पंजाब: मुफ्त आटा योजना के ₹500 करोड़ टेंडर पर भड़के राजा वड़िंग

पंजाब: मुफ्त आटा योजना के ₹500 करोड़ टेंडर पर भड़के राजा वड़िंग

पंजाब की सियासत में आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और टेंडरों के आवंटन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। लुधियाना लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने राज्य सरकार की 'मुफ्त आटा योजना' के तहत जारी किए गए 500 करोड़ रुपये के भारी-भरकम टेंडर पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस सांसद ने चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि जनता के खून-पसीने की कमाई से भरे सरकारी खजाने को अनावश्यक और आडंबरपूर्ण योजनाओं में लुटाया जा रहा है। वड़िंग ने सीधे तौर पर भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार की मंशा पर संदेह जताते हुए कहा कि जब सूबे के गरीब परिवार वर्षों से सुचारू रूप से चल रही गेहूं वितरण प्रणाली से पूरी तरह संतुष्ट हैं, तो फिर पैकेज्ड आटा बांटने के नाम पर आधा हजार करोड़ रुपये का टेंडर निकालकर निजी एजेंसियों और चहेते ठेकेदारों की जेब भरने का क्या औचित्य है।

मौजूदा गेहूं वितरण प्रणाली से जब जनता संतुष्ट, तो 500 करोड़ के नए टेंडर की क्या जरूरत: राजा वड़िंग का सवाल

सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने राज्य सरकार के नीतिगत फैसलों की विसंगतियों को उजागर करते हुए कहा कि पंजाब में दशकों से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत लाभार्थियों को गेहूं का आवंटन पारदर्शी तरीके से किया जाता रहा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में राशन कार्ड धारक अपनी पसंद की स्थानीय चक्कियों से ताजा आटा पिसवाते हैं, जिससे उन्हें पोषणयुक्त और गुणवत्तापूर्ण आटा मिलता है। ऐसे में अचानक गेहूं की जगह पैक्ड आटा वितरित करने के नाम पर 500 करोड़ रुपये का विशाल टेंडर निकालना प्रशासनिक समझदारी के बिल्कुल परे है। वड़िंग ने स्पष्ट किया कि गेहूं को आटे में बदलने, उसकी पैकिंग करने, ब्रांडिंग करने और घर-घर पहुंचाने के परिवहन खर्च के नाम पर जिस तरह 500 करोड़ रुपये आवंटित किए जा रहे हैं, वह सीधे तौर पर वित्तीय कुप्रबंधन और जनता के संसाधनों की खुली बर्बादी है।

गरीबों के कल्याण के खिलाफ नहीं, लेकिन सरकारी धन की अंधाधुंध फिजूलखर्ची बर्दाश्त से बाहर: कांग्रेस सांसद

अपनी बात को विस्तार से रखते हुए राजा वड़िंग ने साफ किया कि कांग्रेस पार्टी या वह स्वयं समाज के कमजोर, वंचित और गरीब तबके को मुफ्त सुविधाएं या सामाजिक सुरक्षा देने के कतई विरोधी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद, आर्थिक रूप से पिछड़े और मजदूर परिवारों की सहायता के लिए सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का अनवरत चलना बेहद आवश्यक है और इन योजनाओं में कभी कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। लेकिन कल्याणकारी योजनाओं की आड़ में प्रशासनिक बजट को बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना और सरकारी धन का दुरुपयोग करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। वड़िंग ने जोर देकर कहा कि जनकल्याण की योजनाएं बंद नहीं होनी चाहिए, लेकिन जनता के एक-एक पैसे का पारदर्शी और सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना किसी भी चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार की पहली और प्राथमिक नैतिक जिम्मेदारी होती है।

आप सरकार पर अपने करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने का आरोप: शिक्षा और स्वास्थ्य बजट बढ़ाने की रखी मांग

पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने आम आदमी पार्टी की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि इस विशाल टेंडर के जरिए वास्तव में सत्ता के करीबी लोगों और कुछ चुनिंदा कॉरपोरेट्स को वित्तीय लाभ पहुंचाने की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर जरूरतमंदों की वास्तविक समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। राजा वड़िंग ने वैकल्पिक आर्थिक नीति का सुझाव देते हुए कहा कि अगर मान सरकार इस तरह के 500 करोड़ रुपये के अनावश्यक और दिखावटी खर्चों पर रोक लगाए, तो बचाई गई इस विशाल पूंजी का इस्तेमाल पंजाब के चरमरा रहे शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे को सुधारने में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस पैसे से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और मेधावी बच्चों के लिए मुफ्त उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग की व्यवस्था की जा सकती है, साथ ही सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, जीवनरक्षक दवाइयों की उपलब्धता और आधुनिक चिकित्सा मशीनों की खरीद की जा सकती है।

योजनाओं की केवल घोषणाएं करने से नहीं होगा पंजाब का भला: वित्तीय अनुशासन लागू करने की नसीहत

कांग्रेस सांसद ने भगवंत मान सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि केवल लोकलुभावन योजनाओं का ढोल पीटने और करोड़ों रुपये के प्रचार विज्ञापनों से पंजाब के आर्थिक संकट का समाधान नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि पंजाब पहले से ही भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है, ऐसे में सरकार को हर एक रुपये के खर्च पर वित्तीय अनुशासन और ऑडिट की सख्त व्यवस्था लागू करनी चाहिए। वड़िंग ने राज्य सरकार से मांग की कि मुफ्त आटा योजना के 500 करोड़ रुपये के टेंडर की पूरी प्रक्रिया, शर्तों और इसके पीछे के वित्तीय औचित्य की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यह सार्वजनिक किया जाए कि इस टेंडर से पंजाब के आम करदाताओं को क्या प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनता के पैसे की इस कथित बर्बादी को तुरंत नहीं रोका, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा तक पूरी ताकत से उठाएगी।