह कराया जा रहा हो, तो वे बिना किसी भय के इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें। सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम और पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
नागरिक किसी भी समय राष्ट्रीय आपातकालीन चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 अथवा महिला हेल्पलाइन 181 और पुलिस हेल्पलाइन 112 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी थाने, तहसील कार्यालय या बाल विकास परियोजना अधिकारी के दफ्तर में सीधे सूचना दी जा सकती है। पंजाब सरकार का यह सख्त कदम समाज को यह स्पष्ट संदेश देता है कि बेटियों का स्थान मंडप में नहीं, बल्कि स्कूल और कॉलेज में है। जब बेटियां शिक्षित और सशक्त होंगी, तभी समाज और राष्ट्र का वास्तविक विकास संभव हो सकेगा।