बीमार मां से मिलने के लिए जगतार सिंह हवारा की पैरोल पर पंजाब के राज्यपाल ने दी सिफारिश! केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बब्बर खालसा के पूर्व आतंकी जगतार सिंह हवारा की पैरोल याचिका पर एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षरित पत्र और चंडीगढ़ स्थित राजभवन में हुई मुलाकात के बाद, पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने जगतार सिंह हवारा को अपनी बेहद बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल देने की आधिकारिक सिफारिश केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को भेज दी है। चूंकि हवारा इस समय दिल्ली की मंडोली सेंट्रल जेल संख्या 15 में बंद है और उसका मामला केंद्र शासित प्रदेश के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए राज्यपाल का यह हस्तक्षेप प्रक्रिया में निर्णायक माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मानवीय आधार पर हवारा को 10 दिन की पैरोल दिए जाने की पुरजोर वकालत की है। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को अवगत कराया कि हवारा की मां की उम्र 81 वर्ष से अधिक हो चुकी है और वे गंभीर शारीरिक व मानसिक बीमारियों से जूझ रही हैं। वर्तमान में उनकी स्थिति अर्ध-चेतन (semi-conscious) हो चुकी है और पिछले 31 वर्षों से अपने बेटे से न मिल पाने के कारण उनकी यह अंतिम इच्छा है। मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट किया कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में भी इस संबंध में याचिका (CRWP No. 3868/2026) विचाराधीन है, जहाँ अदालत ने पैरोल आवेदन पर समयबद्ध विचार करने के निर्देश दिए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी इस संवेदनशील मुद्दे पर बड़ा दिल दिखाते हुए मानवीय दृष्टिकोण का समर्थन किया है। बिट्टू ने कहा कि हालांकि उनका परिवार बेअंत सिंह के सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूल सकता, लेकिन समाज को करुणा, मानवता और शांति के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सक्षम प्राधिकारी कानून के दायरे में रहते हुए इस मामले में उचित और मानवीय निर्णय लेंगे।
31 साल बाद बीमार मां से मिलने की गुहार: कस्टडी पैरोल इनकार और कानून-व्यवस्था की गारंटी
पैरोल प्रक्रिया के बीच एक नया तकनीकी मोड़ तब आया जब दिल्ली जेल प्रशासन ने अदालत के निर्देशों और सुरक्षा समीक्षा के आधार पर जगतार सिंह हवारा को दो दिन की 'कस्टडी पैरोल' (Custody Parole) देने का प्रस्ताव रखा। कस्टडी पैरोल के तहत सशस्त्र पुलिस बल की कड़ी निगरानी में कैदी को गंतव्य स्थान पर ले जाया जाता है। हालांकि, हवारा ने दो दिन की कस्टडी पैरोल स्वीकार करने से यह कहते हुए साफ इनकार कर दिया कि वह कोई विशेष पुलिस कस्टडी या भारी सुरक्षा पहरा नहीं चाहता, बल्कि 10 दिनों की सामान्य (नियमित) पैरोल की मांग कर रहा है। इसके बाद दिल्ली जेल प्रशासन और हवारा के वकीलों के बीच पैरोल की शर्तों पर सहमति बनाने के लिए बातचीत जारी है।
कानून और व्यवस्था की स्थिति को लेकर उठने वाले सवालों पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल को औपचारिक गारंटी दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हवारा को 10 दिनों की पैरोल पर रिहा किया जाता है, तो पंजाब सरकार राज्य में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी गारंटी लेती है। हवारा के परिवार और समर्थकों ने भी सरकार को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और विभिन्न सिख संगठन लंबे समय से 'बंदी सिखों' की रिहाई और पैरोल की मांग उठाते रहे हैं। यद्यपि कुछ महीनों पहले राज्य के जेल विभाग की ओर से दर्ज आपराधिक मामलों के आधार पर एक प्रतिकूल रिपोर्ट भेजी गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री मान द्वारा अब व्यक्तिगत रूप से इस मामले को उठाने और राज्यपाल द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई सिफारिश के बाद यह साफ हो गया है कि अंतिम फैसला अब केंद्र सरकार के गृह विभाग को ही लेना है। यदि गृह मंत्रालय राज्यपाल की सिफारिश को मंजूरी दे देता है, तो तीन दशकों से अधिक समय बाद हवारा अपने पैतृक गांव जाकर अपनी बीमार मां से मिल सकेगा।